डीफलंपिक्स 2025: क्या आप इस 'साइलेंट ओलंपिक्स' के बारे में जानते हैं?
Deaflympics 2025: टोक्यो में आयोजित 25वां समर डीफलंपिक्स 26 नवंबर तक जारी रहेगा.

Published : November 17, 2025 at 5:27 PM IST
Deaflympics 2025: जब हम ओलंपिक के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में कई तरह की प्रतियोगिताएं आती हैं. इसके बाद, हम सभी जानते हैं कि पैरालंपिक्स भी दिव्यांगों के लिए आयोजित किए जाते हैं. लेकिन, कितने लोग जानते हैं कि इनके समानांतर, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा मान्यता प्राप्त एक और मेगा स्पोर्ट्स इवेंट पिछले 100 सालों से आयोजित हो रहा है? वह है 'डीफलंपिक्स'.
पैरालंपिक्स के बारे में जितने लोग जानते हैं, उतने ही कम लोग इस 'डीफलंपिक्स' के बारे में जानते हैं. इन खेलों में साउंड (आवाज) की कोई जगह नहीं है. रेस शुरू करने के लिए सीटियां नहीं बजाई जातीं और न ही बंदूकें चलाई जातीं है, फिर भी प्रतियोगिताएं जोश से भरी होती हैं. तो आइए जानते हैं कि ये 'साइलेंट ओलंपिक्स' क्या है?
पैरालंपिक्स और डीफलंपिक्स में अंतर
बहुत से लोग सोचते हैं कि पैरालिंपिक और डीफलंपिक एक ही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. पैरालिंपिक विभिन्न प्रकार की शारीरिक अक्षमताओं वाले एथलीटों के लिए होते हैं, जबकि डीफलंपिक केवल उन लोगों के लिए होते है जो बहरे हैं या कम सुनते हैं. इसे विकलांगता के बजाय एक सांस्कृतिक समूह के रूप में देखा जाता है. इसमें वो व्यक्ति भाग ले सकता है जो कम से कम 55 डेसिबल (dB) सुनने की क्षमता खो चुका हो. सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि प्रतियोगिताओं के दौरान किसी भी तरह के सुनने की मशीन के यूज की अनुमति नहीं है. सभी को एक ही स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी, केवल अपनी दृष्टि का उपयोग करना होगा.
🎉The 25th Summer #Deaflympics Tokyo 2025 marks Japan’s 1st time hosting & 100 years since Paris 1924! Let’s celebrate inclusion!✨
— Tokyo Gov (@Tokyo_gov) November 14, 2025
🗓️The Games will be held from November 15 to 26 across Tokyo—with events also taking place in Fukushima (Football) and Shizuoka (Cycling Road)!🚴⚽ pic.twitter.com/9TVCFCA5WZ
सभी नियम 'मौन' हैं, सीटी की जगह झंडे!
चूंकि इन खेलों में कोई साउंड नहीं होता, इसलिए सभी नियम दृश्य हैं. 100 मीटर की दौड़ शुरू करने के लिए कोई बंदूक नहीं चलाई जाती है, बल्कि चमकती रोशनी का उपयोग किया जाता है. जैसे ही रोशनी आती है, एथलीटों को दौड़ना होता है. फुटबॉल मैच में, रेफरी सीटी नहीं बजाता, बल्कि झंडा लहराता है. तैराकी में भी लाइट या टार्च का उपयोग किया जाता है.
100 साल का इतिहास
ये 'साइलेंट गेम्स' पैरालिंपिक से भी बहुत पुराने हैं. इनका इतिहास 1924 में पेरिस में शुरू हुआ था. उस समय इसे 'अंतर्राष्ट्रीय साइलेंट गेम्स' कहा जाता था. यह दिव्यांगों के लिए पहला वैश्विक खेल आयोजन है. अब, 15 से 26 नवंबर तक, 25वें समर डीफलिंपिक जापान के टोक्यो में आयोजित किए जा रहे हैं. यह बेहद खास है क्योंकि यह इन खेलों की 100वीं वर्षगांठ (शताब्दी) है. यह पहली बार भी है जब जापान इन खेलों की मेजबानी कर रहा है.
Team India lights up the opening ceremony of the 25th Summer Deaflympics Tokyo 2025, taking place from 15th to 26th November 2025!
— Nabibhai Sayyad (@NabibhaiSayyad) November 15, 2025
Wishing all the athletes the very best. Let’s go for those Gold Medals! Proud of you all! 🇮🇳🏅 pic.twitter.com/OPfQODuz8o
टोक्यो डीफलंपिक्स 2025, 3000 एथलीट!
टोक्यो में चल रहे 25वें डेफलिंपिक में 80 से ज्यादा देशों के लगभग 3,000 एथलीट भाग ले रहे हैं. वे एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, फ़ुटबॉल, तैराकी और निशानेबाजी जैसे कुल 21 खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. इन खेलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, इन्हें टोक्यो डीफलंपिक्स 2025 की आधिकारिक वेबसाइट के YouTube चैनल पर लाइव स्ट्रीम भी किया जा रहा है.
हमारे देश का एक बड़ा दल भी इन प्रतियोगिताओं में भाग ले रहा है. जिनमें तीन कोचों सहित 15 सदस्यीय दल शामिल हैं. ओलंपिक सिर्फ समर गेम्स और पैरालंपिक्स ही नहीं हैं, बल्कि ये 'डीफलंपिक्स' भी उनका एक हिस्सा हैं. सुनने की छमता से महरूम ये एथलीट अपनी प्रतिभा और लगन से जो सफलताएं हासिल कर रहे हैं, वे कई लोगों के लिए प्रेरणादायक हैं.

