कभी मैदान पर मैट बिछाने के मिलते थे 200 रुपये, अब IPL में गिल्लियां उड़ाएंगे बिहार के 'डेलू'
कभी मैदान में मैट बिछाने के 200 रुपये मिलते थे. अब IPL में विरोधी टीम की गिल्लियां उड़ाएंगे. जानिए अमित कुमार की सक्सेस स्टोरी

Published : January 1, 2026 at 9:15 AM IST
रोहतास: "ऑक्शन में नाम काफी देर से आया था. ऐसा नहीं लगा था कि चयन हो जाएगा. जब नाम आया तो मोबाइल बंद कर दिया. कुछ देर बाद दोस्तों के फोन आने लगे. सभी ने चिल्लाते हुए गले लगाया और बधाई दी. IPL में सेलेक्शन हो गया था. सनराइजर्स हैदराबाद की टीम ने जगह दी."
लगा था चयन नहीं होगा..: यह कहानी गेंदबाज अमित कुमार की है. बातचीत में इनके पिता जनार्दन चंद्रवंशी कहते हैं कि जब 16 दिसंबर 2025 को IPL ऑक्शन में जाना था, उस वक्त रांची से फ्लाइट कैंसिल हो गयी थी. लगा था कि चयन नहीं होगा, क्योंकि वे ऑक्शन में शामिल नहीं हो पाए. लेकिन सनराइजर्स हैदराबाद ने 30 लाख के बेस प्राइज में अपनी टीम में शामिल कर लिया.
अब गिल्लियां उड़ाएंगे अमित: साल 2026 अमित के लिए शानदार होने वाला है. सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से विरोधी टीम की गिल्लियां (विकेट के ऊपर इस्तेमाल होने वाली छोटी सी लकड़ी) उड़ाते नजर आएंगे. अमित कुमार मूल रूप से रोहतास के करगहर के हमीरपुर गांव के रहन वाले हैं. इनके माता प्रभा देवी और पिता जनार्दन चंद्रवंशी अपने बेटे की कामयाबी से काफी खुश हैं.
किसान परिवार में जन्म: अमित का जन्म साल 2002 में एक साधारण किसान परिवार में हुआ. पिता जनार्दन चंद्रवंशी और माता प्रभा देवी ने सीमित संसाधनों के बाद भी बच्चों की परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी. चार भाइयों और दो बहनों में इस परिवार में अमित तीसरे नंबर पर हैं. बचपन से उनमें क्रिकेट के प्रति दिलचस्पी थी.

'पानी से नहीं बल्कि पसीना से नहाया' ईटीवी भारत की टीम ने अमित कुमार के परिजनों से बात की. इस बातचीत में पिता जनार्दन चंद्रवंशी कहते हैं कि 'इससे ज्यादा खुशी और क्या हो सकती है. गांव से लेकर जिला, राज्य और देश स्तर पर नाम किया. मेरे बेटे ने काफी पसीना बहाया. कहिए कि उसने पसीना से नहाया तब जाकर यह उपलब्धि हासिल की.'
2011 विश्वकप जीत पर क्रिकेटर बनने की ठानी: पिता बताते हैं कि साल 2011 में जब विश्व कप में भारत को जीत मिली तो मेरे बेटे ने क्रिकेटर बनने का सपना देखा था, लेकिन साधारण परिवार के लिए यह आसान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने साल 2013 में रांची के साईं धुरवा क्रिकेट अकादमी में प्रवेश दिलाया. अमित बड़ी तेजी से अपने आप को निखारा और एक अच्छा लेग स्पिनर गेंदबाज बन गया.

मैदान में मैट भी बिछाया: पिता जनार्दन कहते हैं कि अमित ने घर का खर्च उठाने के लिए काफी मेहनत की. जब भी जिलास्तर के क्रिकेट होता था तो उसमें वह मैट बिछाने का काम करता था. बदले में उसे 200 रुपये प्रतिदन के हिसाब से मेहनताना मिलता था. इस तरह धीरे-धीरे वह इस फिल्म में आगे बढ़ते गया.
रोने पर मिला था 5 हजार का क्रिकेट किट: अमित कुमार कम उम्र से क्रिकेट खेल रहे. पिता जनार्दन चंद्रवंशी कहते हैं कि रांची रिश्तेदार के पास रहकर उसने क्रिकेट की ट्रेनिंग ली ओर खेला भी. जब उसे रांची भेजा गया था तो काफी रोया था. उसे मनाने के लिए 5 हजार रुपये में क्रिकेट किट खरीदकर दिए थे. इसके बाद उसे खेल में मन लगने लगा और आज इस मुकाम तक पहुंचा है.
"पढ़ाई लिखाई में उतना अच्छा नहीं था, लेकिन क्रिकेट में काफी अच्छा था और उसे मन भी लगता था. तो हमलोगों ने सोचा कि क्रिकेट की ट्रेनिंग दिला दें. रांची में ट्रेनिंग ली. पहले जिला स्तर पर उसका सेलेक्शन हुआ. इसके बाद राज्यस्तर पर खेला. देश के कई राज्यों में उसने बेहतर प्रदर्शन किया." -जनार्दन चंद्रवंशी, अमित के पिता

लोग 'डेलू' क्यों बुलाते: परिवार के लोग बताते हैं कि अमित कुमार बचपन से ही दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज डेल स्टेम से प्रभावित रहे हैं. इसलिए वह गेंदबाजी में सबसे आगे निकल रहे है. गांव के लोग अभी भी अमित कुमार को 'डेलू' कहते हैं. अमित सैयद घरेलु क्रिकेट टीम झारखंड में खेलते रहे हैं.
अंडर 16-23 तक धमाल: अमित एक प्रभावी लेग स्पिनर गेंदबाज हैं. उन्होंने विभिन्न आयु वर्ग की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है. पहली बार 2017 में अंडर 16 में झारखंड टीम का हिस्सा रहे. फिर 2018 में अंडर 19 मैच खेले. 2024 में अंडर 23 टीम का हिस्सा बने. स्टेट लेवल पर देशभर में सर्वाधिक विकेट लेने वाले 7वें गेंदबाज के रूप में पहचान बनायी.
..मां का कलेजा फटता था: अमित कुमार की मां प्रभा देवी आज बेटे की कामयाबी से काफी खुश हैं, लेकिन पुराने दिनों को याद कर रोने लगती हैं. प्रभा कहती हैं कि काफी छोटा था, उस समय उसे पिता ट्रेनिंग के लिए रांची भेज दिए थे. जब भी यहां से जाता था तो पूरी रात रोते रहती थी, लेकिन आज त्याग और मेहनत के कारण मेरा बेटा कामयाब हो गया है.

"छोटे उम्र में मुझसे दूर हो गया. उस समय रोना आता था कि मेरा बेटा मुझसे दूर है, लेकिन आज खुशी हो रही है. मेरा आशीर्वाद है. खूब मेहनत करे और नाम कमाए" -प्रभा देवी, अमित की मां

गांव के लोग भी खुश: अमित की कामयाबी से सिर्फ परिवार के लोग ही नहीं बल्कि गांव के लोग भी खुश हैं. गांव के लोग माता-पिता को शुभकामनाएं देने के लिए आ रहे हैं. लोगों ने कहा कि अमित ने अपने परिवार ही नहीं बल्कि गांव, जिला, राज्य के साथ देश का नाम कर रहे हैं.
"रोहतास के इस मिट्टी के लाल ने साबित कर दिया कि गांव की मिट्टी में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा छिपी होती है. रोहतास के करगहर के बेटे की उपलब्धि से आज पूरा जिले के लोग खुद को गौरांवित महसूस कर रहे हैं." -अमर कुशवाहा, पूर्व पैक्स अध्यक्ष
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