नाभि पर तेल लगाने के फायदे तो सब जानते हैं, लेकिन जानें कौन सा तेल है सबसे लाभदायक
नाभि पर तेल लगाने के फायदे तो सब जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन सा तेल कौन से खास फायदे देता है?

Published : January 8, 2026 at 7:03 PM IST
नाभि पर तेल लगाना एक आयुर्वेदिक तरीका है जिसे 'नाभि पुराण' कहा जाता है. माना जाता है कि इससे पाचन बेहतर होता है, त्वचा में चमक आती है, फटे होंठ ठीक होते हैं और स्ट्रेस कम होता है. नाभि पेट के बीच में होती है, इसकी त्वचा पतली होती है, और इसमें कई छोटी रक्त वाहिकाएं होती हैं. आयुर्वेद के अनुसार, क्योंकि नाभि शरीर का केंद्र है, जो कई नसों से जुड़ी होती है, इसलिए यह तेल को सोख लेती है और त्वचा, पाचन, हार्मोन और आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में मदद करती है. हालांकि, नाभि पर तेल लगाना कोई मेडिकल इलाज नहीं, बल्कि एक पारंपरिक सेल्फ-केयर और आयुर्वेदिक प्रथा है जो त्वचा को नमी, सुकून देती है, और पाचन और त्वचा संबंधी हल्की समस्याओं (जैसे होंठ फटना, सूखापन, या हल्की सूजन) में मदद कर सकती है, खासकर सही तेल का इस्तेमाल करने और इसे रात को सोने से पहले नियमित रूप से करने पर यह त्वचा और शरीर को आराम पहुंचाता है, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं है.
IREMIA की फाउंडर और डर्मेटोलॉजिस्ट प्रीति चड्ढा बताती हैं कि रात को सोने से पहले नाभि पर रेगुलर बादाम, नारियल या सरसों का तेल समेत इन तेलों को लगाने से स्किन और शरीर को आराम मिल सकता है, लेकिन ध्यान रहे यह किसी भी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं है...
अरंडी का तेल
अरंडी का तेल गाढ़ा होता है और धीरे-धीरे एब्जॉर्ब होता है. इसलिए यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें पेट के आसपास सूखापन या पेट में हल्की बेचैनी महसूस होती है. पारंपरिक रूप से, इसका इस्तेमाल त्वचा को मुलायम बनाने और उस जगह पर हल्की गर्मी देने के लिए किया जाता है. रात में कुछ तेल की बूंदें नाभि के आसपास की त्वचा को मुलायम रख सकती हैं. इसका मुख्य फायदा नमी बनाए रखना है, न कि अंदर से सफाई करना. कोल्ड-प्रेस्ड, हेक्सेन-फ्री अरंडी का तेल सबसे अच्छा काम करता है.
नारियल का तेल
वर्जिन नारियल का तेल ज्यादातर स्किन टाइप के लिए सूट करता है. इसमें नेचुरल फैटी एसिड होते हैं जो स्किन बैरियर को बचाने में मदद करते हैं. नाभि पर लगाने से यह टाइट कपड़ों या पसीने से होने वाली ड्राइनेस और हल्की जलन को कम कर सकता है. इसका हल्का टेक्सचर इसे रोजाना इस्तेमाल के लिए एक अच्छा ऑप्शन बनाता है, खासकर गर्म मौसम में. इसकी हल्की खुशबू सोने से पहले की रूटीन में सुकून देती है.
तिल का तेल
तिल का तेल अपनी गर्म तासीर के लिए जाना जाता है. पारंपरिक तरीकों में, इसे जोड़ों और मांसपेशियों के आसपास अकड़न कम करने और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने से जोड़ा जाता है. जब इसे नाभि पर लगाया जाता है, तो यह पेट के हिस्से में आराम दे सकता है, खासकर ठंडे महीनों में. इस्तेमाल से पहले तेल को हल्का गर्म करने से आराम और एब्जॉर्प्शन बेहतर होता है.
बादाम का तेल
मीठा बादाम का तेल हल्का, कोमल और विटामिन E से भरपूर होता है. यह सेंसिटिव स्किन और खुजली या लालिमा वाले लोगों के लिए सूट करता है. नाभि के आसपास रेगुलर इस्तेमाल से स्किन मुलायम रहती है और समय के साथ पुराने स्ट्रेच मार्क्स का लुक बेहतर हो सकता है. इसका फायदा गहरी हीलिंग के बजाय पोषण और कोमलता में है.
सरसों का तेल
सरसों का तेल गर्मी पैदा करता है और स्किन में ब्लड फ्लो बढ़ाता है. कुछ लोग इसे पेट में अकड़न या भारीपन के लिए इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, यह सेंसिटिव स्किन में जलन पैदा कर सकता है. पैच टेस्ट जरूरी है, और इसे हमेशा हल्के तेल के साथ पतला करके इस्तेमाल करना चाहिए. यह ऑप्शन कभी-कभी इस्तेमाल के लिए है, रोजाना लगाने के लिए नहीं.
नाभि में तेल लगाने से पहले क्या जानना चाहिए
तेल से ज्यादा जरूरी है साफ स्किन। पसीने या बैक्टीरिया को फंसने से बचाने के लिए लगाने से पहले हमेशा उस जगह को धो लें. सिर्फ कुछ बूंदों की जरूरत होती है. ज्यादा तेल का मतलब बेहतर नतीजे नहीं होता. नतीजे हर इंसान के लिए अलग-अलग होते हैं, और फायदे ज्यादातर स्किन के आराम और रिलैक्सेशन से जुड़े होते हैं. कोई भी जलन, खुजली या रैश होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें.
(डिस्क्लेमर: इस रिपोर्ट में आपको दी गई सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सलाह केवल आपकी सामान्य जानकारी के लिए है. हम यह जानकारी वैज्ञानिक अनुसंधान, अध्ययन, चिकित्सा और स्वास्थ्य पेशेवर सलाह के आधार पर प्रदान करते हैं. आपको इसके बारे में विस्तार से जानना चाहिए और इस विधि या प्रक्रिया को अपनाने से पहले अपने निजी चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए.)

