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बजट में विकास के लिए पैसा तो तय हो जाता है, पर खर्च में पिछड़ रही सरकार?

बजट आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन वर्षों के वास्तविक या संशोधित अनुमान हमेशा उस वर्ष के बजट अनुमानों से कम रहे हैं.

Nirmala Sitharaman
निर्मला सीतारमण. (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 1, 2026 at 7:16 PM IST

6 Min Read
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कृष्णानंद

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए अधिक राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे बनाने के उद्देश्य से पूंजीगत व्यय बढ़ाने पर केंद्र सरकार का जोर उतना सफल होता नहीं दिख रहा है, जितना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पिछले वर्षों में अनुमान लगाया गया था. रविवार 1 फरवरी को संसद में पेश किए गए नवीनतम बजट आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन वर्षों के वास्तविक या संशोधित अनुमान हमेशा उस वर्ष के बजट अनुमानों से कम रहे हैं.

नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संशोधित अनुमानों के आधार पर केंद्र सरकार का कुल खर्च वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान (BE) से 1 लाख करोड़ रुपये (1,00,503 करोड़ रुपये) से कम हो जाएगा. यह 50.65 लाख करोड़ रुपये (50,65,345 करोड़ रुपये) के बजट अनुमान से घटकर 49.65 लाख करोड़ रुपये (49,64,842 करोड़ रुपये) रह गया है.

ऊपरी तौर पर देखने पर, यह चालू वित्त वर्ष के लिए वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए कुल बजट अनुमानों में केवल 2.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट लगती है. हालांकि, बारीकी से जांच करने पर पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्र सरकार के बजटीय खर्च में हुई कुल कमी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा अकेले पूंजीगत व्यय (capital expenditure) में आई गिरावट के कारण है.

केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था को सहारा देने और रोजगार पैदा करने के लिए लगातार पूंजीगत व्यय बढ़ा रही है- जैसे अधिक राजमार्ग, बंदरगाह, हवाई अड्डे बनाना और रेलवे लाइनें बिछाना. यह कदम 2020 की शुरुआत में कोविड-19 महामारी के बाद उठाया गया था, क्योंकि महामारी के कारण निजी क्षेत्र निवेश के जोखिम उठाने से कतराने लगा था.

बुनियादी ढांचा (infrastructure) क्षेत्र के लिए सरकार के प्रयासों पर चर्चा करते हुए, वित्त मंत्री ने रविवार को कहा: "आर्थिक विकास को गति देने और इसे बनाए रखने के हमारे पहले 'कर्तव्य' के तहत, मैं छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप का प्रस्ताव करती हूं: 7 रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण (manufacturing) को बढ़ाना; पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का कायाकल्प; चैंपियन MSMEs बनाना; बुनियादी ढांचे को शक्तिशाली गति देना; दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना; और शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास करना।"

बजट अनुमानों से पीछे

हालांकि, रविवार को वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा जारी किए गए संशोधित अनुमानों से पता चलता है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र को 'शक्तिशाली धक्का' देने की तमाम बातों के बावजूद, पूंजीगत व्यय घटकर 10.95 लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक रह जाएगा. जबकि इस वर्ष के लिए बजट अनुमान 11.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक का था.

10.95 लाख करोड़ रुपये के इस आंकड़े में चालू वित्त वर्ष के शेष दो महीनों- फरवरी और मार्च 2026 के लिए अनुमानित पूंजीगत व्यय भी शामिल है. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक पूंजीगत व्यय का सटीक पता अगले साल पेश होने वाले केंद्रीय बजट में चलेगा. पूंजीगत व्यय में यह कमी वास्तविक रूप में 25,335 करोड़ रुपये की गिरावट है, जो चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमानों की तुलना में 2.26 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है.

यह पहला साल नहीं है जब केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय बजट अनुमानों से कम रहा है. पिछले तीन बजटों के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि यह रुझान लगातार तीनों बजटों में बना हुआ है.

उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2023-24 के लिए, इतिहास में पहली बार केंद्र सरकार ने 2024 के आम चुनाव के बाद पेश किए गए नियमित बजट में पूंजीगत व्यय के लिए 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया था. हालांकि, वास्तविक पूंजीगत व्यय 9.5 लाख करोड़ रुपये (9,49,195 करोड़ रुपये) ही रहा, जो उस वर्ष के बजट अनुमानों की तुलना में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट दर्शाता है.

इसी तरह, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वित्त मंत्री ने पूंजीगत व्यय के लिए रिकॉर्ड 11.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया था, लेकिन रविवार के बजट में दिए गए नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि उस वित्त वर्ष के लिए वास्तविक पूंजीगत व्यय घटकर 10.52 लाख करोड़ रुपये रह गया. यह उस वर्ष के बजट अनुमानों से फिर से 59,000 करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट है.

चालू वित्त वर्ष के लिए, वित्त मंत्री सीतारमण ने पूंजीगत व्यय के बजट आवंटन को 11.11 लाख करोड़ रुपये से मामूली रूप से बढ़ाकर 11.21 लाख करोड़ रुपये कर दिया था, लेकिन रविवार को उनके द्वारा पेश किए गए संशोधित अनुमानों से पता चला कि चालू वित्त वर्ष का पूंजीगत व्यय 11 लाख करोड़ रुपये से नीचे रहेगा.

पूंजीगत क्षेत्र के लिए बजट आवंटन बढ़ाने के रुझान को जारी रखते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर अगले वित्त वर्ष (अप्रैल 2026 से मार्च 2027 की अवधि) के लिए रिकॉर्ड 12.22 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.

इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग के विकल्पों को बढ़ाने पर जोर

देश में बुनियादी ढांचा वित्तपोषण के विकल्पों को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए, वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में कहा गया है: भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग परिदृश्य बदलाव के दौर से गुजर रहा है और बैंक ऋण पर पारंपरिक निर्भरता से हटकर वैकल्पिक वित्तपोषण साधनों और पूंजी बाजार के उपकरणों के एक विविध इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है.

इसमें आगे कहा गया, "इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) की बढ़ती भूमिका ने इस बदलते परिदृश्य को और मजबूती दी है, जिससे बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों में दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी की भागीदारी संभव हो पा रही है."

(डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में बताए गए विचार लेखक के अपने हैं. यहां बताए गए तथ्य और राय ETV भारत के विचारों को नहीं दिखाते हैं.)

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