कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप: गोल्ड जीतकर लौटी खिलाड़ियों ने बताया कितना मुश्किल था सफर, 4 गोल्ड समेत जीते 6 मेडल
चंडीगढ़ के फेंसर्स ने सीमित सुविधाओं के बावजूद कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप में चार गोल्ड समेत छह पदक जीतकर नाम रोशन किया है.

Published : August 21, 2026 at 4:48 PM IST
चंडीगढ़: कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार ओवरऑल चैंपियन का खिताब अपने नाम किया. प्रतियोगिता में भारतीय फेंसर्स ने कुल 35 पदक जीते. इनमें पंजाब और चंडीगढ़ से जुड़े छह खिलाड़ियों ने भी अलग-अलग मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और शहर का नाम रोशन किया.
चंडीगढ़ के खाते में छह पदक: चंडीगढ़ के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में खास छाप छोड़ी. शहर के फेंसर्स ने कुल चार गोल्ड और दो ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए. खिलाड़ियों की इस उपलब्धि ने सीमित सुविधाओं के बावजूद चंडीगढ़ में फेंसिंग के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत को सामने रखा है. ईटीवी भारत ने कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियन यशकीरत, प्रियांशी और उनके कोच से बातचीत की.
यशकीरत ने पढ़ाई के साथ साधी खेल की लय: पंजाब यूनिवर्सिटी में सिविल सर्विस और लॉ की पढ़ाई कर रहीं यशकीरत ने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान यशकीरत ने बताया कि, "पढ़ाई और खेल दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है, लेकिन परिवार के सहयोग से वह दोनों के लिए समय निकाल रही हैं.पढ़ाई के साथ गेम को मैनेज करना थोड़ा मुश्किल है. परिवार की ओर से पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा जाता है, लेकिन मैं उन्हें समझाते हुए खेल को भी आगे बढ़ा रही हूं."

प्रियांशी के लिए मेहनत का नतीजा है गोल्ड: इसके अलावा पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक की पढ़ाई कर रहीं प्रियांशी ने भी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया. प्रियांशी ने ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान अपनी जीत को लेकर कहा कि, "यह पदक उनके लिए सिर्फ जीत नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही ट्रेनिंग और लगातार अभ्यास का परिणाम है. पढ़ाई के साथ रोजाना प्रैक्टिस करना उनके लिए चुनौती जरूर है, लेकिन प्रोफेसरों और परिवार का लगातार सहयोग मिल रहा है. पढ़ाई के साथ गेम को चलाना मेरे लिए बड़ा चैलेंज है, लेकिन प्रोफेसर और परिवार लगातार सपोर्ट करते हैं. इसी वजह से मैं रोजाना प्रैक्टिस कर पाती हूं और पढ़ाई में भी अच्छा करने की कोशिश करती हूं."

कोच ने बताईं सीमित सुविधाओं की चुनौतियां: वहीं, चंडीगढ़ की इन खिलाड़ियों की सफलता में कोच चरणजीत कौर की मेहनत भी अहम रही है. ईटीवी भारत से बातचीत में कोच चरणजीत कौर ने कहा कि, "सीमित सुविधाओं के बावजूद खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि है. दूसरे खिलाड़ियों को जहां बेहतर सुविधाएं और एसी कमरों में अभ्यास का मौका मिलता है. वहीं, चंडीगढ़ के खिलाड़ियों को सीमित संसाधनों में ही कठिन अभ्यास करना पड़ता है. कम सहूलियतों के बावजूद चंडीगढ़ के खिलाड़ी गोल्ड मेडल तक पहुंच रहे हैं, यह अपने आप में बड़ी बात है. हम ऐसे खिलाड़ियों से मुकाबला कर रहे हैं जिनके पास हर तरह की सुविधा है और जो एसी कमरों में प्रैक्टिस करते हैं. हमारे यहां भारी पोशाक पहनकर गेम की जाती है. यह सब हमारे बच्चों की मेहनत और अपने खेल के प्रति प्यार का नतीजा है."
प्रशासन के सहयोग से बढ़ सकता है स्तर: कोच चरणजीत कौर ने आगे कहा कि, "यदि विभाग और प्रशासन खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएं तो चंडीगढ़ के फेंसर्स को और बड़े स्तर पर पहुंचाया जा सकता है. बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं, संसाधन और नियमित सहयोग मिलने से युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा."
युवा खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा: कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप में भारतीय टीम की 35 पदकों की उपलब्धि और चंडीगढ़ के खिलाड़ियों के छह पदक युवाओं के लिए प्रेरणादायक हैं. वहीं, यशकीरत और प्रियांशी ने साबित किया कि पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है. सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ियों का प्रदर्शन चंडीगढ़ में फेंसिंग की मजबूत होती पकड़ का संकेत है.

