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अनूपगढ़ के बसंत मेघवाल ने एशिया में लहराया तिरंगा, 2.20 मीटर हाई जंप पर जीता स्वर्ण पदक

बसंत कुमार मेघवाल ने हांगकांग में 22वीं एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में 2.20 मीटर हाई जंप पर स्वर्ण पदक जीतकर भारत का परचम लहराया.

बसंत कुमार मेघवाल
बसंत कुमार मेघवाल ने जीता गोल्ड (Photo Courtesy- Basant Meghwal)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 31, 2026 at 7:34 PM IST

4 Min Read
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श्रीगंगानगर: राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र अनूपगढ़ के गांव 12AB के होनहार एथलीट बसंत कुमार मेघवाल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश, प्रदेश और क्षेत्र का नाम रोशन किया है. बसंत ने हांगकांग, चीन में आयोजित 22वीं एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 की पुरुष हाई जंप स्पर्धा में 2.20 मीटर की शानदार छलांग लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ उन्होंने भारत को एशियाई स्तर पर गौरवान्वित किया और तिरंगे को बुलंदियों तक पहुंचाया.

कड़े मुकाबले में शानदार जीत: प्रतियोगिता में एशिया के विभिन्न देशों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया. कड़े मुकाबले के बीच बसंत ने बेहतरीन तकनीक, आत्मविश्वास और धैर्य का परिचय देते हुए अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया. अंतिम दौर में उनका मुकाबला श्रीलंका के खिलाड़ी से था, जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया और भारत को एशियाई चैंपियन बनाया.

बसंत मेघवाल ने एशिया में लहराया तिरंगा (ETV Bharat SrigangaNagar)

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साधारण परिवार से एशियाई चैंपियन तक: गांव 12AB की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर एशियाई चैंपियन बनने तक का सफर बसंत के लिए आसान नहीं रहा. उनके पिता गंगाराम मेघवाल ने बताया कि वो खेती-बाड़ी के साथ ड्राइवरी का कार्य करते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया.

गंगाराम ने बताया कि बसंत पिछले सात वर्षों से लगातार हाई जंप की तैयारी कर रहा था. आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने उसकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी. कई बार दिहाड़ी मजदूरी कर भी बेटे की खेल संबंधी जरूरतों को पूरा किया गया. बसंत तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं. उनके बाद बहन सुनीता और भाई जसवंत हैं. परिवार के संघर्ष और त्याग का ही परिणाम है कि आज बसंत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है.

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माता-पिता और कोच को दिया श्रेय: नगर पालिका द्वारा भी समय-समय पर बसंत का उत्साहवर्धन करने के लिए आर्थिक सहयोग और खेल सामग्री उपलब्ध करवाई गई, जिससे उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिली. बसंत की सफलता के पीछे उनके शुरुआती कोच इकबाल सिंह मान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. कोच मान ने वर्षों तक उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया. बसंत ने अपनी जीत का श्रेय अपने माता-पिता और कोच इकबाल सिंह मान को देते हुए कहा कि उनके सहयोग और विश्वास के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी. उन्होंने कहा कि परिवार और कोच ने हर कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया, जिससे वह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रह सके.

लोगों में खुशी की लहर: बसंत वर्तमान में भारतीय नौसेना में स्पोर्ट्स कोटा के तहत कार्यरत हैं. करीब सात महीने पहले उनका चयन हुआ था और वह केरल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. खेल और नौकरी दोनों क्षेत्रों में उनका प्रदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणादायक बन गया है. ग्राम पंचायत 12ए के सरपंच वासुदेव ने बताया कि बसंत की इस उपलब्धि की खबर मिलते ही गांव 12AB, अनूपगढ़ और पूरे श्रीगंगानगर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई. ग्रामीणों, खेल प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया.

युवाओं के लिए प्रेरणा: लोगों का कहना है कि बसंत ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती. यदि मेहनत, लगन और परिवार का साथ हो तो सीमावर्ती गांव का युवा भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकता है. बसंत मेघवाल की यह सफलता पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय बन गई है.

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