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वह बचपन से ही मेरे साथ बहुत सख्त थे... रिकॉर्ड शतक के बाद वैभव सूर्यवंशी ने बोली बड़ी बात

Vaibhav Suryavanshi Record: वैभव सूर्यवंशी ने 11 चौके, 15 छक्के और 342.85 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए.

वैभव सूर्यवंशी
वैभव सूर्यवंशी (IANS PHOTO)
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By ETV Bharat Sports Team

Published : November 15, 2025 at 10:04 AM IST

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Vaibhav Suryavanshi Hundred: दोहा में खेले जा रहे एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2025 के अपने पहले ही मैच में भारत की ए टीम ने यूएई के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की है. शुक्रवार, 14 नवंबर को खेले गए मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट पर 297 रन बनाए, जो पुरुष टी20 क्रिकेट में संयुक्त रूप से पांचवां सबसे बड़ा स्कोर है.

वैभव सूर्यवंशी की रिकॉर्ड सेंचुरी
इसके बाद शानदार गेंदबाजी करके भारत ए ने युएई को 20 मेॆं 7 विकेट पर 149 रन ही बनाने दिया, और भारत 148 रनों से शानदार जीत दर्ज करके अपने अभियान की दमदार शुरुआत की. मैच में वैभव सूर्यवंशी की असाधारण पारी ने सबका दिल जीत लिया. उन्होंने सिर्फ 42 गेंदों में 342.85 के स्ट्राइक रेट 144 रनों की पारी खेली. जो टी20 में 100 या उससे अधिक के स्कोर का चौथा सबसे अच्छा स्ट्राइक रेट है. उनकी पारी में 11 चौके और 15 छक्के भी शामिल थे.

इसके अलावा 14 वर्षीय वैभव ने 32 गेंदों में शतक जड़कर कई रिकार्ड्स को भी ध्वस्त कर दिया. वो अब पुरुषों के टी20 में किसी भारतीय द्वारा बनाए गए संयुक्त रूप से दूसरे सबसे तेज शतकवीर बन गए, जो ऋषभ पंत के 2018 के शतक के बराबर है, और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2024 में उर्विल पटेल और अभिषेक शर्मा द्वारा 28 गेंदों में बनाए गए शतकों से पीछे है. कुल मिलाकर, यह टी20 क्रिकेट इतिहास का संयुक्त रूप से पांचवां सबसे तेज शतक है.

मेैच के बाद वैभव ने क्या कहा?
मेैच के बाद वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि मैं अपना स्वाभाविक खेल खेल रहा था क्योंकि यह टी20 प्रारूप था. उन्होंने कहा, 'यह मेरा स्वाभाविक खेल था, क्योंकि यह टी20 प्रारूप है, इसलिए मैं अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करना चाहता था. उन्होंने आगे कहा कि हमें इस मैदान पर बड़ा स्कोर चाहिए था और विकेट अच्छा था, बाउंड्री भी छोटी थी. इसलिए मैं अपने शॉट्स पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहा था.'

ये सब मेरे पिता की बदौलत हुआ
वैभव ने खेलों के दौरान मैदान पर ध्यान केंद्रित रखने में मदद के लिए श्रेय अपने पिता को दिया. वैभव ने कहा, 'वह (पिता) बचपन से ही मेरे साथ बहुत सख्त थे. पहले, मैं सोचता था कि वह इतने सख्त क्यों हैं? लेकिन अब मुझे समझ में आया है कि इन बातों का फायदा मैदान पर दिख रहा है, कि उन्होंने मुझे विचलित नहीं होने दिया और मेरा ध्यान क्रिकेट पर केंद्रित रखा, और सुनिश्चित किया कि मैं कड़ी मेहनत करता रहूं. इसलिए मैं कहूंगा कि मेरे पास जो कुछ भी है, वह मेरे पिता की बदौलत है.'

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