हरियाणवी छोरे का कमाल, बॉक्सर निशांत देव ने अफ्रीका में फहराया तिरंगा, गर्व से चौड़ा हुआ पिता का सीना
हरियाणा के स्टार बॉक्सर निशांत देव ने बॉक्सिंग में देश को ऐतिहासिक जीत दिलाई है जिसके बाद करनाल में जश्न का माहौल है.


Published : December 25, 2025 at 5:41 PM IST
करनाल: हरियाणा के करनाल के लाल निशांत देव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सपने अगर बड़े हों और इरादे फौलादी, तो दुनिया की कोई भी रिंग छोटी पड़ जाती है. 20 दिसंबर 2025 को घाना की राजधानी अक्रा में आयोजित मैच रूम बॉक्सिंग के प्रतिष्ठित प्रमोशनल इवेंट में निशांत ने अपने प्रतिद्वंद्वी को नॉकआउट कर भारत का तिरंगा गर्व से लहरा दिया.
अफ्रीका की रिंग में भारत का स्टार बॉक्सर: तंजानिया के प्रोफेशनल बॉक्सर अलाय म्बुकवा के खिलाफ उतरे निशांत देव ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बना ली. तेज़ फुटवर्क, सटीक पंच और बेहतरीन रणनीति के दम पर चौथे राउंड में ऐसा निर्णायक पंच लगाया कि मुकाबला वहीं समाप्त हो गया.
प्रोफेशनल रिकॉर्ड में सुनहरा अध्याय: इस धमाकेदार जीत के साथ निशांत देव का प्रोफेशनल रिकॉर्ड 5–0 हो गया है. जिसमें 3 नॉकआउट शामिल हैं. लगातार जीत और बढ़ती आक्रामकता यह संकेत दे रही है कि निशांत आने वाले वर्षों में विश्व बॉक्सिंग के बड़े नामों में शुमार होने जा रहे हैं. यह जीत करनाल या हरियाणा तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए एक संदेश बन गई है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती. छोटे शहरों से भी विश्व विजेता निकलते हैं. भारतीय बॉक्सिंग अब ग्लोबल मंच पर मजबूती से खड़ी है.

करनाल स्टेडियम में जश्न और जज़्बात: अफ्रीका से फाइट जीतकर लौटे निशांत देव सीधे अपने करनाल स्टेडियम पहुंचे जहां उन्होंने बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाया. उन्होंने कहा कि "जिस मिट्टी से बॉक्सिंग की शुरुआत की, उसी जगह बच्चों के साथ खुशियां बांटना उनके लिए सबसे बड़ी जीत है. निशांत ने बताया कि प्रोफेशनल बॉक्सिंग में उनका “5-जीरो” रिकॉर्ड बन चुका है और अब 12 राउंड वाली उस प्रोफेशनल बॉक्सिंग का सफर शुरू हो गया है. जहां कभी मोहम्मद अली जैसे दिग्गजों ने इतिहास रचा था".

वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक मेडल है लक्ष्य: निशांत देव का सपना साफ है आने वाले दो वर्षों में वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइट खेलना और भारत का पहला प्रोफेशनल वर्ल्ड चैंपियन बनना. साथ ही ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करना. निशांत ने अपने सफर के बारे में बताते हुए कहा कि "रास्ता आसान नहीं था. कई इंजरी आईं, कठिन दौर आए, लेकिन परिवार हमेशा चट्टान की तरह साथ खड़ा रहा. उन्होंने खास तौर पर अपने पिता के योगदान को याद किया. सुबह 4 बजे उठकर स्टेडियम ले जाना, स्कूल और ट्रेनिंग के बीच संतुलन बनाना और हर कदम पर हौसला देना".

पिता का गर्व, बेटे पर विश्वास : निशांत के पिता पवन देव ने बताया कि "बेटे ने 10 साल की उम्र में इसी करनाल स्टेडियम से बॉक्सिंग शुरू की थी. आज वही बच्चा वर्ल्ड लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है". उन्होंने बताया कि "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की हाईएस्ट रैंकिंग तक निशांत पहुंच चुका है और वर्ल्ड चैंपियन बनने का सफर अब शुरू हो गया है".
नई पीढ़ी के लिए संदेश: पवन देव ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि "बच्चों की रुचि को पहचानें, उनका साथ दें और सपनों को उड़ान भरने दें. करनाल स्टेडियम में लड़कियों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि निशांत का संघर्ष आने वाली पीढ़ी को दिशा दे रहा है".
बहरहाल निशांत देव की अफ्रीका में मिली यह जीत सिर्फ एक नॉकआउट नहीं, बल्कि उम्मीद, अनुशासन और अथक परिश्रम की जीत है. करनाल से निकलकर विश्व पटल तक पहुंचने का यह सफर हर भारतीय युवा को यह विश्वास दिलाता है कि अगर जज्बा हो, तो इतिहास रचा जा सकता है.
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