ETV Bharat / spiritual

Raksha Bandhan 2026: सुबह नहीं बांध पाए राखी, घबराएं नहीं अभी एक और मुहूर्त है बाकी

इस साल रक्षाबंधन पर दो शुभ मुहूर्त है. इस बार राखी पर भद्रा का साया नहीं है. बालकृष्ण शर्मा की रिपोर्ट.

जानें कब रहेगा रक्षाबंधन पर शुभमुहूर्त
जानें कब रहेगा रक्षाबंधन पर शुभमुहूर्त (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 26, 2026 at 1:21 PM IST

|

Updated : August 27, 2026 at 1:45 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

कुल्लू: देश भर में आज (शुक्रवार, 28 अगस्त को) रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है. भाई की कलाई पर राखी बांधने के लए बहनें साल भर इंतजार करती हैं. इस दिन अपने भाई को राखी बांधकर सुख समृद्धि की भी कामना करती हैं. वहीं. इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा का भी कोई साया नहीं होगा. इसके चलते बहनें अपने भाई को शुभ समय पर राखी बांध सकती हैं.

दरअसल भद्रा काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करने की मनाही शास्त्रों में बताई गई है. हर साल भद्राकाल में बहनें भाइयों को राखी नहीं बांध पाती हैं. इसी के चलते रक्षाबंधन और अन्य त्यौहारों पर भद्रा को लेकर लोगों में संशय रहता है, लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर भद्राकाल नहीं रहेगा.

रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा इस बार भद्रा का साया
रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा इस बार भद्रा का साया (ETV Bharat)

कब है शुभ मुहूर्त

आचार्य विजय कुमार ने बताया कि पंचांग के अनुसार 'साल 2026 में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को दोपहर में हो रहा है और इसका अंत 28 अगस्त को दोपहर में होगा. उदयातिथि के अनुसार रक्षाबंधन का पावन पर्व 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा. रक्षाबंधन की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा. 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, अगर कोई बहन इस दौरान अपने भाई को राखी नहीं बांध सकती है तो वो अभिजीत मुहूर्त में भी राखी बांधी सकती हैं. उस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.'

रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें और थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, मिठाई और राखी रखें. सबसे पहले भगवान का पूजन करें. इसके बाद भाई को तिलक लगाएं और अक्षत लगाएं दीपक से अपने भाई की आरती करें और फिर ऊपर बताए गए रक्षासूत्र मंत्र का जाप करते हुए भाई की कलाई पर राखी बांधें. रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं है. ये भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है. आचार्य विजय कुमार के अनुसार इस दौरान 'येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबलः तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल' मंत्र का भी जाप करें. राखी बांधने के बाद भाई-बहन एक-दूसरे के सुख, स्वास्थ्य और सफलता की कामना करें.

सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा
सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा (ETV Bharat)

इस बार कब तक रहेगा भद्राकाल

इस साल भद्रा काल की बात करें तो 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा, लेकिन 28 अगस्त तो रक्षाबंधन भद्रा रहित होगा. भद्रा काल में किसी भी शुब मुहूर्त की शुरुआत या समाप्ति अशुभ मानी जाती है. इसी कारण से भद्राकाल को देखकर हर प्रकार के कार्य किए जाते हैं.

कौन है भद्रा

आचार्य दीप कुमार ने बताया, "भद्रा तीनों लोकों में घूमती है और जब यह मृत्यु लोक यानी भूलोक में होती है. उस दौरान सभी कामों में ये बाधक मानी गई है. जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ, मीन राशि में विचरण करता है उस दौरान भद्रविष्टीकरण का योग होता है और भद्रा पृथ्वी लोक में रहती है. इस समय सभी कार्य वर्जित कहे गए हैं. शास्त्रों के अनुसार दैत्यों को खत्म करने के लिए भद्रा गधे के मुख और लंबे पूछ और तीन पैर लिए पैदा हुई थी. भद्रा भगवान सूर्य और पत्नी छाया की कन्या और शनि देव की बहन है.

आचार्य दीप कुमार ने बताया कि हिंदू पंचांग में पांच प्रमुख अंग होते हैं और यह तिथि, वार, योग, नक्षत्र, करण होते हैं. इनमें करण एक महत्वपूर्ण अंग होता है. यह तिथि का आधा भाग होता है. करण की संख्या 11 होती है और यह चर और अचर में बांटे गए हैं. चर कारण में बल, बालव, कौलव, तेतील, गण, वाणिज और विष्टि गिने जाते हैं. अचर करण में शकुनि, चतुष्पद, नाग और किस्तघुन होते हैं. इन 11 करण में सातवां करण विष्टि का नाम ही भद्रा है और यह सदैव गतिशील रहता है."

शास्त्रों में मिलने वाले वर्णन के असुनार भद्रा लंबे केश, बड़े दांत वाली और भयंकर रूप वाली कन्या है और जन्म लेते ही भद्रा यज्ञों में विघ्न डालने लगी. उसके इस स्वभाव को देखकर सूर्य देव को उसकी चिंता होने लगी. इसके बाद भगवान सूर्य ने ब्रह्मा जी से परामर्श मांगा. ब्रह्मा जी ने भद्रा से कहा कि तुम बल बालव, कौलव करण के अंत में निवास करो और जो व्यक्ति तुम्हारे समय में गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य करे तुम उसमें भी विघ्न डालो. जो तुम्हारा आदर ना करे तुम उनका कार्य बिगाड़ दो. तब से भद्रा अपने समय में देव, दानव, मानव आदि समस्त प्राणियों को कष्ट देते हुए घूमने लगी.

ये भी पढ़ें: आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा पहले नंबर पर, हिमाचल विधानसभा में आज प्रश्नकाल की बौछार, 67 सवालों से घिरेगी सरकार

Last Updated : August 27, 2026 at 1:45 PM IST