ETV Bharat / state

अलवर: हर माह बनाते सड़क सुरक्षा की रणनीति, लेकिन 13 ब्लैक स्पॉट भर नहीं पाए, डेढ़ माह में 31 लोग गंवा चुके जान

ज्यादातर ब्लैक स्पॉट एनएच 248-ए थानागाजी-अलवर मार्ग एवं अलवर-नौगांवा रोड पर चिन्हित किए हैं. ब्लैक स्पॉट का चिन्हिकरण एक्सीडेंटल डाटा को देखकर किया जाता है.

Public Works Department, alwar
सार्वजनिक निर्माण विभाग,अलवर (ETV Bharat Alwar)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 27, 2026 at 8:08 AM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

अलवर: सड़क हादसों में कमी लाने, हादसों में लोगों की जान बचाने और सड़क सुरक्षा को लेकर हर महीने विभिन्न विभागों की बैठक होती है, जिसमें लंबी चौड़ी रणनीति बनाई जाती है, लेकिन इन बैठकों की हकी​कत यह कि पीडब्ल्यूडी की ओर से जिले में चिन्हित 13 ब्लैक स्पॉट भी खत्म नहीं हो पा रहे हैं. ब्लैक स्पॉट नहीं भर पाने का ही नतीजा है कि वर्ष 2026 में डेढ़ महीने में 31 लोग जान गंवा चुके हैं. हालांकि आईरेड एप्लीकेशन के माध्यम से 31 ब्लैक स्पॉट पर कार्रवाई की जरूरत बताई गई है.

सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीक्षण अभियंता भूरी सिंह ने बताया कि जिले में 13 ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर उन पर सुधार कार्य शुरू किए हैं. जिले में ज्यादातर ब्लैक स्पॉट एनएच 248-ए थानागाजी-अलवर मार्ग पर चिन्हित किए हैं. अलवर-नौगांवा रोड पर भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं. ब्लैक स्पॉट का चिन्हिकरण एक्सीडेंटल डाटा को देखकर किया जाता है. अधीक्षण अभियंता सिंह ने बताया कि ब्लैक स्पॉट वाले चार से पांच स्थानों पर अस्थायी तौर पर कार्य कराया गया है. इनमें सिग्नल, रोड मार्किंग, स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड लगाने जैसे कार्य किए जा चुके हैं. कुछ ब्लैक स्पॉट पर आरओबी निर्माण के लिए नेशनल हाइवे अथोरिटी को प्रस्ताव भेजे हैं.

अधीक्षण अभियंता भूरी सिंह (वीडियो ईटीवी भारत अलवर)

पढ़ें:हादसों पर लगेगी लगाम! : IIT मद्रास के साथ अलवर पुलिस का पायलट प्रोजेक्ट, ब्लैक स्पॉट खत्म करेगी FPS तकनीक

ये होते हैं ब्लैक स्पॉट: अधीक्षण अभियंता सिंह ने बताया कि किसी भी रोड पर ब्लैक स्पॉट वह जगह होती है, जहां 500 मीटर के दायरे में सड़क हादसों में तीन से पांच मौत होती है या लगातार मौत होती रहती हैं. इस समस्या पर संज्ञान लेकर टीमें निरीक्षण करती हैं, जिसमें सड़क पर जो भी खामियां पाई जाती है, उनमें सुधार कर दूर किया जाता है. जिले में पीडब्ल्यूडी के 13 ब्लैक स्पॉट की खामियों को भी दूर करने के उपाय किए जा रहे हैं ताकि सड़क हादसों में कमी ला सकें.

आईरेड इंटिग्रेटेड रोड एक्सीडेंट: डाटाबेस एप्लीकेशन के माध्यम से जिले में ऐसे 31 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं, जहां तत्काल सुधार की जरूरत है. इस एप से पुलिस, परिवहन और चिकित्सा विभाग मिलकर दुर्घटनाओं का डाटा अपलोड करते हैं ताकि पता चले कि किस स्थान पर कितनी बार और किस कारण से हादसे हुए. डाटा आधारित यह प्रणाली सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है. जिले में कई ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं, जहां सड़क पर तीखे मोड़, अपर्याप्त रोशनी, टूटी डिवाइडर लाइन, अवैध कट या अतिक्रमण समस्या हैं. इन ब्लैक स्पॉट पर अस्थाई रूप से कार्य किए जाते हैं, लेकिन कई बार ग्रामीण अपनी सुविधा के चलते इन्हें हटा देते हैं. विभाग ग्रामीणों से समझाइश करता है, वे सुरक्षा के अस्थायी उपायों से छेड़छाड़ नहीं करें.

पढ़ें:राजस्थान में सड़क हादसे : जिला स्तरीय रोड सेफ्टी टास्क फोर्स के गठन को मंजूरी, 2030 तक मृत्यु दर आधा करने का लक्ष्य