डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा- अब मजदूरों को 125 दिन रोजगार की गारंटी, समय पर पेमेंट होगा
यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कानपुर में प्रेस कान्फ्रेंस की. उन्होंने मजदूरों-किसानों के लिए 125 दिन के रोजगार की गारंटी का ऐलान किया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 7:55 PM IST
|Updated : January 10, 2026 at 8:08 PM IST
कानपुर/बलिया/फर्रुखाबाद/संतकबीरनगर/शामली: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक शनिवार को कानपुर पहुंचे. क्षेत्रीय कार्यालय में हुई प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मजदूरों-किसानों के लिए 125 दिन के रोजगार की गारंटी का ऐलान किया.
उपमुख्यमंत्री पाठक ने कहा कि हाल ही में संसद से पारित इस अधिनियम को लेकर विपक्षी दल भ्रम फैला रहे हैं. इस भ्रम को दूर करने और जनता को सही जानकारी देने के लिए यह प्रेस कान्फ्रेंस की गयी है.
किसानों-मजदूरों को समय पर मिलेगा भुगतान: उन्होंने कहा कि मनरेगा में फर्जी और दोहरे जॉब कार्ड, समय पर भुगतान न होना, संपत्ति सृजन का स्थायी रिकॉर्ड न होना और केवल 100 दिनों की रोजगार गारंटी जैसी अनियमितताएं थीं. इससे मजदूरों के सामने बाकी दिनों में आजीविका का संकट बना रहता था.

रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन किया गया: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि 'वीजी रामजी अधिनियम' के तहत रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है. इससे ग्रामीण मजदूरों को अधिक दिनों तक सुनिश्चित काम मिल सकेगा. अधिनियम में प्रावधान है कि अगर किसी मजदूर ने काम के लिए आवेदन किया और ग्राम पंचायत समय पर काम उपलब्ध नहीं करा पाई, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा.
मजदूरों का शोषण रोकने में मदद मिलेगी: उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रावधान प्रशासन की जवाबदेही तय करेगा और इससे मजदूरों का शोषण रोकने में मदद मिलेगी. सरकार चाहती है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी योजनाओं का लाभ मिले और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके.
60 दिन कृषि कार्यों के लिए मुक्त रखे गए: भारतीय जनता पार्टी के विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) "विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2026" जनजागरण अभियान के तहत संतकबीरनगर पहुंची जिले की प्रभारी मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने हा कि मजदूरों की कमी के कारण खेती प्रभावित होती थी. इसलिए अब 60 दिन कृषि कार्यों के लिए मुक्त रखे गए हैं, ताकि श्रमिक खेती में सहयोग कर सकें. सुरक्षा की गारंटी और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यशैली से हम 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को साकार करेंगे. सरकार हर श्रमिक को पारदर्शी व्यवस्था के जरिए आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित है.
महज सात दिनों के अंदर होगा भुगतान: राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी शनिवार को शामली नगर पालिका परिषद में पहुंचे. उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकार में मनरेगा में बड़े-बड़े घोटाले हुए हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार में मनरेगा के कई बड़े घोटाले सामने आए हैं. इसमें भुगतान की प्रक्रिया 7 दिन में की जाएगी. अगर समय से भुगतान नहीं होता है, तो फिर उस पर ब्याज भी दिया जाएगा.
GPS के माध्यम से लोकेशन ट्रेस की जाएगी: इसका 1 वर्ष में दो बार ऑडिट भी किया जाएगा. जीपीएस के माध्यम से इस योजना में सभी कार्य योजनाओं को ट्रैक भी किया जाएगा. सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी रखा है और इसमें काफी पारदर्शिता भी रखी गई है. जी राम जी योजना में 100 दिन की जगह 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा.
जयवीर सिंह बोले- विपक्षी दल राम नाम से चिढ़ते हैं: पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह शनिवार को फर्रुखाबाद पहुंचे. उन्होंने बताया कि मनरेगा में 100 दिन का रोजगार भी कई बार पूरा नहीं हो पाता था, जबकि ‘वीबीजीरामजी’ स्कीन के तहत 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा. खेती-बाड़ी के समय मजदूरों की उपलब्धता रहेगी.
गांवों को विकास की ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा: इसके लिए इस योजना में दो महीने का अतिरिक्त समय भी तय किया गया है, जिससे किसानों की समस्याएं कम होंगी. महात्मा गांधी ने भी अंतिम समय में ‘हे राम’ कहा था, तो फिर राम के नाम से चिढ़ क्यों है? राम सभी के हैं. बीजेपी का संकल्प रामराज लाना है और सनातन संस्कृति के आधार पर जिले और गांवों को विकास की ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा.
योग्यता होगी तो हिजाब वाली महिला भी राष्ट्रपति बनेगी: बलिया के कलक्ट्रेट में कंबल वितरण प्रोग्राम के दौरान यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि अगर किसी हिजाब वाली महिला में योग्यता होगी, तो वह भी भारत की राष्ट्रपति होने का गौरव हासिल कर सकती है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी.
ओवैसी के बयान पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने यह प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी वर्ग विशेष में नहीं बांटना चाहिए. देश की राष्ट्रपति एक सामान्य परिवार से उठकर प्रथम महिला बनी हैं.
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