ट्रंप ने US बर्थराइट सिटिजनशिप मामले में कहा, अमेरिकी नागरिकता बिकाऊ नहीं, फिर से सुनवाई की मांग की
ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत है. वह इस मामले पर दोबारा सुनवाई की मांग करेंगे.

By ANI
Published : July 9, 2026 at 7:02 AM IST
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समय) को कहा कि वह जन्मसिद्ध नागरिकता के फैसले पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में तुरंत दोबारा सुनवाई की मांग करेंगे. उन्होंने इस फैसले को 'न्याय का मजाक' बताया.
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका की दक्षिणी सीमा और मेक्सिको में ऐसे साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं जिनमें 'बर्थराइट सिटिजनशिप' (जन्म से नागरिकता) का प्रचार किया जा रहा है. ट्रंप ने लिखा, 'हमारी दक्षिणी सीमा और मेक्सिको में हर जगह साइन और बिलबोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिनमें 'बर्थराइट सिटिजनशिप' का प्रचार किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि 'डिलीवरी 4000 डॉलर से शुरू.'
Signs and Billboards are being put up all over our Southern Border, and Mexico, advertising BIRTHRIGHT CITIZENSHIP, with “Deliveries starting at $4000.” Likewise, similar signs going up all over our Country. Billions of Dollars will be illegally made by this SCAM, with… pic.twitter.com/r65AYqPDFj
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) July 8, 2026
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरीके से लोग देश में बच्चे को जन्म देकर अमेरिका की नागरिकता हासिल कर सकेंगे. उन्होंने कहा, 'इस घोटाले से गैर-कानूनी तरीके से अरबों डॉलर कमाए जाएंगे और जो भी पैसे देने को तैयार होगा, उसे नागरिकता मिल जाएगी. यह नागरिकता पाने का सबसे बड़ा जरिया बन जाएगा और फिर पूरे परिवार को भी आने की इजाजत मिल जाएगी. यह तरीका लंबे समय तक नहीं चल सकता.'
यह कहते हुए कि अमेरिकी नागरिकता बिकाऊ नहीं है!' ट्रंप ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत है. मैं तुरंत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर दोबारा सुनवाई की मांग करूंगा.' उन्होंने आगे कहा, 'अगर उन्होंने अपने इस बिल्कुल बेतुके फ़ैसले को नहीं बदला, तो न्याय का यह गलत तरीका अमेरिका को बर्बाद कर देगा.'
इससे पहले थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन के मौके पर ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के रवैये की आलोचना दोहराई, साथ ही हाल के उन दूसरे फ़ैसलों की तारीफ भी की जिनसे राष्ट्रपति के अधिकार बहाल हुए थे. ट्रंप ने कहा, 'हम जन्मसिद्ध नागरिकता के मामले को देखेंगे, क्योंकि यह दूसरे देशों के अमीर लोगों के लिए नहीं थी. यह तो गुलामों के बच्चों के लिए थी.'
उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है, नहीं, मुझे पता है कि उनसे गलती हुई, लेकिन कोई बात नहीं.' यह टिप्पणी तब आई जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले से जन्मसिद्ध नागरिकता के सिद्धांत को बरकरार रखा. कोर्ट ने माना कि अमेरिका में उन माता-पिता से पैदा हुए बच्चे, जो वहां गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से रह रहे हैं, 14वें संशोधन के नागरिकता प्रावधान के तहत अपने-आप अमेरिकी नागरिकता पाने के हकदार हैं.
सीएनएस के अनुसार कोर्ट ने 'अमेरिका बनाम वोंग किम आर्क' मामले में अपने पुराने फैसले को दोहराया और कहा कि अमेरिकी धरती पर विदेशी माता-पिता से पैदा हुए बच्चे जन्मसिद्ध नागरिकता के हकदार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन की एक मुख्य दलील यह थी कि 14वें संशोधन के तहत बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता का दावा करने से पहले उनके माता-पिता का अमेरिका का निवासी (डोमिसाइल) होना जरूरी है.
बहुमत की ओर से फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा, 'नागरिकता, तब भी और अब भी, अधिकार पाने का हक थी यानी हमारे राजनीतिक समुदाय में आजादी से हिस्सा लेना.' रॉबर्ट्स ने लिखा, 'चौदहवें संशोधन को बनाने वालों ने यह वादा 'इस देश में पैदा हुए हर व्यक्ति' तक बढ़ाया था. हम आज भी उस वादे को निभा रहे हैं.'
यह फैसला ट्रंप के लिए एक झटका था, जिन्होंने अपने दूसरे राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान 'बर्थ टूरिज़्म' (बच्चे को जन्म देने के लिए दूसरे देश जाना) को खत्म करने और इमिग्रेशन नीतियों को सख्त करने को अहम मुद्दे बनाया था.

