सर्दियों में गीजर का कर रहे हैं इस्तेमाल, तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान, वरना हो सकता है ब्लास्ट
सर्दियों की शुरुआत में लंबे समय तक गीजर बंद रहने के बाद उसे चलाने से पहले कुछ आवश्यक सावधानियां और सर्विसिंग करना बहुत जरूरी है...

Published : November 15, 2025 at 5:47 PM IST
सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है. इसके साथ ही उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है. तापमान में भारी गिरावट के साथ, ठंडे पानी से नहाना मुश्किल होता जा रहा है. इसलिए, कई जगहों पर लोग अब नहाने के लिए गीजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. दरअसल, गीजर सर्दियों के मौसम में हमारे दैनिक जीवन का एक जरूरी इक्विपमेंट है जो हमें गर्म पानी उपलब्ध कराकर ठंड से राहत देता है. मॉडर्न गीजर पानी को जल्द गर्म करता है और इसमें ऑटो कट-ऑफ, टेंपरेचर कंट्रोलर और सेफ्टी वाल्व जैसे कई फीचर्स होते हैं जो इन्हें सुरक्षित और इस्तेमाल में आसान बनाते हैं. हालांकि, सर्दियों की शुरुआत में लंबे समय तक बंद रहने के बाद गीजर चलाने से पहले, कुछ जरूरी सावधानियां बरतना और उसकी उचित सर्विसिंग करवाना जरूरी है. क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही गंभीर खतरे का कारण बन सकती है...
लंबे समय तक बंद रहने के बाद गीजर चालू करने से पहले ये सावधानियां बरतें...
प्रोफेशनल सर्विसिंग है जरूरी: लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर, गीजर के अंदर हीटिंग एलिमेंट पर जंग या कैल्शियम जमा (स्केलिंग) हो सकता है. इससे पानी गर्म होने में ज्यादा समय लग सकता है और आपका बिजली का बिल बढ़ सकता है. सर्दियों के शुरू होने से पहले किसी अनुभवी तकनीशियन से इसकी रेगुलर सर्विसिंग करवाएं.
बिना पानी डाले चालू न करें: गीजर में पानी भरे बिना उसे चालू न करें. ऐसा करने से हीटिंग एलिमेंट ज्यादा गरम हो सकता है, जिससे वह जल्दी खराब हो सकता है. पानी के बिना एलिमेंट बहुत तेजी से गर्म होगा और जल सकता है, जिससे गीजर को स्थायी नुकसान हो सकता है. यहां तक कि बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है. गीडर फट भी सकता है.
वायरिंग और सॉकेट की जांच: गीजर एक हाई पावर कंजप्शन डिवाइस है. यदि कनेक्टिंग तार या सॉकेट पुराना या खराब है, तो शॉर्ट सर्किट या बिजली का झटका लगने का खतरा रहता है. इसलिए यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि अर्थिंग अच्छी हो और तार सुरक्षित हों. इसलिए, नियमित रूप से प्रोफेशनल इलेक्ट्रीशियन से वायरिंग और सॉकेट की जांच करवाना महत्वपूर्ण है.
थर्मोस्टेट सेटिंग की जांच करें: गीजर का तापमान हर समय अधिकतम स्तर पर रखने की जरूरत नहीं है. तापमान 120 डिग्री फारेनहाइट (लगभग 49 डिग्री सेल्सियस) या उसके आसपास सेट करें. इससे बिजली की बचत होगी और ज्यादा गर्म पानी से त्वचा के जलने का खतरा कम होगा. अगर गीजर में ऑटो-कट ऑप्शन नहीं है, तो जांच लें कि सही थर्मोस्टेट काम कर रहा है या नहीं.
सही वेंटिलेशन सुनिश्चित करें: गैस गीजर के मामले में वेंटिलेशन बहुत जरूरी है. क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पन्न हो सकती है. यहां तक कि इलेक्ट्रिक गीजर या बाथरूम में लगे किसी भी गीजर के मामले में भी, नहाते समय एग्जॉस्ट फेन चालू रखें.
नहाने से पहले स्विच ऑफ कर दें: नहाते समय गीजर को कभी भी चालू न रखें. पानी गर्म होने पर उसे पावर पॉइंट से बंद कर दें. फिर नहाना शुरू करें. इससे बिजली की बचत होगी और बिजली कनेक्शन में कोई समस्या होने पर बिजली का झटका लगने का खतरा भी कम होगा.
पानी के दबाव की जांच: गीजर में एक दबाव-मुक्ति वाल्व होता है. अगर यह खराब है, तो टैंक के अंदर खतरनाक दबाव बन सकता है. सुनिश्चित करें कि यह वाल्व ठीक से काम कर रहा है.
लीक की जांच करें: ध्यान से जांच करें कि गीजर के किसी भी हिस्से से पानी लीक तो नहीं हो रहा है. बिजली के कनेक्शनों से होने वाली दुर्घटनाओं का खतरा एक छोटा सा रिसाव भी बढ़ा सकता है.
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी स्वास्थ्य जानकारी और सुझाव केवल आपकी जानकारी के लिए हैं.. हम यह जानकारी वैज्ञानिक शोध, अध्ययनों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर प्रदान कर रहे हैं. हालांकि, इनका पालन करने से पहले अपने निजी चिकित्सक से सलाह करना हमेशा बेहतर होता है.)

