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नेपाल में मौत बनकर आई बाढ़ः जानिए, कैसे एक फोन कॉल ने डॉक्टर और 12 कर्मियों की बचाई जान

कुछ ही मिनटों के भीतर, त्रिशूली नदी में मटमैले पानी की एक विशाल, गरजती हुई लहर उठी, जिसने हर चीज को तहस-नहस कर दिया.

Nepal flash flood rescue
नुवाकोट जिले के धुंगे में वेटेरिनरी हॉस्पिटल का कैटल हाउस, जो नेपाल में आई बाढ़ में पूरी तरह से तबाह हो गया. (ETV Bharat)
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By Dev Raj

Published : September 6, 2026 at 6:51 PM IST

6 Min Read
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नुवाकोट: लोग कहते हैं कि दोस्त कभी भी फोन कर सकता है, लेकिन निशांत शर्मा अपनी जान बचाने वाले उन दो फोन कॉल्स को कभी नहीं भूल पाएंगे. नेपाल के नुवाकोट जिले में ढूंगे पशु चिकित्सालय के प्रमुख को 26 अगस्त की सुबह उनके एक दोस्त का फोन आया, जिसमें उन्हें एक बड़ी चेतावनी दी गई. इस चेतावनी की बदौलत उनकी पूरी टीम एक भीषण अचानक आई बाढ़ की चपेट में आने से चंद मिनट पहले ही सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रही.

निशांत त्रिशूली नदी से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित अस्पताल में रोज की तरह काम शुरू करने के लिए पहुंचे थे. जब वे और उनके एक दर्जन सहकर्मी मवेशियों के इलाज और स्थानीय किसानों को सलाह देने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनके मोबाइल की घंटी बजी.

Nepal flash flood rescue
नेपाल के नुवाकोट जिले के धुंगे में सरकारी वेटेरिनरी हॉस्पिटल कैंपस में वेटेरिनरी डॉक्टर निशांत शर्मा अपने कमरे के बाहर. (ETV Bharat)

निशांत ने ईटीवी भारत को बताया, "सुबह 9:15 बजे रसुवा से मेरे दोस्त और सहकर्मी पुष्पा जोशी का फोन आया. उन्होंने हमें त्रिशूली नदी में आई अचानक बाढ़ के बारे में जानकारी दी और बताया कि पानी का एक बहुत बड़ा सैलाब हमारी तरफ बढ़ रहा है. उन्होंने हमसे तुरंत ऊंचाई वाले और सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा."

हिमालय के ऊपरी इलाकों, विशेषकर नेपाल में मॉनसून के दौरान अचानक बाढ़ आना, नदियों में पानी का बहाव बढ़ना और हिमस्खलन होना कोई नई बात नहीं है. फोन कॉल से उत्सुकता बढ़ने पर निशांत यह नज़ारा देखने के लिए अस्पताल की इमारत की छत पर चले गए. लेकिन उनका दोस्त इतनी आसानी से बात छोड़ने वाला नहीं था.

निशांत ने आगे बताया, "पुष्पा ने पांच मिनट बाद फिर से फोन किया ताकि यह पता लगा सके कि हमने अपना दफ्तर छोड़ा या नहीं. जब उन्हें पता चला कि हम वहीं हैं, तो वह नाराज हो गए और मुझे जमकर फटकार लगाई. इसके बाद हमने तुरंत दफ्तर छोड़ दिया और ऊंचाई वाले इलाके की तरफ दौड़ पड़े."

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नुवाकोट जिले के धुंगे में सरकारी पशु चिकित्सालय में सफाई अभियान. (ETV Bharat)

कुछ ही मिनटों के भीतर, त्रिशूली नदी में मटमैले पानी की एक विशाल, गरजती हुई लहर उठी, जिसने अपने रास्ते में आने वाली लगभग हर चीज को तहस-नहस कर दिया. पशु चिकित्सक और उनके सहकर्मी तब तक पास की पहाड़ी पर चढ़ चुके थे और उन्होंने वहीं से इस खौफनाक नज़ारे को देखा.

निशांत ने कहा, "बाढ़ का पानी हमारे परिसर के भीतर तक घुस आया. इसने अस्पताल के ठीक पीछे बने मवेशी घर को पूरी तरह तबाह कर दिया. शुक्र है कि उस समय उसके अंदर कोई मवेशी नहीं था. पानी परिसर की उस दो मंजिला इमारत में भी घुस गया जहां मैं और मेरे सहकर्मी रहते थे. मैंने अपने कमरे में रखे सारे कपड़े, लैपटॉप, बिस्तर, फर्नीचर और घर का दूसरा सामान खो दिया."

निशांत ने समय पर चेतावनी देने और बार-बार फोन करने के लिए पुष्पा का आभार जताते हुए कहा कि उसी की वजह से उनकी जान बची. उन्होंने कहा, "दफ्तर और निजी संपत्ति तो नष्ट हो गई, लेकिन हम सभी बिना किसी शारीरिक नुकसान या चोट के सुरक्षित बच गए. यह बहुत बड़ी बात है."

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नुवाकोट जिले के धुंगे में नेपाल सरकार का पशु चिकित्सालय. (ETV Bharat)

निशांत इसे अपने जीवन की अब तक की सबसे भयानक घटना बताते हैं. उन्होंने आगे कहा, "हमने 2015 में एक भीषण भूकंप का सामना किया था, लेकिन यह घटना उससे भी कहीं बढ़कर डरावनी थी." निशांत और उनकी टीम को फोन आने और उनके सुरक्षित भागने का असर दूसरों पर भी पड़ा. उन्हें भागते हुए देखकर कुछ और लोग भी अपनी जान बचाने के लिए ऊंचाई वाले इलाकों की तरफ दौड़ पड़े.

पशु चिकित्सक और उनके सहयोगियों ने 26 अगस्त की बाढ़ में एक अंतर यह नोट किया कि अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़, रेत, पेड़ और मलबा बहाकर लाई थी, जिसने इसकी विनाशकारी शक्ति को और बढ़ा दिया था. जब पानी उतरा, तो पीछे गाद जमा रह गई, जिसने सब कुछ जाम कर दिया.

उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि इस तबाही से पहले इलाके में कोई भारी बारिश नहीं हुई थी. इससे इस अनुमान को बल मिलता है कि यह अचानक आई बाढ़ किसी ग्लेशियर (बर्फ की चट्टान) के टूटने या हिमस्खलन या ऐसी ही किसी अन्य प्राकृतिक घटना का नतीजा थी. अपना सारा निजी सामान खोने के बाद, पशु चिकित्सालय की पूरी टीम फिलहाल होटलों में ठहर रही है और सब कुछ वापस पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है.

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नुवाकोट जिले के धुंगे में सरकारी पशु चिकित्सालय में सफाई अभियान. (ETV Bharat)

निशांत ने कहा, "इतने सारे लोगों की जान और संपत्ति के नुकसान, और पूरे इलाके की बदली हुई सूरत को देखकर हम सभी गहरे मानसिक सदमे में थे. हम कुछ दिनों तक शांत रहे, स्थिति को समझा और खुद को संभाला. लेकिन अब हमने अस्पताल को फिर से शुरू करने के लिए उसकी सफाई का काम शुरू कर दिया है. इलाके के कई किसान अपने मवेशियों के इलाज के लिए इंतजार कर रहे हैं."

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, इन बाढ़ों में अब तक लगभग 1,341 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 589 विदेशी नागरिकों सहित 5,000 अन्य लोग लापता हैं. नेपाली सेना और पुलिस ने अब तक 13,104 लोगों को सुरक्षित बचाया है.

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