दिव्यांग होने पर पिता ने छोड़ा था साथ, फरीदाबाद के लक्ष्य ने दुबई पैरा यूथ एशियन चैंपियनशिप में जीता ब्रॉन्ज, 2028 पैरा ओलंपिक गोल्ड का है सपना
फरीदाबाद के लक्ष्य गुप्ता ने दुबई पैरा यूथ एशियन गेम्स में टेबल टेनिस अंडर-17 ब्रॉन्ज जीतकर देश का नाम रोशन किया है.

Published : December 20, 2025 at 4:29 PM IST
फरीदाबाद: फरीदाबाद के 17 वर्षीय लक्ष्य गुप्ता ने दुबई में आयोजित पैरा यूथ एशियन गेम्स 2025 में टेबल टेनिस के पैरा यूथ अंडर-17 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया. लक्ष्य की इस उपलब्धि से न सिर्फ उसका परिवार बल्कि पूरा देश गर्वित है. उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं.
तीन साल पहले शुरू किया था खेलना:ईटीवी भारत ने लक्ष्य की इस उपलब्धि के बाद उससे और उसकी मां से बातचीत की. लक्ष्य गुप्ता ने ईटीवी भारत से बताया कि, "मैं ठीक से बोल नहीं सकता, लेकिन मैंने तीन साल पहले प्रोफेशनल तरीके से टेबल टेनिस खेलना शुरू किया और आज मैं इस मुकाम पर हूं. मुझे बहुत खुशी हो रही है. मेरा सपना है कि 2028 में होने वाले पैरा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाऊं. इसके लिए मैं लगातार मेहनत कर रहा हूं."

दिव्यांग होने के कारण पिता ने छोड़ा साथ:वहीं, लक्ष्य की मां निशा गुप्ता ने बताया कि, "लक्ष्य की इस उपलब्धि से मैं बेहद खुश हूं. मेरा सपना है कि वह विदेश में जाकर देश का नाम रोशन करे. लक्ष्य जब पैदा हुआ, उस दौरान एक साल के बाद हमें पता लगा कि लक्ष्य दिव्यांग है. इसी वजह से लक्ष्य के पिता ने मुझे और लक्ष्य को छोड़ दिया. मुझे बहुत बड़ा झटका लगा. मैं लक्ष्य को लेकर अपने मायके उत्तर प्रदेश चली गई, लेकिन कुछ दिन बाद फिर फरीदाबाद आ गई और यहीं रहने लगी. नौकरी के साथ-साथ लक्ष्य की परवरिश पर भी मैंने ध्यान देना शुरू कर दिया. जब स्कूल में एडमिशन का समय आया, तो लक्ष्य को किसी भी स्कूल में एडमिशन नहीं मिल रहा था. स्कूल वाले कह रहे थे कि यह बच्चा दूसरे बच्चों के साथ बैठने के लायक नहीं है, जिसके बाद मैंने स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की. इसके बाद जिस स्कूल में मैं पढ़ा रही थी, उसी स्कूल में मैंने लक्ष्य का एडमिशन करवाया. फिर भी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लक्ष्य की पढ़ाई जारी रही."
किसी ने गिफ्ट किया टेबल टेनिस: निशा गुप्ता ने आगे बताया कि, "जब लक्ष्य का 10वां बर्थडे था, तब किसी ने उसे टेबल टेनिस गिफ्ट किया, जिसके बाद उसकी दोस्ती टेबल टेनिस से हो गई. इसके बाद लॉकडाउन के समय से लक्ष्य ने पूरा फोकस अपने गेम पर लगाया और कई मेडल जीते. मेरी कम सैलरी थी, उसमें लक्ष्य को ट्रेनिंग दिलवाना मेरे बजट से बाहर था, जिसके बाद कुछ संस्थाओं ने मिलकर मेरा सपोर्ट किया और आज भी वे लोग हमसे जुड़े हुए हैं. उन्हीं के सपोर्ट की वजह से लक्ष्य आज यह मेडल लेकर आया है."

लक्ष्य की खेल उपलब्धियां: लक्ष्य की मां ने बताया कि, "लक्ष्य ने पहले भी कई मेडल जीते हैं. साल 2021 और 2023 में हुए पैरा नेशनल चैंपियनशिप में उसने टेबल टेनिस में गोल्ड मेडल जीता. साल 2023 में दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स गेम्स में उसने कांस्य पदक हासिल किया. दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2023 में बुखार के बावजूद उसने कांस्य पदक जीता. इसके अलावा उसने स्टेट और नेशनल स्तर पर भी कई मेडल अपने नाम किए हैं. 15 साल की उम्र में उसने अंडर-23 पैरा श्रेणी में एशिया में पहला स्थान हासिल कर एक रिकॉर्ड बनाया."

लक्ष्य की मां की सरकार से अपील: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान लक्ष्य की मां निशा गुप्ता ने सरकार से अपील की कि जो प्राइज मनी और सुविधाएं नीति के अनुसार लक्ष्य को मिलनी चाहिए, वह जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि वह और बेहतर प्रदर्शन कर सके. निशा ने बताया कि, "तीन साल बीत गए हैं, लेकिन अभी तक HTET या अन्य प्राइज मनी उन्हें नहीं मिली है. सरकार की सहायता से लक्ष्य अपनी खेल यात्रा को और ऊंचाई तक ले जा सकेगा."
संस्थाओं का मिला सपोर्ट: लक्ष्य को फरीदाबाद स्थित मानव रचना संस्थान और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्हें वित्तीय और नैतिक समर्थन M3M फाउंडेशन, आईएएस विक्रम सिंह (पूर्व डीसी फरीदाबाद) और अग्रवाल वैश्य परिवार जैसी संस्थाओं से मिला. अग्रवाल वैश्य परिवार के प्रधान राकेश गर्ग ने ईटीवी भारत को बताया कि, "लक्ष्य बड़ा ही होनहार बच्चा है. वह लगातार देश का नाम रोशन कर रहा है. उसकी मां ने साबित कर दिया कि एक मां अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर सकती है. हमारी संस्था हमेशा लक्ष्य को फाइनेंशियल सपोर्ट देती रहेगी."

लक्ष्य का लक्ष्य: लक्ष्य खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी होशियार है. वह बीए फर्स्ट ईयर का छात्र है. लक्ष्य का अगला लक्ष्य साल 2028 में होने वाले पैरा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड जीतना है. लक्ष्य ने अपनी मेहनत और समर्पण के दम पर साबित किया है कि कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य को पाने की इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण है.
लक्ष्य की उपलब्धि के बाद फरीदाबाद और हरियाणा ही नहीं बल्कि देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं. साथ ही शुभकामनाएं देने वालों का उनके घर आना-जाना लगा हुआ है. लक्ष्य का यह प्रदर्शन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है. लक्ष्य की कहानी न केवल उनके खेल कौशल का परिचय देती है, बल्कि उनके जीवन संघर्ष और मातृत्व की शक्ति को भी दर्शाती है. अब लक्ष्य का पूरा फोकस 2028 पैरा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने और देश का गौरव बढ़ाने पर है.

