बाढ़ के पानी से रहें दूर, इन सावधानियों का करें पालन, वरना हो सकती हैं सेहत से जुड़ी गंभीर समस्याएं
हाथों और पैरों पर मामूली कट या खरोंच के जरिए भी बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. बाढ़ के पानी के साथ अक्सर सांप...

Published : August 31, 2026 at 5:50 PM IST
बाढ़ सबसे खतरनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक है, जो इंसानी जिंदगी और अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर डालती है. भारी बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है और बड़े पैमाने पर पानी जमा हो जाता है, जिससे रोजमर्रा के काम-काज में रुकावट आती है और आने-जाने में मुश्किल होती है. ऐसी मुश्किल स्थितियों में अक्सर खाने-पीने की चीजों और साफ पीने के पानी की कमी हो जाती है. बाढ़ का पानी हानिकारक पदार्थों से दूषित हो सकता है और इसमें सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव भी हो सकते हैं. बिना सावधानी के तेजी से बहते पानी में जाने से अनजाने खतरे हो सकते हैं. इसके अलावा, बाढ़ का पानी उतरने के बाद बची हुई कीचड़ में भी कई तरह के छिपे हुए खतरे हो सकते हैं.
बाढ़ के पानी में कई तरह के छिपे हुए खतरे हो सकते हैं
बाढ़ के पानी के साथ बहकर आने वाले केमिकल और इंडस्ट्रियल कचरे से साफ पानी दूषित हो जाता है. इसके अलावा, पानी में मौजूद कांच के टुकड़ों और इस्तेमाल की हुई सुइयों (हाइपोडर्मिक नीडल्स) जैसी चीजों से पैदल चलने वालों को खतरनाक चोटें लग सकती हैं. पानी में फर्टिलाइजर, कीटनाशक और खरपतवार-नाशक के अवशेष हो सकते हैं. दवाइयां, ड्रेन क्लीनर, मेडिकल वेस्ट (इस्तेमाल की हुई पट्टियों सहित) और ऑटोमोटिव फ्लूइड जैसे पदार्थ भी बड़ा खतरा पैदा करते हैं. भारी धातुओं, हाइड्रोकार्बन, डाई, एसिड और रेडियोधर्मी पदार्थों से दूषित पानी के मामले में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए. साथ ही, इसमें कोयले की राख का कचरा भी हो सकता है जिसमें आर्सेनिक, क्रोमियम और मरकरी जैसे कैंसर पैदा करने वाले तत्व होते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ के पानी में मौजूद E. coli जैसे बैक्टीरिया पेट और आंतों की गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं. आंखों या कानों के संपर्क में आने से भी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. हाथों और पैरों पर मामूली कट या खरोंच के जरिए भी बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. इसके अलावा, सांस की समस्याएं और त्वचा की गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है, जो टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकती हैं. पानी में पाए जाने वाले कीड़े-मकोड़े भी खतरा पैदा करते हैं.
जब सड़कों और निचले इलाकों में पानी जमा हो जाए, तो अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. बाढ़ के पानी के साथ अक्सर सांप और चूहे बहकर आ जाते हैं. अगर वे जीवित हों, तो उनके काटने का खतरा रहता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वे मर चुके हों, तो उनके सड़ते हुए शव बीमारी फैला सकते हैं और फंगस पनपने का कारण बन सकते हैं.
अगर बाढ़ का पानी घर में घुस जाए, तो अलमारियों, दीवारों के किनारों, कालीनों के नीचे और फर्नीचर या कपड़ों जैसी जगहों पर फफूंद (मोल्ड) लग सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि फफूंद के ये बीजाणु आसानी से फेफड़ों में जा सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है. (खासकर बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को) और इससे सांस संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. हालांकि भारी बारिश और बाढ़ से शुरुआत में मच्छरों के अंडे बह सकते हैं, लेकिन आमतौर पर एक या दो हफ्ते के भीतर ही वे फिर से पनपने लगते हैं. इसलिए, उन जगहों को साफ करना जरूरी है जहां पानी जमा हो सकता है, जैसे कि नालियां, नारियल के खोल, पुराने टायर और बाल्टियां.
बाढ़ के पानी में जाने से बचना चाहिए, लेकिन अगर किसी कारण जाना पड़े, तो इन सावधानियों का पालन करें
- अगर आपको बाढ़ के पानी में जाना पड़े, तो लंबी आस्तीन वाले कपड़े और वॉटरप्रूफ जूते पहनें.
- अगर आपको कोई मामूली चोट भी लगी हो, तो बाढ़ के पानी में जाने से पहले उस पर वॉटरप्रूफ पट्टी (बैंडेज) लगा लें.
- अगर चोट गीली हो जाए, तो उसे तुरंत साबुन और साफ़ पानी से धो लें. हैंड सैनिटाइजर या वेट वाइप्स का इस्तेमाल करें.
- बाढ़ के पानी में भीगे कपड़ों को ब्लीच जैसे कीटाणुनाशक का इस्तेमाल करके तेज गर्म पानी में धोएं.
- बाढ़ की वजह से पीने के पानी की सप्लाई में सूक्ष्मजीवों (microorganisms) के मिलने का खतरा रहता है. इसलिए, इस्तेमाल करने से पहले पानी को कुछ देर तक पाइप से बहने दें.
रिसर्च के स्रोत
- https://www.redcross.org/get-help/how-to-prepare-for-emergencies/types-of-emergencies/flood.html?srsltid=AfmBOorIPfMpeGJwl_H3Qg7gyiK-NskMlIXA6bKwlzdzv640zqfINyau
- https://www.cdc.gov/floods/safety/floodwater-after-a-disaster-or-emergency-safety.html

