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इस साल बेहद खास है श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार, जानिए क्यों और किन गलतियों से बचना चाहिए

हिंदू धर्म में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार का विशेष महत्व है. इसे पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस...

The festival of Shri Krishna Janmashtami is very special this year; find out why and what would be appropriate to do on this occasion.
इस साल बेहद खास है श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार, जानिए क्यों और किन गलतियों से बचना चाहिए (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Lifestyle Team

Published : September 2, 2026 at 7:38 PM IST

5 Min Read
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म का पवित्र और बहुत शुभ त्योहार है. भगवान के जन्मदिन के उपलक्ष्य में हर साल मनाया जाने वाला यह त्योहार भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (आठवें दिन) को पड़ता है. इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिषी शिव कुमार शर्मा के अनुसार, इस साल के जश्न की एक खास बात अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग है. प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, भगवान कृष्ण के जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र था. इसलिए, जन्माष्टमी के जश्न में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों का बहुत महत्व है.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में देवकी और वासुदेव के यहां हुआ था. मान्यता है कि उनका जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात के समय हुआ था. माना जाता है कि उस समय चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में था. इसलिए, भगवान कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व है.

यह साल खास क्यों है?
हालांकि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र हर साल आते हैं, लेकिन वे हमेशा जन्माष्टमी पर एक साथ नहीं पड़ते. चंद्रमा की चाल के अनुसार तिथियों और नक्षत्रों का समय बदलता रहता है. इस साल, जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक साथ पड़ रहे हैं, जिससे यह भक्तों के लिए एक खास आध्यात्मिक अवसर बन गया है. बता दें, हिंदू धर्म में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक ही दिन मिलना बेहद दुर्लभ और अत्यंत शुभ माना जाता है.

आधी रात की पूजा को प्राथमिकता दें
ज्योतिषी शिव कुमार शर्मा का कहना है कि जन्माष्टमी पर निशिता काल (आधी रात) की पूजा का खास महत्व होता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था. देश भर के कई मंदिरों में इस मौके पर खास रस्में, 'अभिषेक' (देवता को पवित्र जल से स्नान कराना) और उत्सव आयोजित किए जाते हैं. कुछ इलाकों में 'निशिता' पूजा का समय वहा के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. इसलिए, भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय 'पंचांग' (कैलेंडर) में बताए गए समय का पालन करें.

जन्माष्टमी पर भूल कर भी ना करें ये गलतियां

  • इस दिन पूरी तरह से तामसिक भोजन से परहेज करें.शराब, तंबाकू या ऐसी ही दूसरी चीजों का सेवन न करें
  • जन्माष्टमी के दिन काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए
  • महिलाओं को इस दिन अपने बाल खुले नहीं रखने चाहिए
  • श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए

जन्माष्टमी पर दान का विशेष महत्व है
ज्योतिषी शिव कुमार शर्मा के अनुसार, श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर दान करने का विशेष महत्व है. आपको अपनी क्षमता के अनुसार दान जरूर करना चाहिए. आप भगवान कृष्ण को प्रिय वस्तुएं भी दान कर सकते हैं. इस दिन अनाज, कपड़े, मक्खन, बांसुरी आदि का दान करना बहुत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. यदि आप व्रत रख सकते हैं, तो आपको जरूर रखना चाहिए. जन्माष्टमी का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान कृष्ण व राधा रानी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.

भगवान कृष्ण का जीवन भक्ति के साथ-साथ धर्म, कर्तव्य और नैतिकता जैसे गुणों का प्रतीक माना जाता है. भगवद्गीता के माध्यम से कृष्ण द्वारा दिए गए संदेश आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. इसीलिए भक्त जन्माष्टमी को केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण की शिक्षाओं और मूल्यों पर चिंतन करने के एक आध्यात्मिक अवसर के रूप में देखते हैं.

(Disclaimer: खबर धार्मिक मान्यताओं और जानकारी पर आधारित है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद आवश्यक है. खबर केवल जानकारी के लिए है.)

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