ETV Bharat / state

17 लाख गिरफ्तारी, 11 लाख केस.. बिहार में शराबबंदी के 10 साल के आंकड़े कर देंगे हैरान

पटना में मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का रिपोर्ट कार्ड पेश किया. पढ़ें खबर-

BIHAR SHARABBANDI
मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग की प्रेस कॉन्फ्रेंस (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : April 27, 2026 at 6:27 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

पटना: बिहार में शराबबंदी के दस साल पूरे हो चुके हैं. सरकार इसे अपनी उपलब्धि मान रही है. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वकांक्षी योजना को आगे बढ़ाते राजधानी पटना में मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का रिपोर्ट कार्ड पेश किया. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 से 31 मार्च 2026 तक राज्य में शराबबंदी कानून के तहत कुल 11,37,731 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से 5,60,639 मामले मद्यनिषेध विभाग और 5,77,092 मामले पुलिस द्वारा दर्ज किए गए. इस दौरान कुल 17,18,058 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो सरकार की सख्त कार्रवाई को दर्शाता है.

शराबबंदी पर सरकार बरत रही सख्ती: इस दौरान मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग के मंत्री सह उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि शराबबंदी को लेकर सरकार सख्ती बरत रही है. राज्यभर में 84 चेकपोस्ट बनाए गए है. ड्रोन, स्निफर डॉग और स्कैनर से निगरानी की जा रही है.

जानकारी देते सचिव अजय यादव (ETV Bharat)

तीन मोर्चों पर हुआ बड़ा सुधार: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2016 से मार्च 2026 तक 4 करोड़ 83 लाख लीटर से ज्यादा शराब जब्त की गई. इसके साथ ही सरकार नीरा संवर्धन योजना के जरिए ताड़ी के विकल्प के तौर पर नीरा उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. ताकि रोजगार भी बढ़े और शराबबंदी को मजबूती मिले.

"शराबबंदी को लेकर राजस्व, तकनीक और सख्ती इन तीनों मोर्चों पर बड़ा सुधार किया गया है. हमने अगले साल के लिए 10,000 करोड़ के राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा है."- अजय यादव, सचिव, मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग

2025-26 में 8403 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह: उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में निबंधन विभाग ने 8403 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया है. जो तय लक्ष्य 8250 करोड़ के मुकाबले 101.86 प्रतिशत है. उनके मुताबिक पिछले साल की तुलना में करीब 9.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अब सरकार ने 2026-27 के लिए 10,000 करोड़ का लक्ष्य तय किया है.

तकनीकी सुधारों से मिली सफलता: सरकार का दावा है कि ये सफलता डिजिटाइजेशन और तकनीकी सुधारों की वजह से संभव हुई है. बताया गया कि 1995 से 2026 तक के 2.34 करोड़ दस्तावेज डिजिटल किए जा चुके हैं, जबकि पुराने रिकॉर्ड भी तेजी से ऑनलाइन किए जा रहे हैं.

निबंधन प्रक्रिया को बनाया गया आसान: बिहार सरकार के मुताबिक निबंधन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अब पेपरलेस सिस्टम, ऑनलाइन भुगतान और दस्तावेजों की रियल टाइम ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शुरू की गई है. वहीं आम लोगों के लिए हेल्प डेस्क, वातानुकूलित प्रतीक्षालय और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं भी दी जा रही हैं.

इसे भी पढ़ें- 'जबतक नीतीश कुमार हैं, बिहार में शराबबंदी कायम रहेगी' RLM विधायक को JDU का जवाब

इसे भी पढ़ें- Explainer: बिहार में शराबबंदी के 10 साल.. ये आंकड़े कर देंगे हैरान! जानें कितना फायदा, कितना नुकसान?