Rajasthan Digifest: वीरेंद्र सहवाग ने साझा किए अनुभव, बोले- साहस से ही मिलती है सफलता, खेल हो या स्टार्टअप
राजस्थान डिजिफेस्ट में पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने क्रिकेट के किस्से, जोखिम लेने की सीख, स्टार्टअप संस्कृति और टीमवर्क पर अपने विचार साझा किए.

Published : January 5, 2026 at 6:40 PM IST
जयपुर: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट के दूसरे दिन सोमवार को युवाओं और उद्यमियों के सामने अपने क्रिकेट करियर और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े कई रोचक किस्से सुनाए. सहवाग ने मैदान पर अंपायर्स से जुड़े मजेदार अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैच के दौरान अंपायर ही बॉस होते हैं. उन्होंने हंसते हुए बताया, “बॉस तो बॉस होता है, लेकिन कठिन समय में यदि आप अपने बॉस का साथ देते हैं, तो समय आने पर वह भी आपकी मदद करता है.” यह बात उन्होंने अंपायर्स के साथ अपने संबंधों के संदर्भ में कही, जो मैदान पर खिलाड़ियों के लिए अंतिम फैसला लेने वाले होते हैं.
सहवाग ने जोखिम लेने की महत्वता पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि बिना जोखिम के प्रगति संभव नहीं है, लेकिन वह जोखिम नपातुला और समझदारी से लिया जाना चाहिए. बदलते क्रिकेट के बारे में बात करते हुए उन्होंने भविष्यवाणी की कि टी-20 क्रिकेट के बाद टी-10 क्रिकेट का दौर भी जल्द देखने को मिल सकता है. उनका मानना है कि क्रिकेट का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और दर्शकों की पसंद छोटे-छोटे फॉर्मेट की ओर जा रही है.
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व्यक्तिगत अनुभव किए साझा: 'नो फियर, नो लिमिट्स - लेन्सन्स फ्रॉम द वर्ल्ड्स मोस्ट एग्रेसिव ओपनर' विषय पर आयोजित इस संवाद सत्र में वीरेंद्र सहवाग ने खेल, स्टार्टअप, निवेश, नेतृत्व, टीमवर्क और जोखिम प्रबंधन जैसे विविध विषयों पर अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि साहस और आक्रामक सोच के बिना न तो खेल के मैदान पर और न ही जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं. सहवाग का मानना है कि भारत में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं. आवश्यकता केवल इन प्रतिभाओं की सही पहचान करने, उन्हें तराशने और उचित मार्गदर्शन देने की है.
समढदारी से लें जोखिम: उन्होंने युवाओं को स्टार्टअप और निवेश के क्षेत्र में सलाह देते हुए कहा कि स्मार्ट बनिए, सही निवेशक चुनिए और सही घोड़े पर दांव लगाइए. स्टार्टअप संस्कृति युवाओं को जोखिम लेना, नवाचार करना और असफलता से सीखना सिखाती है. सहवाग ने जोर देकर कहा कि स्टार्टअप हो या निवेश, बिना जोखिम के आगे बढ़ना असंभव है, लेकिन जोखिम हमेशा समझदारी से लिया जाना चाहिए.
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अन्य खेलों की स्थिति पर चिंता: सहवाग ने क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों की स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि हॉकी सहित कई खेलों में खिलाड़ियों को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती. हर खेल में निवेशकों का आना जरूरी है ताकि खिलाड़ियों को वित्तीय स्थिरता और सुरक्षा मिल सके. अच्छा प्रदर्शन सराहना पाता है तो खराब प्रदर्शन पर आलोचना होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्होंने सलाह दी कि हर दिन आपका नहीं होता, इसलिए टीम के साथियों के अच्छे प्रदर्शन की भी कामना करनी चाहिए. यदि देशभर में खेल प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें सही संसाधन, प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराया जाए, तो भारत ओलंपिक में कहीं अधिक पदक हासिल कर सकता है.
आईपीएल का बदलता प्रभाव: आईपीएल के प्रभाव का जिक्र करते हुए सहवाग ने कहा कि इस लीग ने विदेशी खिलाड़ियों के नजरिये में बड़ा बदलाव लाया है, अब स्लेजिंग जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियां काफी कम हो गई हैं, क्योंकि खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताते हैं और दोस्ती हो जाती है. उन्होंने उत्साह से कहा कि भारत का समय आ चुका है. हालांकि, उनका मानना है कि टेस्ट और वनडे क्रिकेट हमेशा खिलाड़ियों के प्रदर्शन का मजबूत आधार बने रहेंगे. भविष्य को लेकर उन्होंने फिर दोहराया कि टी-20 के बाद टी-10 क्रिकेट का दौर भी देखने को मिल सकता है.
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टीमवर्क, नेतृत्व और आलोचना का जवाब: टाई ग्लोबल के कन्वीनर महावीर प्रताप शर्मा से संवाद के दौरान सहवाग ने किसी भी टीम या संगठन की सफलता का आधार टीम में विश्वास, पारस्परिक सहयोग और सकारात्मक नेतृत्व बताया. उन्होंने कहा कि हर कंपनी को अपने कर्मचारियों का पूरा ध्यान रखना चाहिए. आलोचना से घबराने की बजाय बेहतर प्रदर्शन से उसका जवाब देना चाहिए. सहवाग ने फिर अन्य खेलों में आर्थिक सुरक्षा की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि निवेशकों का हर खेल में आना अनिवार्य है. टीम गेम में हर दिन व्यक्तिगत प्रदर्शन शानदार नहीं होता, इसलिए साथियों के अच्छे खेल की कामना करना जरूरी है.
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