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संभल में 1000 बीघा सरकारी जमीन घोटाला, रिटायर्ड SDM समेत 6 गिरफ्तार, 19 पर मुकदमा

झाऊ श्रेणी की भूमि को रेत श्रेणी की भूमि में फर्जी तरीके से परिवर्तित कर 58 फर्जी लोगों के नाम की गई थी.

पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा.
पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 3, 2026 at 10:52 PM IST

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संभल : एक हजार बीघा से ज्यादा सरकारी जमीन के अवैध आवंटन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम ओमबीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार कर्म सिंह, सरकारी वकील, लेखपाल समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

वहीं, एसडीएम समेत कुल 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. गुन्नौर तहसील क्षेत्र के भोना नगला गांव के गैर आबादी वाले क्षेत्र सुखोला में झाऊ श्रेणी की भूमि को रेत श्रेणी की भूमि में फर्जी तरीके से परिवर्तित कर 58 फर्जी लोगों के नाम की गई थी.

आरोपी भेजे गए जेल.
आरोपी भेजे गए जेल. (Photo Credit; ETV Bharat)

पूरा मामला गुन्नौर तहसील के असादपुर, सुखेला और आसपास के गांवों में गंगा किनारे स्थित झाऊ श्रेणी की सरकारी भूमि के कथित अवैध आवंटन से जुड़ा है. लेखपाल स्वाति शर्मा की तहरीर पर थाना गुन्नौर में एफआईआर दर्ज की गई है. शिकायत के अनुसार, ग्राम सुखेला में करीब 71.55 हेक्टेयर, यानी लगभग 1000 बीघा सरकारी भूमि चकबंदी प्रक्रिया के अधीन थी.

आरोप है कि वर्ष 2007 के बाद फर्जी अभिलेख तैयार कर इस भूमि में अवैध प्रविष्टियां की गईं. वर्ष 2018 में तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों और 58 अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था तथा फर्जी प्रविष्टियां निरस्त कर दी गई थीं. इसके बावजूद वर्ष 2019 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी ओमवीर सिंह ने 162 लाभार्थियों के पक्ष में दोबारा पट्टे स्वीकृत कर दिए. बाद की जांच में भूमि के क्षेत्रफल और लाभार्थियों की संख्या में गंभीर विसंगतियां सामने आईं.

आरोपी भेजे गए जेल.
आरोपी भेजे गए जेल. (Photo Credit; ETV Bharat)

वर्ष 2021-22 में संशोधन की कार्रवाई तो हुई, लेकिन राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार खुली ग्राम सभा, सहमति और लॉटरी जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. 2023 में 17 अपात्र लाभार्थियों के पट्टे निरस्त होने के बावजूद अभिलेखों में 145 लाभार्थियों के नाम दर्ज रहे. इतना ही नहीं, किसी भी लाभार्थी को भूमि पर वास्तविक कब्जा नहीं दिलाया गया.

पुलिस के अनुसार, कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी भूमि के आवंटन में गंभीर अनियमितताओं की जांच समिति ने 4 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी. रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर 2 जुलाई को थाना गुन्नौर में मुकदमा दर्ज किया गया.

एफआईआर में रिटायर्ड एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार करम सिंह, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) जय भारद्वाज, ग्राम प्रधान सहित कुल 19 लोगों को नामजद किया गया है. इनमें राजस्व और चकबंदी विभाग के कई तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारी और पंचायत प्रतिनिधि भी शामिल हैं. मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अखिलेश प्रधान कर रहे हैं.

गुन्नौर थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया, रिटायर्ड एसडीएम ओमवीर सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत, चकबंदी लेखपाल, पूर्व डीजीसी (राजस्व) जय भारद्वाज, पूर्व कानूनगो राजवीर सिंह तथा रिटायर्ड चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया है. इन सभी पर 1000 बीधा सरकारी जमीन का धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. मेडिकल परीक्षण के बाद सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

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