ETV Bharat / sports

रणजी ट्रॉफी में धूम मचाकर घर पहुंचे मयंक मिश्रा, सबसे ज्यादा 59 विकेट लिए, अब बैटिंग पर भी फोकस

रणजी ट्रॉफी के बॉलिंग बॉस मयंक मिश्रा का घर पहुंचने पर हुआ शानदार स्वागत, सीएयू और महिम वर्मा को दिया सफलता का श्रेय

Mayank Mishra interview
रणजी का हीरो बॉलर (Photo courtesy: Mayank Mishra)
author img

By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 24, 2026 at 2:46 PM IST

9 Min Read
Choose ETV Bharat

रुद्रपुर (उत्तराखंड): रणजी ट्रॉफी सीजन 2025-26 का फाइनल मुकाबला आज से कर्नाटक के हुबली स्थित डीआर बेंद्रे क्रिकेट स्टेडियम में शुरू हो चुका है. फाइनल में उत्तराखंड की टीम नहीं है, क्योंकि उन्हें हराने वाली कर्नाटक की टीम जम्मू और कश्मीर की टीम के साथ खेल रही है. लेकिन इस रणजी सीजन सबसे ज्यादा जिस खिलाड़ी की चर्चा हुई, वो हैं उत्तराखंड के लेफ्ट-आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनर मयंक मिश्रा. मयंक ने इस सीजन ने सिर्फ 8 मैचों में 59 विकेट हासिल किए.

घर लौटा रणजी ट्रॉफी का चैंपियन बॉलर: मयंक मिश्रा ने इस सीजन रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा विकेट लेकर उत्तराखंड की टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचाया तो वहीं नेशनल सेलेक्टरों को भी अपनी फिरकी से जादू में बांध दिया है. क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड यानी सीएयू के पदाधिकारी भी मयंक के प्रदर्शन से बहुत खुश हैं. रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन कर घर लौटे मयंक मिश्रा से ईटीवी भारत ने खास बातचीत की.

मयंक मिश्रा का इंटरव्यू (Video- ETV Bharat)

मयंक मिश्रा ने इस सीजन में सबसे ज्यादा 59 विकेट लिए हैं: उत्तराखंड के मयंक मिश्रा इस समय भारतीय क्रिकेट जगत में सनसनी बने हुए हैं. इस रणजी सीजन मयंक ने 17.69 की औसत, 2.77 की इकोनॉमी और 38.23 की स्ट्राइक रेट से 8 मैचों में 59 विकेट चटकाए. मयंक ने 4 बार एक पारी में 5 विकेट लिए तो 5 बार एक पारी में 4 विकेट लेने का कारनामा भी किया. 84 रन देकर 6 विकेट उनका बेस्ट परफॉर्मेंस रहा.

Mayank Mishra interview
रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा विकेट लेने के बाद घर लौटे मयंक मिश्रा का स्वागत (Photo courtesy: Mayank Mishra)

रुद्रपुर लौटने पर मयंक मिश्रा का जोरदार स्वागत: रणजी सीजन के बाद अपने गृह क्षेत्र रुद्रपुर लौटने पर मयंक मिश्रा का भव्य स्वागत किया गया. शहरवासियों ने फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ अपने इस हीरो का अभिनंदन किया. यह स्वागत केवल एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि उसके संघर्ष और समर्पण का सम्मान था, जो एक शानदार रणजी सीजन का समापन करके लौटा है.

Mayank Mishra interview
मयंक मिश्रा को रुद्रपुर में सम्मानित किया गया (Photo courtesy: Mayank Mishra)

मयंक की सिंगर से क्रिकेटर बनने की कहानी: 9 अक्टूबर 1990 को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर, रुद्रपुर में जन्मे मयंक मिश्रा का क्रिकेट का सफर आसान नहीं रहा. उनके पिता ट्रैवल व्यवसाय से जुड़े हैं. एक समय ऐसा था जब मयंक क्रिकेट के साथ-साथ गायकी में भी अपना करियर तलाश रहे थे. वर्ष 2012 तक वे प्रोफेशनल सिंगिंग में सक्रिय रहे. उन्होंने कई टैलेंट शो और ऑडिशन दिए, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली. दूसरी ओर क्रिकेट में उनके प्रदर्शन की सराहना होने लगी. यहीं से उन्होंने ठान लिया कि अब पूरा ध्यान क्रिकेट पर ही देंगे.

Mayank Mishra interview
मयंक मिश्रा ने इस रणजी सीजन सबसे ज्यादा 59 विकेट लिए हैं (Photo courtesy: Mayank Mishra)

गायकी छोड़ी, क्रिकेट किट पहनी, 20 किलो घटाया वजन: गायकी के दौरान उनका वजन 94 किलो तक पहुंच गया था. पिता के लगातार प्रोत्साहन पर उन्होंने मेहनत शुरू की. सख्त ट्रेनिंग और डाइट प्लान के जरिए मात्र दो महीनों में उन्होंने 20 किलो वजन घटाकर खुद को पूरी तरह फिट कर लिया. आज 35 वर्ष की उम्र में भी उनकी फिटनेस युवाओं के लिए प्रेरणा है. उनका कहना है कि फिट रहने से वे लंबे स्पेल डाल पाते हैं और ज्यादा विकेट लेने के अवसर बना पाते हैं.

Mayank Mishra interview
मयंक ने उत्तराखंड की टीम को रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंचने में मदद की (Photo courtesy: Mayank Mishra)

झारखंड से निराश लौटे, उत्तराखंड से सच हुए सपने: 2014 में जब उत्तराखंड को बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिली थी, तब घरेलू क्रिकेट के दरवाजे बंद थे. ऐसे में उन्होंने झारखंड के जामताड़ा जिले से क्रिकेट खेलना शुरू किया, लेकिन वहां उन्हें अपेक्षित अवसर नहीं मिले. निराश होकर वे वापस लौटे और नैनीताल के एक निजी स्कूल में क्रिकेट कोच बन गए. साल 2018-19 जब उत्तराखंड को बीसीसीआई की मान्यता मिली तो उत्तराखंड की क्रिकेट टीम घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए योग्य हो गई. ऐसे में मौके की तलाश में बैठे मयंक मिश्रा ने उत्तराखंड की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया. यहीं से उनके उत्तराखंड के लिए विजय हजारे ट्रॉफी वनडे और सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी में राज्य का प्रतिनिधित्व करने का सिलसिला शुरू हुआ जो रणजी ट्रॉफी तक पहुंचा और आज भी जारी है.

Mayank Mishra interview
मयंक मिश्रा न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी और रविंद्र जडेजा को अपनी प्रेरणा मानते हैं (Photo courtesy: Mayank Mishra)

न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी हैं मयंक मिश्रा की प्रेरणा: ईटीवी भारत के खास बातचीत करते हुए मयंक मिश्रा ने बताया कि उन्होंने 14 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था. तब हम उम्र लड़कों के साथ क्रिकेट पसंद होने के कारण खेलते थे. टीवी पर मैच देखते-देखते उन्हें जिस खिलाड़ी ने प्रभावित किया वो न्यूजीलैंड के कप्तान रहे बॉलिंग ऑलराउंडर डेनियल विटोरी थे. मयंक ने बताया कि डेनियल विटोरी उनके प्रेरणा स्रोत बन गए और वो विटोरी की तरह खिलाड़ी बनने की सोचने लगे.

Mayank Mishra interview
मयंक की जंप उनकी गेंदबाजी को बहुत अच्छा रिद्म देती है (Photo courtesy: Mayank Mishra)

इसलिए बल्लेबाज नहीं बॉलर बने मयंक: जब मयंक मिश्रा से पूछा गया कि बल्लेबाजों के लिए प्रसिद्ध भारत में उन्होंने गेंदबाज बनने की क्यों सोची. मयंक ने ईमानदारी भरा जवाब देते हुए कहा कि मैं अच्छी बैटिंग नहीं कर पाता था. बल्लेबाजी के समय जल्दी आउट हो जाता. इसके बाद बैठकर साथी खिलाड़ियों के लिए ताली बजानी पड़ती थी. इसलिए मैंने गेंदबाज बनने की ठान ली.

Mayank Mishra interview
मयंक मिश्रा की गेंदबाजी इस रणजी सीजन बल्लेबाजों के लिए रहस्य बनी रही (Photo courtesy: Mayank Mishra)

कोच दीपक महरा ने दिखाया रास्ता: मयंक मिश्रा से जब पूछा गया कि उन्हें कब लगा कि वो क्रिकेट को करियर के रूप में चुन सकते हैं. इस पर उन्होंने कहा कि जब मैं 16 साल का था, तो मुझे लगा कि मैं क्रिकेट को फुल टाइम करियर के रूप में चुन सकता हूं. मेरे पहले कोच जो अभी भी मेरे मेंटर हैं सीएयू के अध्यक्ष दीपक महरा ने मुझे खूब प्रोत्साहित किया. उन्होंने मेरे बेसिक्स पर काफी मेहनत की. मुझे घंटों नेट पर बॉलिंग प्रैक्टिस करवाई.

Mayank Mishra interview
ऑफ सीजन में भी मयंक मिश्रा कई घंटे अभ्यास करते हैं (Photo courtesy: Mayank Mishra)

विराट कोहली और रविंद्र जडेजा हैं पसंद: मयंक मिश्रा ने बताया कि भारतीय खिलाड़ियों में उन्हें ऑलराउंड क्षमता के कारण रविंद्र जडेजा काफी पसंद हैं. जडेजा ने उन्हें खिलाड़ी बनने की ओर प्रेरित किया. डेनियर विटोरी अगर उनके मनसपंद विदेशी खिलाड़ी हैं तो जडेजा उनकी प्रेरणा हैं. अगर पूरे क्रिकेट वर्ल्ड की बात करें तो विराट कोहली उनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं. विराट कोहली का अच्छा प्रदर्शन करने के लिए जुनून, जीत की भूख और फिटनेस लेवल मयंक को अद्भुत लगता है.

Mayank Mishra interview
मयंक फिटनेस पर भी खूब ध्यान देते हैं (Photo courtesy: Mayank Mishra)

रणजी ट्रॉफी के लीग मैच भी 5 दिवसीय होने चाहिए: इस रणजी ट्रॉफी सीजन के अब तक हाईएस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाज मयंक मिश्रा चाहते हैं कि रणजी ट्रॉफी में लीग मैच भी 5 दिवसीय हों. वो कहते हैं कि इससे लगभग हर मैच का रिजल्ट निश्चित रूप से आएगा. इसके साथ ही वो रणजी ट्रॉफी समेत घरेलू क्रिकेट के ज्यादा से ज्यादा मैचों का लाइव टेलीकास्ट चाहते हैं.

Mayank Mishra interview
मयंक मिश्रा ऐसे गेंदबाज हैं जो बल्लेबाज पर चढ़कर गेंदबाजी करना पसंद करते हैं (Photo courtesy: Mayank Mishra)

टीटी और फुटबॉल हैं पसंद: मयंक ने बताया कि उन्हें क्रिकेट के साथ ही टेबल टेनिस और फुटबॉल खेलना भी पसंद है. वो टीवी पर भी इन दोनों गेम्स को देखते हैं. जब फुटबॉल वर्ल्ड कप होता है, तो उसके मैच लाइव देखने की कोशिश करते हैं. अगर क्रिकेट सीजन के कारण व्यस्त रहे तो उनकी हाईलाइट देखते हैं.

Mayank Mishra interview
उत्तराखंड की रणजी ट्रॉफी टीम की किट में मयंक मिश्रा (Photo courtesy: Mayank Mishra)

ऑफ सीजन में भी करते हैं कड़ा अभ्यास: उत्तराखंड के इस चैंपियन स्पिनर ने बताया कि क्रिकेट सीजन के दौरान वो टीम मैनेजमेंट जैसा अभ्यास शेड्यूल तय करता है, उसी के अनुसार प्रैक्टिस और फिटनेस करते हैं. ऑफ सीजन में सुबह-शाम मिलाकर रोजाना 4 से 5 घंटे अभ्यास करते हैं. इसमें सुबह के सेशन में फिजिकल फिटनेश पर मेहनत होती है. शाम को नेट पर गेंदबाजी का अभ्यास करते हैं.

बल्लेबाजी भी मजबूत करना चाहते हैं मयंक: अगले क्रिकेट सीजन में क्या नया करना चाहते हैं पूछने पर मयंक मिश्रा ने कहा कि इस बार बल्लेबाजी पर भी ध्यान देना है. मैं चाहता हूं कि बल्ले से भी टीम को रनों का योगदान दे सकूं. इसलिए सोचा है कि बॉलिंग प्रैक्टिस के साथ ही बल्लेबाजी पर भी मेहनत करूंगा.

मयंक के प्रमुख बॉलिंग हथियार: मयंक मिश्रा ऐसे गेंदबाज हैं जो बल्लेबाज पर चढ़कर गेंदबाजी करना पसंद करते हैं. उनके मुख्य हथियार सटीक लेंथ, हवा में फ्लाइट और टर्न हैं. मयंक के पास स्टॉक बॉल है तो आर्म बॉल का भी वो बेहतरीन इस्तेमाल करते हैं. उनकी टॉप स्पिन ने रणजी ट्रॉफी में अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों के होश उड़ा दिए. इसके साथ ही मयंक की फ्लाइट और डिप बल्लेबाज को फॉरवर्ड स्ट्रोक के लिए ललचाकर कई बार आउट कर चुकी हैं. स्पीड वेरिएशन और क्रीज का हर तरह से इस्तेमाल मयंक मिश्रा की गेंदबाजी को और मारक बनाते हैं.

टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की जीत का भरोसा: मनपसंद भोजन के बारे में मयंक ने बताया कि वैसे तो उन्हें हर तरह का भारतीय भोजन पसंद है, लेकिन बिरयानी उनको बहुत पसंद है. मयंक से जब पूछा गया कि इस टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के लिए उनका मैसेज क्या है. उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ी अच्छा खेल रहे हैं. पॉजिटिव रहें, फोकस्ड रहें, जीत हमारी होगी.

टीम की सफलता का श्रेय खिलाड़ियों के साथ सीएयू और महिम वर्मा को दिया: मयंक मिश्रा से जब पूछा गया कि उत्तराखंड की टीम मान्यता मिलने के बाद 8 सीजन में से 4 बार नॉक आउट में पहुंची है. इस बार तो टीम सेमीफाइनल भी खेल ली है, इसका श्रेय किसे देते हैं. इस पर मयंक मिश्रा ने कहा कि टीम की सफलता का पूरा श्रेय खिलाड़ियों के साथ ही सीएयू को जाता है. मान्यता मिलने के बाद जिस तरह से महिम वर्मा ने टीम और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया, उसके खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा और बढ़े मनोबल से उनके खेल ने टीम को इतनी बड़ी सफलताएं दिलाई हैं. मयंक ने कहा कि सीएयू खिलाड़ियों का बहुत ध्यान रखता है. समय-समय पर कैंप लगाकर नए सीजन के लिए अच्छी तैयारी करवाता है.


ये भी पढ़ें: