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JULY VRAT TYOHAR 2026: जुलाई में देवशयनी एकादशी, गुप्त नवरात्रि और गुरु पूर्णिमा समेत कई बड़े त्योहार, जानिए क्या है मान्यताएं?

जुलाई महीने में मासिक शिवरात्रि,भौमवती अमावस्या, गुप्त नवरात्रि समेत कई धार्मिक त्योहारों का आयोजन होगा. बालकृष्ण शर्मा की रिपोर्ट.

JULY VRAT TYOHAR
जुलाई में व्रत त्योहार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : July 3, 2026 at 3:43 PM IST

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कुल्लू: सनातन धर्म में हर महीने विभिन्न प्रकार के तीज त्योहार मनाए जाते हैं. ऐसे में जुलाई महीने में भी कई धार्मिक त्योहारों का आयोजन होगा. वहीं, इन त्योहारों के अवसर पर भक्तों के द्वारा विभिन्न देवी देवताओं की पूजा अर्चना करने का भी विधान है. ताकि उन्हें देवी देवताओं की कृपा मिल सके. ऐसे में जुलाई महीने में देवशयनी एकादशी, गुप्त नवरात्रि, गुरु पूर्णिमा, योगिनी एकादशी और वरदा चतुर्थी सहित कई धार्मिक पर्व मनाए जाएंगे.

आचार्य विजय कुमार ने बताया कि, 10 जुलाई को भगवान विष्णु को समर्पित योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन करवाने का शुभ फल मिलता है. आषाढ़ महीने में पड़ने वाली योगिनी एकादशी का व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. यह व्रत आषाढ़ कृष्ण के ग्यारहवें दिन रखा जाता है और जो व्यक्ति इस व्रत का पालन पूरे श्रद्धा भाव से करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं.

12 जुलाई मासिक शिवरात्रि के साथ-साथ प्रदोष व्रत रखा जाएगा और भक्त भगवान शिव की आराधना करेंगे. इस बार 12 जुलाई को एक बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस दिन रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि दोनों एक साथ पड़ रहे हैं. रविवार के दिन प्रदोष व्रत होने से यह 'रवि प्रदोष' कहलाता है. जो सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत का आशीर्वाद देता है.

14 जुलाई भौमवती अमावस्या मनाई जाएगी. मंगलवार का दिन मंगल ग्रह को समर्पित है और इसका एक अन्‍य नाम भौम भी है. इसलिए इस दिन मंगल ग्रह की शांति के लिए भी पूजा का विशेष महत्‍व बताया गया है. इससे मंगल दोष का प्रभाव कम होता है. पितृ दोष और मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के लिए भौमवती अमावस्‍या पर पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करना शुभ होता है. साथ ही तिल के तेल का दीपक जलाना भी लाभकारी होता है.

इसके अलावा 15 जुलाई गुप्त नवरात्रि प्रारंभ होगी और भक्त माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे. पूरे साल में कुल 4 नवरात्रि आती हैं जिनमें दो गुप्त नवरात्रि होती है. इनमें एक आषाढ़ में और एक माघ माह में आती है. ये दिन तंत्र मंत्र के साधकों के लिए बेहद विशेष और महत्वपूर्ण होते हैं. चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. वहीं, माघ और आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में देवी की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है. इस दौरान तंत्र साधना करने वाले साधक विशेष साधनाएं करते हैं और देवी की आराधना करते हैं. मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी की दस महाविद्याओं की साधना करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है.

17 जुलाई को भगवान गणेश को समर्पित वरदा चतुर्थी मनाई जाएगी. भगवान गणेश न केवल बाधाओं को दूर करने वाले हैं, बल्कि वे मार्गदर्शक भी हैं. जो हमें अपने भीतर विद्यमान शक्ति को खोजने में मदद करते हैं. सच्चे मन से की गई प्रत्येक प्रार्थना अधिक शांतिपूर्ण, समृद्ध और आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण जीवन की ओर एक कदम बन जाती है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से उपवास और पूजा करने से जिद्दी बाधाएं दूर होती हैं. निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है. आस्था मजबूत होती है और सफलता और शांति के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

25 जुलाई देवशयनी एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी व्रत के प्रभाव से अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. इससे तीनों लोकों के तीर्थों का सेवन करने के समान पुण्य मिलता है. भगवान विष्णु की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है.

29 जुलाई 2026 गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाएगा. गुरु पूर्णिमा के त्योहार के अवसर पर लोग अपने-अपने गुरुओं के प्रति भी श्रद्धा व्यक्त करेंगे. यह पावन पर्व आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. शास्त्रों में इस दिन को आषाढ़ पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा और वेद व्यास जयंती के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ तिथि पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था. महर्षि वेद व्यास ने चारों वेदों का संकलन और वर्गीकरण कर मानव समाज को अमूल्य ज्ञान प्रदान किया. इसके अलावा उन्होंने महाभारत, श्रीमद्भागवत सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की. यही कारण है कि उन्हें प्रथम गुरु का स्थान दिया जाता है और उनके सम्मान में हर वर्ष गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है.

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