भारत के हॉकी प्लयेर का हुआ निधन, ओलंपिक में जीत चुका था गोल्ड मेडल
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर और ओलंपिक मेडलिस्ट मैनुअल फ्रेडरिक का शुक्रवार सुबह निधन हो गया. उन्होने भारत के लिए गोल्ड मेजल जीता था.

Published : October 31, 2025 at 4:44 PM IST
कन्नूर: भारतीय हॉकी गोलकीपर और ओलंपिक मेडलिस्ट मैनुअल फ्रेडरिक का शुक्रवार सुबह बेंगलुरु के हेब्बल एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 78 साल की उम्र में निधन हो गया. मैनुअल फ्रेडरिक उस भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे जिसने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था.
भारतीय हॉकी के एक दिग्गज खिलाड़ी उन्होंने दो वर्ल्ड कप में भी देश का प्रतिनिधित्व किया और सात साल तक नेशनल टीम का हिस्सा रहे. भारतीय खेलों में उनके योगदान को देखते हुए, उन्हें 2019 में प्रतिष्ठित ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
कन्नूर से था खिलाड़ी का ताल्लुक
20 अक्टूबर 1947 को कन्नूर के बरनासेरी में जन्मे मैनुअल फ्रेडरिक, जोसेफ बोवर और सारा के बेटे थे, जो दोनों कॉमनवेल्थ ट्रस्ट टाइल फैक्ट्री में काम करते थे. खेलों में उनका सफर कन्नूर के बीएमपीयूपी स्कूल में अपने स्कूल के दिनों में फुटबॉल से शुरू हुआ, लेकिन 12 साल की उम्र तक उन्होंने हॉकी खेलना शुरू कर दिया था. यह एक ऐसा फैसला था जिसने उनकी जिंदगी और करियर को आकार दिया.
Hockey India mourns the loss of Olympian Manuel Frederick. The former goalkeeper was a member of India’s Munich 1972 Olympic bronze medal-winning team.#HockeyIndia #IndiaKaGame pic.twitter.com/cM7CoKfV1r
— Hockey India (@TheHockeyIndia) October 31, 2025
सिर्फ 15 साल की उम्र में फ्रेडरिक भारतीय सेना में शामिल हो गए, जहां सर्विसेज कैंप में कड़ी ट्रेनिंग से उनकी प्रतिभा और निखरी. उन्होंने 1971 में एक गोलकीपर के तौर पर इंटरनेशनल डेब्यू किया और जल्द ही भारत के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक बन गए. म्यूनिख ओलंपिक में उनके शानदार प्रदर्शन ने भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
फ्रेडरिक का शानदार करियर
फ्रेडरिक के नाम टाईब्रेकर में 16 नेशनल चैंपियनशिप जीतने वाले एकमात्र गोलकीपर होने का गौरव हासिल है. उन्होंने 1973 में हॉलैंड में हुए वर्ल्ड कप और 1978 में अर्जेंटीना में हुए वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और दबाव में भी शांत रहने और तेज रिफ्लेक्स के लिए अपनी पहचान बनाई.
अपनी उपलब्धियों के बावजूद खेल जगत में कई लोगों ने लंबे समय से इस बात पर दुख जताया है कि फ्रेडरिक को वह पहचान नहीं मिली जिसके वे सच में हकदार थे. 1972 की ओलंपिक टीम के कई सदस्यों को अर्जुन पुरस्कार और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, लेकिन फ्रेडरिक को नजरअंदाज़ कर दिया गया.
फ्रेडरिक का निजी जीवन
फ्रेडरिक की शादी शीतला (दिवंगत) से हुई थी. उनके परिवार में उनकी बेटियां फ्रेशिना प्रवीण, जो बेंगलुरु में रहती हैं, और फेनिला, जो मुंबई में रहती हैं, और उनके दामाद प्रवीण और टिनू थॉमस हैं.
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