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बिहार के दो लाल रचेंगे इतिहास! ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दिखेगा झंडू कुमार और सोमन राणा का जलवा

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में बिहार के पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार और पैरा-एथलीट सोमन राणा का ऐतिहासिक चयन हुआ है-

पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार
पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 24, 2026 at 4:25 PM IST

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नालंदा : बिहार के खेल इतिहास में एक बेहद सुनहरा और ऐतिहासिक पल आया है. नालंदा के रहने वाले पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार का चयन 2026 में होने वाले ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल के लिए किया गया है. ये खेल 23 जुलाई से 3 अगस्त 2026 तक यूनाइटेड किंगडम (स्कॉटलैंड) के ग्लासगो शहर में आयोजित किए जाएंगे.

बिहार से दो युवाओं का कॉमनवेल्थ में चयन : झंडू कुमार के साथ-साथ बिहार के गया जी जिले के रहने वाले सोमन राणा (पैरा एथलेटिक्स) भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. ये दोनों खिलाड़ी उस विशाल भारतीय पैरा-खेल दल का हिस्सा होंगे, जो राष्ट्रमंडल खेलों में तिरंगा लहराने जा रहा है. बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव संदीप कुमार ने इस शानदार उपलब्धि की जानकारी देते हुए कहा कि-''बिहार के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब राज्य के एथलीटों को इतने बड़े अंतर्राष्ट्रीय खेल महाकुंभ में हिस्सा लेने का मौका मिला है.''

हर मोर्चे को पछाड़कर ग्लासगो का टिकट कटाया : झंडू कुमार का चयन केवल उनकी निजी जीत नहीं है, बल्कि यह पूरे बिहार में पैरा-स्पोर्ट्स के बढ़ते कल्चर और विकास का एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है. आपको बता दें कि झंडू कुमार हरनौत प्रखंड के रहने वाले एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं. झंडु कुमार के पिता सब्जी विक्रेता हैं और बचपन से ही उनके पैरों में पोलियो की शिकायत रही है. इन तमाम शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों को पछाड़कर उन्होंने यह विश्वस्तरीय मुकाम हासिल किया है.

बिहार विश्व पटल पर छाया : संदीप कुमार ने बिहार के खेल इकोसिस्टम में आए इस जबरदस्त बदलाव का श्रेय रवींद्रन शंकरण के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया. उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को मिलने वाले बेहतर सपोर्ट, सुविधाओं और अवसरों के कारण ही वे आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सफलता का परचम लहरा पा रहे हैं.

चयन से पूरे बिहार में जश्न : झंडू कुमार का यह चयन पूरे बिहार में जश्न के रूप में मनाया जा रहा है. उनकी यह सफलता उन तमाम युवा और उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है, जो अभावों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को सच करने की हिम्मत रखते हैं.

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