ETV Bharat / international

नेपाल में चुनाव से पहले अहम रैली, राजशाही को बहाल करने की मांग

मार्च महीने में नेपाल में चुनाव. पूर्व राजा के समर्थन में रैली. राजशाही को लेकर सुगबुगाहट.

Nepal protest
नेपाल में विरोध प्रदर्शन (AP)
author img

By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 11, 2026 at 4:49 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

काठमांडू : नेपाल में शाही परिवार के समर्थकों ने रविवार को एक बड़ी रैली आयोजित की. इस रैली को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी साल मार्च महीने में वहां पर चुनाव होने हैं. पिछले साल सितंबर में नेपाल के जेन-जी ने प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन की वजह से केपी शर्मा ओली की सरकार चली गई थी. उसके बाद वहां पर एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ. अंतरिम सरकार ने मार्च महीने में चुनाव कराने का फैसला किया है.

नेपाल के जेन-जी नेपाली कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी की सरकार से असंतुष्ट थे, इसलिए उन्होंने आंदोलन किया था. विरोध करने वालों में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो नेपाल में फिर से राजतंत्र को बहाल करने की मांग कर रहे हैं. उनके ही समर्थकों ने रविवार को रैली की. वे चाहते हैं कि नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र की ताजोपशी की जाए.

nepal protest
नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के समर्थन में प्रदर्शन (AP)

प्रदर्शन में भाग लेने वालों ने कहा, "हम अपने राजा से प्यार करते हैं. राजा को वापस लाओ." रैली में शामिल लोगों ने राजा पृथ्वी नारायण शाह की मूर्ति के चारों ओर नारे लगाए, जिन्होंने 18वीं सदी में शाह वंश की शुरुआत की थी. आखिरी शाह राजा - ज्ञानेंद्र - को पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया और 2008 में राजशाही खत्म कर दी गई, जिससे नेपाल एक गणतंत्र बन गया.

प्रदर्शनकाररियों में से एक सम्राट थापा ने कहा, "इस देश के लिए आखिरी और एकमात्र विकल्प राजा और राजशाही ही है. मौजूदा हालात में और जेन-जी आंदोलन के बाद देश ने जो रास्ता अपनाया है, स्थिति को संभालने के लिए राजशाही को फिर से बहाल करना ही एक मात्र विकल्प है."

रविवार को पृथ्वी नारायण की जयंती थी और पिछले सालों में यह सालाना रैली प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के कारण हिंसक हो गई थी. पिछले मार्च में राजा के समर्थन में हुई एक रैली के दौरान दो लोग मारे गए थे.

रविवार की सभा शांतिपूर्ण रही क्योंकि पुलिस ने कार्यक्रम पर कड़ी नजर रखी हुई थी.नेपाल का शाही परिवार अभी भी काफी समर्थन हासिल करता है.नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने जेन जी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता संभाली, जो भ्रष्टाचार, अवसरों की कमी, रोज़गार और खराब शासन की शिकायत कर रहे थे. ये विरोध प्रदर्शन पिछली सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए कुछ समय के बैन के कारण शुरू हुए थे.कार्की की भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने में देरी के लिए आलोचना की गई है.

ये भी पढ़ें : नेपाल में 5 मार्च को चुनाव का रास्ता साफ, पूर्व प्रधानमंत्री ओली भी मैदान में उतरने को तैयार