होलाष्टक 2026: सावधान! 24 फरवरी से शुभ कार्य वर्जित, भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना...
होली से पहले शुरू होने वाले होलाष्टक में सभी शुभ कार्य वर्जित रहेंगे, जिसमें कई कामों को करने पर मनाही है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 19, 2026 at 12:08 PM IST
|Updated : February 19, 2026 at 12:15 PM IST
शिमला: भारत त्योहारों का देश है. यहां हर उत्सव के पीछे गहरे अर्थ छिपे होते हैं. रंगों का त्योहार होली खुशियों का प्रतीक है, लेकिन इस उल्लास से ठीक पहले प्रकृति और शास्त्र हमें रुकने, ठहरने और आत्मचिंतन करने का संकेत देते हैं. इस समय को हम 'होलाष्टक' के नाम से जानते हैं. साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से हो रही है, जो होलिका दहन तक चलेगी. आइए, जानते हैं कि होलाष्टक क्या है? इसका महत्व क्या है? और इन दिनों में हमें किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
पुजारी मुक्ति चक्रवर्ती और पुजारी परम स्वरूप के अनुसार, "ये आठ दिन केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रहों की चाल और भक्ति की परीक्षा का समय हैं."
क्या है होलाष्टक?
'होलाष्टक' दो शब्दों से मिलकर बना है 'होली' और 'अष्टक'. अष्टक का अर्थ होता है आठ. यानी होली के दहन से पहले के वे आठ दिन जिनमें शुभ कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाती है. पुजारी मुक्ति चक्रवर्ती बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा (जिस दिन होलिका दहन होता है) तक के समय को होलाष्टक कहा जाता है. इस बार यह समय 24 फरवरी 2026 से शुरू होकर 2 मार्च 2026 की मध्यरात्रि (होलिका दहन) तक रहेगा. इन आठ दिनों में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए कोई भी नया या मंगल कार्य करना वर्जित माना गया है.

जाखू मंदिर शिमला के पुजारी परम स्वरूप के अनुसार, "होलाष्टक का सीधा संबंध भक्त प्रह्लाद के कष्टों से है. मान्यता है कि प्राचीन काल में असुरराज हिरण्यकश्यप अपनी शक्ति के अहंकार में अंधा हो गया था. वह चाहता था कि पूरी दुनिया उसे ही भगवान माने, लेकिन उसका अपना पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था. हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद की भक्ति को भंग करने के लिए उन्हें आठ दिनों तक भयानक यातनाएं दीं थी."
पहले दिन से सातवें दिन: प्रह्लाद को ऊंचे पहाड़ों से नीचे फेंका गया, जहरीले सांपों के बीच छोड़ा गया, जंगली हाथियों के पैरों तले कुचलने की कोशिश की गई और भूखा-प्यासा रखा गया, लेकिन हर बार भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए.
आठवां दिन (होलिका दहन): जब सारे प्रयास विफल हो गए, तब हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन 'होलिका' को बुलाया, जिसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था. फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई. चमत्कार यह हुआ कि वरदान के बावजूद पापी होलिका जलकर भस्म हो गई और अटूट विश्वास रखने वाले प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ.
कालीबाड़ी मंदिर शिमला के पुजारी मुक्ति चक्रवर्ती ने बताया, "जिन आठ दिनों तक प्रह्लाद ने कष्ट सहे, उन्हीं 8 दिनों को 'होलाष्टक' कहा जाता है. प्रह्लाद इन दिनों भीषण पीड़ा में थे, इसलिए हिंदू धर्म में इन दिनों को शोक और संयम का प्रतीक मानकर कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है."

होलाष्टक में वर्जित 10 मुख्य कार्य
होलाष्टक के दौरान भूलकर भी ये 10 काम नहीं करने चाहिए-
- विवाह और सगाई
होलाष्टक में विवाह करना सबसे बड़ा निषेध माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस समय ग्रहों की स्थिति वैवाहिक सुख में बाधा डाल सकती है. सगाई या रोका जैसी रस्में भी इन दिनों नहीं करनी चाहिए.
- गृह प्रवेश और भूमि पूजन
अगर आपने नया घर खरीदा है या आप घर की नींव रखना चाहते हैं, तो होलाष्टक के समाप्त होने का इंतजार करें. इन दिनों घर में प्रवेश करने से मानसिक अशांति और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.
- मुंडन और नामकरण संस्कार
हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में मुंडन, नामकरण और यज्ञोपवीत (जनेऊ) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. होलाष्टक में इन संस्कारों को करने से बालक के स्वास्थ्य और स्वभाव पर ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
- नया व्यापार शुरू करना
अगर आप नई दुकान खोलना चाहते हैं, नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या किसी बड़ी डील पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, तो इसे 2 मार्च के बाद के लिए टाल दें.
- बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदारी
सोना, चांदी, हीरा या कोई भी कीमती आभूषण इन दिनों में नहीं खरीदना चाहिए. साथ ही, नया वाहन (गाड़ी/बाइक) खरीदना भी वर्जित माना जाता है.
- विदाई की रस्म
पुरानी परंपराओं के अनुसार, शादीशुदा बेटी या नई बहू की विदाई इन आठ दिनों में नहीं की जाती. इसे परिवार की सुख-समृद्धि के लिए अच्छा नहीं माना जाता.
- बड़े निवेश
शेयर बाजार में बड़ा निवेश करना या जमीन-जायदाद (Property) की रजिस्ट्री कराना इन दिनों में नुकसानदेह साबित हो सकता है.
- निर्माण कार्य का प्रारंभ
घर की मरम्मत या नया कंस्ट्रक्शन शुरू करना इन दिनों में शुभ नहीं होता. पुराने अधूरे कामों को जारी रखा जा सकता है, लेकिन नई शुरुआत वर्जित है.
- धार्मिक अनुष्ठान (काम्य कर्म)
किसी विशेष इच्छा की पूर्ति के लिए किए जाने वाले यज्ञ, हवन या अनुष्ठान इन दिनों में नहीं किए जाते. हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और मंत्र जाप पर कोई रोक नहीं है.
- गोद भराई और अन्य मांगलिक रस्में
परिवार में होने वाले कोई भी छोटे-बड़े मंगल उत्सव होलाष्टक के दौरान टाल देने चाहिए.
क्यों नहीं करने चाहिए होलाष्टक में शुभ कार्य ?
पुजारी परम स्वरूप के अनुसार, "होलाष्टक के दौरान सौरमंडल के प्रमुख ग्रह उग्र (Negatively Active) हो जाते हैं. जब ये सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं, तो व्यक्ति की फैसले लेने की क्षमता (Decision Making) कमजोर हो जाती है. ऐसे समय में किए गए कार्यों में बाधा आने की संभावना रहती है और वे लंबे समय तक शुभ फल नहीं देते. यही कारण है कि होलाष्टक में बुद्धि और मन स्थिर नहीं रहता."

होलाष्टक में क्या करें?
पुजारी परम स्वरूप बताते हैं कि होलाष्टक केवल रुकने का नाम नहीं है, बल्कि यह समय 'भक्ति' को गहरा करने का है.
- भगवान विष्णु की आराधना: चूंकि यह समय प्रह्लाद की भक्ति की जीत का है, इसलिए 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है.
- दान-पुण्य: इन दिनों में जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और धन का दान करने से ग्रहों के दोष दूर होते हैं.
- हनुमान चालीसा का पाठ: नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हनुमान जी की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है.

