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4 कमरों में पढ़ते हैं 1100 बच्चे, बिहार में सरकारी स्कूल की हालत कब सुधरेगी?

बिहार में सरकारी स्कूल की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चार क्लासरूम में 1100 बच्चे पढ़ाई करते हैं. पढ़ें..

government school In Bhojpur
भोजपुर के स्कूल में चार कमरों में 1100 छात्र (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 7, 2026 at 3:10 PM IST

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आरा: बेहतर शिक्षा को लेकर बिहार सरकार चाहे जितना भी दावा कर ले लेकिन स्थिति आज भी चिंताजनक है. भोजपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो बताती है कि स्कूलों की हालत कैसी है. असल में कोईलवर स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय में 1100 बच्चों का पठन-पाठन महज चार कमरों में चलता है. हालांकि विभाग का दावा है कि नया भवन बनकर तैयार है, जल्द ही वहां पठन-पाठन शुरू हो जाएगा.

चार कमरों में 1100 बच्चे करते हैं पढ़ाई: दरअसल, कोईलवर सोन नदी पर बन रहे सिक्स लेन पुल के एप्रोच रोड के लिए कोईलवर का तारामणि भगवान साव उच्चतर विद्यालय के भवन को अधिग्रहण किया गया था. जिसके बाद विद्यालय के भवन को तोड़ दिया गया है. वहीं उस विद्यालय में पढ़ने वाले 1100 बच्चों को बगल के विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया. जिससे बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

चार कमरों में 1100 बच्चे करते हैं पढ़ाई (ETV Bharat)

बच्चों की पढ़ाई हो रही बाधित: ठंड के मौसम के कारण उच्चतर विद्यालय के छात्रों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है. ऐसे बच्चों के पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. बच्चों का कहना है कि लगातार बढ़ती ठंड के कारण उन्हें विद्यालय आने में काफी परेशानी हो रही है. वो बार-बार वह जिला प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि जल्द से जल्द सरकार उन्हें नया भवन में शिफ्ट कर दें ताकि वह सुचारू रूप से पढ़ाई कर सकें.

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कोईलवर स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय (ETV Bharat)

दो शिफ्ट में चलती है क्लास: एक ही स्कूल में दो-दो स्कूलों के बच्चों के शिफ्ट करने के कारण टाइमिंग बदल गई है. दो शिफ्ट में पठन-पाठन होता है. कोईलवर स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय के बच्चों की क्लास सुबह 6:30 से 11 बजे तक चलती है. उसके बाद 11.30 से शाम 4 बजे तक तारामणि भगवान साव उच्चतर विद्यालय के बच्चों को पढ़ाया जाता है. हालांकि बदली हुई परिस्थिति के कारण बच्चों को थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ता है.

"पहले जो हमारा स्कूल था, उसमें अच्छे से पढ़ते थे लेकिन जब से यहां शिफ्ट किया गया है, तब से काफी दिक्कत होती है. पढ़ने वाले बच्चे मॉर्निंग में पढ़ते हैं और उसके बाद हमलोगों की क्लास शुरू होती है. इस वजह से पढ़ाई पर असर पड़ता है."- जायना फातिमा, छात्रा, नवीं कक्षा

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क्लास रूम में पढ़ाते शिक्षक (ETV Bharat)

क्या बोले प्रधानाचार्य?: स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य भी मानते हैं कि कमरे कम होने से काफी परेशानी होती है. हालांकि वे कहते हैं कि कम रूम होने की वजह से दिक्कत तो होती है लेकिन कम संसाधन में भी हमलोग बेहतर काम कर रहे हैं.

"2020 में हमारा जो विद्यालय था, उसका पुरानी भवन फोर लेन में चला गया है. जिसके चलते विद्यालय को यहां शिफ्ट कर दिया गया. विद्यालय हमारा बन रहा है. अगर जल्दी मिल जाता तो और बेहतर तरीके से पठन-पाठन होता. वैसे कम संसाधन में भी हमलोग बच्चों को अपने स्तर से अच्छे से पढ़ाते हैं."- हयात अंजुम, प्रभारी प्रधानाध्यापक

डीईओ ने दिया भरोसा: वहीं, भोजपुर जिला शिक्षा पदाधिकारी मानवेंद्र राय ने बताया कि तारामणि भगवान साव हाई स्कूल का भवन निर्माण चल रहा है. संवेदक ने 15 से 20 दिन का और समय मांगा है. उसके बाद नए भवन में विद्यालय संचालित किया जाएगा. स्कूल का नया भवन 1.20 एकड़ भूमि पर बनाया जा रहा है. जिसे बनाने में करीब 4 करोड़ 65 लाख की लागत से जी प्लस वन केटेगरी का भवन निर्माण कराया जा रहा है.

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नया स्कूल भवन (ETV Bharat)

क्या है पूरा मामला?: इस उच्च विद्यालय के पास फोरलेन बनने से पहले साढ़े 5 एकड़ जमीन थी. सड़क के लिए विद्यालय का जमीन अधिग्रहित कर भवन तोड़ने के बाद इसकी जमीन का बंटाधार हो गया. 5.42 एकड़ जमीन में से फोरलेन के लिए एनएचएआई ने 2.14 एकड़ भूमि अधिग्रहित कर ली. जिससे विद्यालय भवन के साथ साथ इलाके का एकमात्र मैदान भी इसकी चपेट में आ गया. इसके अलावे साढ़े 12 कट्ठा जमीन नए और पुराने एनएच के बीच बच गया, जिसपर अस्थायी क्लासरूम बनाया गया. फिलहाल विद्यालय की 3.28 एकड़ जमीन बची है, जो पहले खेल मैदान हुआ करती थी.

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तारामणि भगवान साव उच्चतर विद्यालय (ETV Bharat)

1955 में बना था स्कूल: कोईलवर में आरा-पटना मुख्य मार्ग पर अवस्थित तारामणि भगवान साव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना स्थानीय समाजसेवी भगवान साह द्वारा 1955 में की गई थी. 5 एकड़ 39 डिसमिल के विशाल भू-भाग में फैले इस विद्यालय परिसर में एक तरफ 31 क्लासरूम और एक विशालकाय ऑडिटोरियम थे. जहां विद्यालय समेत अन्य सरकारी इनडोर कार्य्रकम आयोजित किये जाते थे.

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