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फुटबॉल में 30 गोल, क्रिकेट में 6 शतक.. एक खिलाड़ी का दो खेल में जलवा, जानिए नियाजउद्दीन की अनसुनी कहानी

गया के एस नियाजउद्दीन ने फुटबॉल और क्रिकेट दोनों में पहचान बनाई. ईरानी खिलाड़ी भी उनकी तकनीक के मुरीद थे.

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एस नियाजउद्दीन (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 27, 2026 at 6:45 AM IST

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गयाजी : क्रिकेट और फुटबॉल.. दुनिया के दो सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक शारीरिक क्षमता मांगने वाले खेल. आमतौर पर खिलाड़ी इनमें से किसी एक खेल में ही करियर बनाते हैं, क्योंकि दोनों में शीर्ष स्तर तक पहुंचने के लिए वर्षों की मेहनत और अलग तरह की तैयारी चाहिए. लेकिन बिहार के गया जिले के एस नियाजउद्दीन उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने एक ही दौर में फुटबॉल और क्रिकेट दोनों में अपनी प्रतिभा का ऐसा लोहा मनवाया कि देश ही नहीं, विदेशी खिलाड़ी भी उनके खेल के मुरीद हो गए.

गया की मिट्टी से निकला फुटबॉल का सितारा : गया जिले के चाकंद थाना क्षेत्र के पीर बिगहा गांव में जन्मे एस नियाजउद्दीन को खेल की प्रेरणा परिवार से मिली. उनके बड़े भाई एस सबाहुद्दीन भी बेहतरीन फुटबॉलर थे. बचपन से ही फुटबॉल के प्रति जुनून रखने वाले नियाजउद्दीन ने जल्द ही गया इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की टीम से खेलना शुरू किया और कुछ ही वर्षों में अपनी अलग पहचान बना ली.

देखें रिपोर्ट- (ETV Bharat)

हारे हुए मैच को जीत में बदल देते थे : 1990 के दशक में एस नियाजउद्दीन का नाम बिहार के सबसे खतरनाक फॉरवर्ड खिलाड़ियों में लिया जाता था. उनके साथ खेल चुके साथी खतीब अहमद बताते हैं कि मैदान पर उतरते ही मैच का रुख बदल जाता था. कई बार उन्होंने हारती हुई टीम को अपने दम पर जीत दिलाई. उनकी आक्रामक शैली और गोल करने की क्षमता विरोधी टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती थी.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के स्टार स्ट्राइकर : गया से निकलकर एस नियाजउद्दीन ने कोलकाता के प्रतिष्ठित मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब तक का सफर तय किया. वर्ष 1995 से करीब पांच वर्षों तक वह क्लब के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे. उस दौर में मोहम्मडन स्पोर्टिंग देश के सबसे बड़े फुटबॉल क्लबों में गिना जाता था और वहां जगह बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

30 गोल.. और कई यादगार जीत : फुटबॉल में एस नियाजउद्दीन का रिकॉर्ड शानदार रहा. बिहार टीम की ओर से राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने 7 गोल किए. मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के लिए 15 से अधिक गोल दागे, जबकि जिला और अन्य क्लबों के लिए 10 से अधिक गोल कर कुल 30 से ज्यादा गोल अपने नाम किए. कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें स्वर्ण पदक भी मिले.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

जब ईरान के दिग्गज खिलाड़ी ने मांगे टिप्स : एस नियाजउद्दीन की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के प्रसिद्ध फुटबॉलर जमशेद नासिरी भी उनके खेल से प्रभावित थे. नियाजउद्दीन बताते हैं कि मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के साथ खेलते समय जमशेद नासिरी ने उनके फॉरवर्ड खेलने की तकनीक की सराहना की और कई बार उनसे खेल की बारीकियां भी समझीं. उनके लिए यह पल आज भी गर्व का विषय है.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

नाइजीरियाई स्टार से मैदान में भिड़ंत : 1997 में मोहम्मडन स्पोर्टिंग और ईस्ट बंगाल के बीच खेले गए एक बड़े मुकाबले को याद करते हुए नियाजउद्दीन बताते हैं कि उनकी टीम एक गोल से पीछे थी. मैदान में उतरते ही उन्होंने शानदार गोल कर मुकाबला बराबरी पर ला दिया. गोल के बाद नाइजीरिया के चर्चित खिलाड़ी चिंपौकरी से उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई. मैच खत्म होने के बाद वही विदेशी खिलाड़ी उनके खेल की खुलकर तारीफ कर रहे थे.

झारखंड-बिहार के फुटबॉल टीम के सलेक्टर हैं नियाजुद्दीन
झारखंड-बिहार के फुटबॉल टीम के सलेक्टर हैं नियाजुद्दीन (ETV Bharat)

कुवैत की टीमों के खिलाफ भी दिखाया दम : एस नियाजउद्दीन ने मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब की ओर से कुवैत सहित कई विदेशी क्लबों के खिलाफ भी मुकाबले खेले. इन मैचों में उनके प्रदर्शन की काफी सराहना हुई और कई बार उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया. उस दौर में उन्हें भारतीय फुटबॉल का उभरता हुआ बड़ा सितारा माना जा रहा था.

टीम के साथ नियाजुद्दीन
टीम के साथ नियाजुद्दीन (ETV Bharat)

एक चोट.. जिसने बदल दी पूरी जिंदगी : जब करियर अपने शिखर पर था, तभी एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान उन्हें गंभीर चोट लगी. उस समय आधुनिक स्पोर्ट्स मेडिसिन और रिहैबिलिटेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. महीनों तक कोलकाता और दिल्ली में इलाज चला, लेकिन वह पहले जैसी फिटनेस हासिल नहीं कर सके. नियाजउद्दीन कहते हैं कि यदि आज जैसी चिकित्सा सुविधाएं उस समय होतीं तो शायद उनका करियर अलग ऊंचाइयों पर होता.

एस नियाजुद्दीन की 1990 के दशक की तस्वीर
एस नियाजुद्दीन की 1990 के दशक की तस्वीर (ETV Bharat)

फुटबॉल ही नहीं, क्रिकेट में भी थे सुपरस्टार : एस नियाजउद्दीन केवल फुटबॉल के खिलाड़ी ही नहीं थे, क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड किसी बड़े ऑलराउंडर से कम नहीं था. जिला क्रिकेट में उन्होंने छह शतक लगाए और 100 से अधिक विकेट अपने नाम किए. वह प्री रणजी स्तर तक पहुंचे और तेज गेंदबाज होने के साथ ओपनिंग बल्लेबाज की भूमिका भी निभाई.

एस नियाजउद्दीन, फुटबॉल सलेक्टर, बिहार-झारखंड टीम
एस नियाजउद्दीन, फुटबॉल सलेक्टर, बिहार-झारखंड टीम (ETV Bharat)

उनके लिए टल जाते थे क्रिकेट टूर्नामेंट : नियाजउद्दीन बताते हैं कि जब वह फुटबॉल टूर्नामेंट खेलने बाहर रहते थे, तब जिला क्रिकेट संघ उनके लौटने का इंतजार करता था. फुटबॉल मैच खत्म होते ही वह सीधे क्रिकेट मैदान में पहुंच जाते थे. दोनों खेलों में एक साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करना उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया था.

ईटीवी भारत GFX.
ईटीवी भारत GFX. (ETV Bharat)

सरकारी नौकरी के कई ऑफर ठुकराए : बेहतरीन खेल प्रदर्शन के कारण बिहार पुलिस, रेलवे, राज्य परिवहन, इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड और समाहरणालय जैसे कई विभागों ने उन्हें नौकरी का प्रस्ताव दिया. लेकिन उन्होंने खेल कोटे से मिलने वाली नौकरी स्वीकार नहीं की. पोस्ट ग्रेजुएशन और बीएड करने के बाद शिक्षक बने और बाद में आजाद चाकंद हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक के पद तक पहुंचे.

'मैदान में उतरते ही बढ़ जाता था शोर' : जिला ओलंपिक संघ के महासचिव मोती करीमी कहते हैं कि जर्सी नंबर 10 पहनकर जैसे ही एस नियाजउद्दीन मैदान में उतरते थे, दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच जाता था. उनका आक्रामक खेल, नेतृत्व क्षमता और जोश उन्हें उस दौर का सबसे चर्चित खिलाड़ी बनाता था. वह कहते हैं कि अगर नियाजउद्दीन चोटिल नहीं होते तो भारतीय फुटबॉल को एक बड़ा सितारा जरूर मिलता.

भारतीय फुटबॉल के भविष्य को लेकर चिंता : वर्तमान में बिहार झारखंड जूनियर और सीनियर फुटबॉल टीम के मुख्य चयनकर्ता एस नियाजउद्दीन का मानना है कि भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. समस्या संसाधनों और इंफ्रास्ट्रक्चर की है. उनका कहना है कि यदि क्रिकेट की तरह फुटबॉल को भी जमीनी स्तर पर सुविधाएं और निवेश मिले तो भारत फिर से एशिया की मजबूत फुटबॉल ताकत बन सकता है.

एक ऐसा खिलाड़ी जिसकी कहानी प्रेरणा है : एस नियाजउद्दीन की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की कहानी है जब सीमित संसाधनों के बावजूद बिहार का एक युवा फुटबॉल और क्रिकेट दोनों में अपनी पहचान बना रहा था. विदेशी खिलाड़ी उनकी तकनीक की तारीफ कर रहे थे, राष्ट्रीय क्लब उनके खेल पर भरोसा कर रहे थे और दर्शक उनके मैदान में उतरने का इंतजार करते थे. एक चोट ने उनका करियर जरूर रोक दिया, लेकिन खेल के प्रति उनका जुनून आज भी उतना ही जीवंत है.

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