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वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप के लिए अल्मोड़ा की बेटी ममता किरौला का चयन, मेहनत और लगन से राह हुई आसान

योगासन खिलाड़ी ममता किरौला का वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में चयन होने पर लोगों में खुशी की लहर है.

Almora Yogasan player
ममता किरौला का वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप के लिए हुआ चयन (Photo-Mamta Kirola)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 6, 2026 at 11:58 AM IST

3 Min Read
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अल्मोड़ा (उत्तराखंड): जनपद के सोमेश्वर विकासखंड अंतर्गत भैंसड़गांव की प्रतिभाशाली योगासन खिलाड़ी ममता किरौला ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर न केवल देवभूमि उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश में अल्मोड़ा का नाम रोशन किया है. ममता ने छठी राष्ट्रीय सीनियर बी योगासन चैंपियनशिप 2025–26 में कांस्य पदक जीतकर एक नई उपलब्धि अपने नाम की है. वहीं ममता का चयन वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप के लिए हुआ है. उनकी इस उपलब्धि पर उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

राष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिता 30 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक महाराष्ट्र के संगमनेर में आयोजित की गई थी. जिसमें देशभर से आए शीर्ष योगासन खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया. कड़े मुकाबले और उच्च स्तरीय प्रदर्शन के बीच ममता किरौला ने अपनी उत्कृष्ट तकनीक, संतुलन और आत्मविश्वास के बल पर ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही ममता ने वर्ष 2026 में गुजरात में प्रस्तावित वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है.

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योगासन खिलाड़ी ममता किरौला (Photo-Mamta Kirola)

यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि अल्मोड़ा जनपद और उत्तराखंड के लिए भी अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है. ममता किरौला मूल रूप से उत्तराखंड के भैंसड़ गांव, सोमेश्वर, अल्मोड़ा की निवासी हैं. उन्होंने योग की बारीकियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को डॉ. नवीन भट्ट एवं डॉ. गिरीश सिंह अधिकारी के संरक्षण में योग विज्ञान विभाग, सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा से सीखा. विश्वविद्यालय स्तर पर प्राप्त यह मार्गदर्शन उनके तकनीकी विकास में बेहद सहायक रहा. अपनी सफलता का श्रेय देते हुए ममता ने विशेष रूप से अपने पति दलीप सिंह किरौला, कोच एवं भाई प्राशु भैसोड़ा का आभार व्यक्त किया.

ममता ने कहा कि मेरे कोच प्राशु भैसोड़ा और जीवनसाथी दलीप सिंह किरौला का निरंतर मार्गदर्शन, अनुशासन, प्रेरणा और मुझ पर अटूट विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा है. हर कठिन समय में उन्होंने मुझे संभाला और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. कोच प्राशु भैसोड़ा की मेहनत, तकनीकी समझ और खिलाड़ी-केंद्रित प्रशिक्षण पद्धति ने ममता को राष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के योग्य बनाया. उनकी यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और परिवार के सहयोग से देवभूमि की बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपना परचम लहरा सकती हैं.

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