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पाकिस्तानी सेना ने उत्तरी वजीरिस्तान की मस्जिद पर बमबारी की

पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट ने डोमेल स्पार्कह तहसील के जाले बनून गांव में स्थित एक मस्जिद पर पाकिस्तानी सेना के हमले की निंदा की है.

Pakistani Army bombs mosque in North Waziristan village
पाकिस्तानी झंडा (ANI)
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By ANI

Published : November 17, 2025 at 2:16 PM IST

3 Min Read
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खैबर पख्तूनख्वा: पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) हॉलैंड द्वारा जारी एक बयान के अनुसार उत्तरी वजीरिस्तान की डोमेल स्पार्कह तहसील में आने वाले बनून गांव स्थित एक मस्जिद पर अस्र की नमाज के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा कथित तौर पर बमबारी की गई, जिसमें दो पश्तून नागरिक घायल हो गए.

इस हमले से व्यापक आक्रोश फैल गया और कथित तौर पर निवासियों में डर का माहौल है, क्योंकि क्षेत्र में कम्युनिकेशन लाइनें लगातार बाधित हैं. पीटीएम हॉलैंड ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे धार्मिक पवित्रता और मानवीय गरिमा पर सीधा हमला बताया.

'पाकिस्तानी उत्पीड़न का एक नया उदाहरण'
समूह ने इसे दशकों से चले आ रहे पाकिस्तानी उत्पीड़न का एक नया उदाहरण करार दिया और आरोप लगाया कि पश्तून क्षेत्रों को बार-बार युद्ध के लिए टेस्टिंग ग्राउंड में बदल गया है. बयान में कहा गया है, "इबादतगाह, घर, स्कूल, गांव, कुछ भी सुरक्षित नहीं छोड़ा गया है." साथ ही राज्य से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि मस्जिद पर बमबारी किस कानून, किस युद्ध और किस मानवता के तहत की गई."

संगठन ने यह भी दावा किया कि यह हमला पश्तून समुदायों के खिलाफ प्रणालीगत हिंसा के पैटर्न को दर्शाता है. संगठन ने चेतावनी दी कि चल रहे सैन्यीकरण ने निवासियों को दैनिक भय और अलगाव में रहने के लिए छोड़ दिया है. पश्तून तहफुज मूवमेंट - यूनाइटेड स्टेट्स (पीटीएम-यूएस) ने पाकिस्तान के पश्तून क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे दुर्व्यवहारों की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित करने के लिए एक प्रमुख कूटनीतिक पहल की घोषणा की है.

PTM-US के अनुसार, सैन एंटोनियो, टेक्सास जिरगा घोषणापत्र औपचारिक रूप से अमेरिकी कांग्रेस, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को प्रस्तुत किया जाएगा. समूह ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य पश्तून लोगों के विरुद्ध जारी उत्पीड़न, मनमानी गिरफ़्तारियों और युद्ध नीतियों को उजागर करना है.

'घायल राष्ट्र की आवाज'
इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए, पीटीएम-यूएस ने इस अभियान को 'एक घायल राष्ट्र की आवाज' और 'न्याय की मांग कर रहे उत्पीड़ित लोगों की पुकार' का प्रतिनिधित्व करने वाला बताया. बयान में आगे कहा गया, "जब तक न्याय, स्वतंत्रता और मानवता की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंच तक नहीं पहुँच जाती, हम चुप नहीं रहेंगे."

PTM हॉलैंड और पीटीएम-यूएस दोनों ने पश्तून-बहुल क्षेत्रों में राज्य द्वारा भेदभाव और सैन्य नीतियों के अपने आरोपों को तेज कर दिया है और ताजा हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांगें तेज हो गई हैं.

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