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रांची में विकसित भारत बजट पर परिचर्चा, डॉ गौरव वल्लभ ने कहा- विकसित झारखंड से ही बनेगा विकसित भारत

रांची में विकसित भारत बजट विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई. जिसमें प्रधानमंत्री इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य डॉ. गौरव वल्लभ ने विचार रखे.

Dr Gourav Vallabh
विकसित भारत बजट पर परिचर्चा में डॉ गौरव वल्लभ (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 19, 2026 at 9:00 PM IST

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रांची: झारखंड दौरे पर आए प्रधानमंत्री इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य एवं देश के प्रख्यात आर्थिक चिंतक प्रो. डॉ. गौरव वल्लभ ने आज रांची के चैम्बर भवन में आयोजित विकसित भारत बजट विषय पर आधारित परिचर्चा में अपने विचार साझा किए. अपने संबोधन में प्रो. डॉ. वल्लभ ने कहा कि देशवासी प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प से पूरी तरह जुड़े हुए हैं.

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब राज्य विकसित होंगे और इसी क्रम में विकसित झारखंड से ही विकसित भारत का निर्माण संभव है. उन्होंने कहा कि एक समय झारखंड के प्रमुख शहर देश की एमएसएमई गतिविधियों के इंजन हुआ करते थे, किंतु आज उनकी स्थिति चिंताजनक है. उन्होंने विकसित भारत की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका अर्थ केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि क्वालिटी ऑफ लाइफ, बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सोच में सकारात्मक सुधार है.

एमएसएमई क्षेत्र पर विशेष बल देते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत में डी-रेगुलेशन आवश्यक है, ताकि उद्योग केवल सूचना देकर कार्य प्रारंभ कर सकें और विभागीय चक्कर न काटने पड़ें. प्रधानमंत्री स्वयं हाई डी-रेगुलेशन के प्रबल समर्थक हैं.

उन्होंने कहा कि एमएसएमई को सबसे अधिक आवश्यकता पर्याप्त पूंजी और अल्पकालिक लिक्विडिटी सपोर्ट की है. वर्तमान बजट में केंद्र सरकार द्वारा 12,000 करोड़ के इक्विटी सपोर्ट की घोषणा की गई है और इसी प्रकार का समर्थन राज्य सरकारों को भी करना चाहिए. उन्होंने बताया कि बजट में एमएसएमई के लिए लिक्विडिटी, मार्केटिंग सपोर्ट तथा माइक्रो इकाइयों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कॉर्पोरेट मित्र की भी व्यवस्था की गई है.

गौरव वल्लभ ने कहा कि आज एमएसएमई क्षेत्र देश में लगभग 12 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है और यह भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. वैश्विक तनावों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. जनधन खातों के माध्यम से वित्तीय समावेशन का आधार बना, पिछले 10 वर्षों में 40 करोड़ से अधिक लोगों को 22 लाख करोड़ से अधिक का मुद्रा ऋण दिया गया. पीएलआई योजनाओं और चाइना प्लस वन पॉलिसी का भी भारत को बड़ा लाभ मिला है, जिसके कारण देश लगभग 7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर रहा है. उन्होंने एआई से जुड़ी चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे.

इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष आर. के. सरावगी ने कहा कि झारखंड में आज भी रेड टेपिज्म पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, ट्रेड लाइसेंस जैसी प्रक्रियाएं अब भी बाधा बनी हुई हैं तथा एमएसएमई को समय पर भुगतान नहीं हो पाता क्योंकि विभागों में धन की कमी रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकारों द्वारा पूर्वी भारत के राज्यों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण झारखंड आज भी पिछड़ा हुआ है.

इसके उत्तर में प्रो. डॉ. वल्लभ ने कहा कि वित्त आयोग के फॉर्मूले के अनुसार ऐसा कोई राज्य नहीं है जिसे अनुदान न मिला हो, किंतु झारखंड में समस्या यह है कि विकास के लिए निवेश और कैपिटल एक्सपेंडिचर लगातार घट रहा है. जो राज्य विकास पर खर्च करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं.

उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने कहा कि झारखंड में प्रति व्यक्ति आय कम है, इसलिए यहां लोगों के खर्च करने की क्षमता भी कम है, ऐसे में यहां पर उद्योग व्यापार का स्तर बड़ा करने के लिए केंद्र सरकार को विशेष आर्थिक पैकेज देना चाहिए. चैम्बर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री के 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि पूर्वी भारत के राज्य, विशेषकर झारखंड, जो आज अंतिम पायदान पर है, तेजी से आगे बढ़े.

उन्होंने यह जानने की जिज्ञासा व्यक्त की कि केंद्र सरकार झारखंड को ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करने के लिए किस प्रकार देख रही है और जीडीपी ग्रोथ को कैसे गति दी जा सकती है. सभा का संचालन चैम्बर के कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने किया.

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