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वेनेजुएला तेल भंडार में नंबर 1, पर उत्पादन में फिसड्डी; क्या ट्रंप के दांव से बदलेगी किस्मत?

अमेरिका की दिग्गज रिफाइनरियां, जो केवल 'भारी तेल' को प्रोसेस करने के लिए बनी हैं, उनके लिए वेनेजुएला का तेल 'संजीवनी' से कम नहीं है.

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5 जनवरी, 2026 को ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में U.S. के कॉन्सुलेट जनरल के सामने वेनेजुएला के सपोर्ट में प्रोटेस्ट कर रहे लोग. (Xinhua via IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 10, 2026 at 2:41 PM IST

11 Min Read
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वेनेजुएला का तेल उद्योग उस समय से चर्चा के केंद्र में है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य बल का प्रयोग कर देश के नेता राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा. इसके बाद के दिनों में ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका वेनेजुएला को चलाएगा और उसके तेल भंडारों का इस्तेमाल करेगा..." आइए, आंकड़ों के जरिए समझते हैं वेनेजुएला के तेल सेक्टर की वर्तमान स्थिति, इसमें शामिल प्रमुख खिलाड़ी और भविष्य की संभावनाएं.

वेनेजुएला का तेल उद्योग दशकों से वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक होने के बावजूद, देश का तेल उत्पादन और निर्यात विभिन्न आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों के कारण प्रभावित हुआ है. इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है.

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अमेरिका के न्यूयॉर्क में वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे है लोग. यह तस्वीर शनिवार, 3 जनवरी, 2026 की है. (Xinhua via IANS)

टॉप 5 देशों के क्रूड ऑयल रिज़र्व (अरबों बैरल)

देश के नाम

प्रमाणित कच्चे तेल के भंडार

(अरबों बैरल)

वेनेज़ुएला303.2
सऊदी अरब267.2
ईरान208.6
इराक145
संयुक्त अरब अमीरात113

अमेरिका के लिए वेनेजुएला का तेल क्यों महत्वपूर्ण है?

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, वेनेजुएला की जमीन के नीचे अनुमानित 303 अरब बैरल कच्चा तेल मौजूद है, जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 17% है. लगभग 57 डॉलर प्रति बैरल की वर्तमान कीमतों के आधार पर, वेनेजुएला के तेल भंडार की कीमत करीब 17.3 ट्रिलियन डॉलर (करीब 1,450 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है.

अमेरिका की ज्यादातर रिफाइनरियां 'भारी तेल' को प्रोसेस (साफ) करने के लिए बनी हैं. सरल शब्दों में, अगर अमेरिका को अपनी कारों के लिए पेट्रोल की सप्लाई जारी रखनी है, तो उसे भारी और गाढ़े कच्चे तेल की जरूरत है. चूंकि रिफाइनरियों के सिस्टम को बदलने में अरबों डॉलर का खर्च आता है, इसलिए कोई भी जल्दबाजी में इसे बदलना नहीं चाहता.

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यह फ़ाइल फ़ोटो वेनेज़ुएला के पूर्व प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की है. 10 दिसंबर, 2025 को वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में एक इवेंट में शामिल होते हुए दिखायी दिये थे. (Xinhua via IANS)

आंकड़ों का गणित

साल 2024 में, अमेरिका के कुल तेल आयात में 62 प्रतिशत हिस्सा 'भारी कच्चे तेल' (Heavy Crude) का था. 27 प्रतिशत मध्यम और केवल 10 प्रतिशत हल्का कच्चा तेल था.

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि 'शेल क्रांति' की वजह से अमेरिका में पैदा होने वाला ज्यादातर तेल 'हल्का कच्चा तेल' है. यानी, अमेरिका की रिफाइनरियां खुद के देश में पैदा होने वाले ज्यादातर तेल के अनुकूल नहीं हैं.

यही कारण है कि अमेरिका का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों में निर्यात कर दिया जाता है. वहीं, टेक्सास और लुइसियाना की रिफाइनरियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका रोजाना 6,000 बैरल से ज्यादा भारी तेल का आयात करता है.

वेनेजुएला का फायदा

वेनेजुएला का तेल भारी और 'खट्टा' (sour crude) है, जिसे अमेरिकी खाड़ी तट की रिफाइनरियां आसानी से प्रोसेस करती हैं. दुनिया में बहुत कम देश ऐसा तेल पैदा करते हैं. इसके विपरीत, अमेरिका में पैदा होने वाला ज्यादातर तेल हल्का और 'मीठा' (sweet crude) होता है. यदि वेनेजुएला के तेल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के शुरू होती है, तो इससे तेल और पेट्रोल की कीमतों में कमी आ सकती है. इससे अमेरिकी रिफाइनरियों को आर्थिक लाभ होगा और बाजार में डीजल व जेट ईंधन (हवाई जहाज का तेल) की उपलब्धता भी बढ़ेगी.

कीमतों में कटौती

वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों से इतना कच्चा तेल उत्पादन करने की संभावना बार-बार जताई है, जिससे अमेरिका में तेल की कीमतों को आज के 56 डॉलर प्रति बैरल से घटाकर लगभग 50 डॉलर तक लाया जा सके. ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा की लागत को कम करना है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, राष्ट्रपति का मानना है कि वेनेजुएला के भरपूर तेल उत्पादन से अमेरिकी नागरिकों को सस्ता ईंधन मिल सकेगा.

अमेरिका में तेल की भारी खपत

अमेरिका न केवल दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, बल्कि यह तेल का दुनिया में सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है. खपत के मामले में चीन दूसरे स्थान पर है, जिसके बाद भारत, सऊदी अरब और रूस का नंबर आता है. यही कारण है कि अमेरिका अपने कच्चे तेल के आयात का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कनाडा से और 7 प्रतिशत मेक्सिको से मंगवाता है, क्योंकि ये दोनों देश 'भारी कच्चे तेल' (heavy crude) के बड़े उत्पादक हैं. ऐसे में, यदि अमेरिका की पहुंच वेनेजुएला के भारी तेल भंडारों तक हो जाती है- जो दुनिया में सबसे बड़े हैं- तो यह पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा.

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5 जनवरी, 2026 को लंदन, ब्रिटेन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर वेनेजुएला पर अमेरिकी मिलिट्री हमले के विरोध में प्रदर्शन करते हुए प्रदर्शनकारी प्लेकार्ड पकड़े हुए हैं. (Xinhua via IANS)

वेनेजुएला के तेल उद्योग में अमेरिकी निवेश का इतिहास

वेनेजुएला में तेल उत्पादन शुरू होने के समय से यानी लगभग एक सदी पहले से अमेरिकी कंपनियां वहां की बड़ी खिलाड़ी रही हैं. 1975 से 1990 के दशक की शुरुआत के बीच एक छोटा दौर ऐसा आया था जब वेनेजुएला ने अपने तेल उद्योग का 'राष्ट्रीयकरण' (सरकारी नियंत्रण) कर दिया था और विदेशी कंपनियां वहां से बाहर हो गई थीं.

लेकिन बाद में उनकी वापसी हुई. विशेष रूप से एक्सॉन (Exxon), कोनोको (Conoco) और शेवरॉन (Chevron) जैसी दिग्गज कंपनियां वहां लौटीं. हालांकि, बाद में राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ ने फिर से उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया, जिसके बाद अब वहां केवल शेवरॉन ही बची है.

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला 1920 के दशक से लेकर 90 के दशक के अंत तक दुनिया के शीर्ष तेल उत्पादकों में शामिल रहा. इसकी शुरुआत तब हुई जब मराकाइबो झील (Lake Maracaibo) में तेल का एक विशाल भंडार मिला था. उस समय के तानाशाह जनरल जुआन विसेंट गोमेज के विशेष निमंत्रण पर विदेशी तेल कंपनियों, जिनमें से अधिकांश अमेरिकी थीं- ने वेनेजुएला के शुरुआती तेल उद्योग पर अपना दबदबा बनाया था.

तेल भंडारों की खोज और उन्हें विकसित करने के अधिकार के बदले में, गल्फ (Gulf), शेल (Shell), और स्टैंडर्ड ऑयल (Standard Oil) जैसी कंपनियों ने वेनेजुएला के ग्रामीण इलाकों में पूरी की पूरी बस्तियां बसा दीं. इनमें अस्पताल, स्कूल, बॉलिंग एली (खेलने की जगह), अमेरिकी-शैली के सोडा फाउंटेन, और दुनिया का सबसे बड़ा अमेरिकी प्रवासियों (expats) का समुदाय शामिल था.

अमेरिका सहित कई विदेशी कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र के विकास में भारी निवेश किया

अमेरिका सहित कई विदेशी कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र के विकास में भारी निवेश किया और वहां की राजनीति में भी उनका काफी दखल रहा.

हालांकि, अमेरिका के विरोध के बावजूद, वेनेजुएला के नेताओं ने अपने मुख्य निर्यात संसाधन (तेल) पर अधिक नियंत्रण जताना शुरू कर दिया. वेनेजुएला 1960 में 'ओपेक' (OPEC - पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) के गठन में एक प्रमुख भूमिका निभाने वाला देश था, और 1976 में उसने अपने तेल उद्योग के एक बड़े हिस्से का राष्ट्रीयकरण (सरकारी नियंत्रण में लेना) कर दिया था.

इन बदलावों का एक्सॉन मोबिल (ExxonMobil) जैसी अमेरिकी कंपनियों पर बहुत बुरा असर पड़ा.

कभी वैश्विक तेल बाजारों का मुख्य सप्लायर रहा वेनेजुएला, साल 2000 के दशक के मध्य में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों के साथ अपने संबंधों को पूरी तरह बदलने लगा. उस समय के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ ने तेल उद्योग पर सरकारी नियंत्रण को काफी सख्त कर दिया था.

2004 से 2007 के बीच, चावेज ने विदेशी कंपनियों को सरकार के साथ नए सिरे से अनुबंध (Contracts) करने के लिए मजबूर किया. इन नई शर्तों ने निजी कंपनियों की भूमिका और उनके मुनाफे को भारी कम कर दिया, जबकि वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA को और अधिक शक्तिशाली बना दिया. चावेज के इस कदम ने दुनिया की कुछ सबसे बड़ी तेल कंपनियों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया.

नतीजतन, एक्सॉन मोबिल और कोनोकोफिलिप्स (ConocoPhillips) 2007 में वेनेजुएला से बाहर निकल गईं और बाद में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालतों (International Arbitration Courts) में सरकार के खिलाफ केस दायर किया. अदालतों ने आखिरकार कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाया और वेनेजुएला को आदेश दिया कि वह कोनोकोफिलिप्स को 10 अरब डॉलर से अधिक और एक्सॉन मोबिल को 1 अरब डॉलर से अधिक का भुगतान करे.

वेनेजुएला के तेल उत्पादन को बढ़ाने में चुनौतियां

वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों का उपयोग करने के लिए कई वर्षों के कड़े प्रयास और अरबों डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी, और यह सब एक अत्यंत जटिल भू-राजनीतिक माहौल के बीच करना होगा.

ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख शोध संस्था रिस्टैड एनर्जी (Rystad Energy) का अनुमान है कि वेनेजुएला के तेल उत्पादन को 11 लाख बैरल प्रति दिन के मौजूदा स्तर पर स्थिर बनाए रखने के लिए ही अगले 15 वर्षों में 54 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत पड़ेगी.

संस्था का कहना है कि यदि अगले दो से तीन वर्षों तक अतिरिक्त निवेश किया जाए, तो उत्पादन में 3 लाख बैरल प्रति दिन का इजाफा किया जा सकता है. हालांकि, उत्पादन को 14 लाख बैरल प्रति दिन से ऊपर ले जाने के लिए हर साल 8 से 9 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी.

दुनिया का सबसे बड़ा भंडार होने के बावजूद तेल उत्पादन के लिए क्यों जूझ रहा है वेनेजुएला?

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है. लगभग 303 अरब बैरल, जो वैश्विक कुल भंडार का करीब 17% है। यह सऊदी अरब के 267 अरब बैरल के भंडार से भी कहीं अधिक है. इसके बावजूद, वेनेजुएला प्रतिदिन 10 लाख बैरल से भी कम तेल का उत्पादन करता है, जो वैश्विक उत्पादन के 1% से भी कम हिस्सा है.

तेल लंबे समय से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है. 20वीं सदी के अधिकांश समय में, पेट्रोलियम निर्यात से ही सरकारी राजस्व और विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा प्राप्त होता था.

आज का उत्पादन स्तर 1990 के दशक के उत्तरार्ध और 2000 के दशक की शुरुआत के उत्पादन के मुकाबले एक-तिहाई से भी कम है. उस समय वेनेजुएला रोजाना 35 लाख बैरल से अधिक तेल निकालता था.

वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA को कभी दुनिया की सबसे सक्षम राष्ट्रीय तेल कंपनियों में से एक माना जाता था, जो अपने सुनहरे दौर में प्रतिदिन 30 लाख बैरल से अधिक तेल का उत्पादन करती थी.

लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. सालों से निवेश की कमी, कुप्रबंधन, बुनियादी ढांचे की जर्जर हालत, कुशल कर्मचारियों का देश छोड़कर जाना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने उत्पादन को बुरी तरह घटा दिया है.

हालांकि वेनेजुएला दुनिया के बेमिसाल तेल भंडार के ऊपर बैठा है, लेकिन वर्तमान में इसका उत्पादन प्रतिदिन 10 लाख बैरल से भी काफी कम होने का अनुमान है. यह इसके ऐतिहासिक स्तरों का एक छोटा सा हिस्सा है और अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देशों की तुलना में बेहद मामूली है.

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