नेपाल में 5 मार्च को चुनाव का रास्ता साफ, पूर्व प्रधानमंत्री ओली भी मैदान में उतरने को तैयार
नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के चुनाव लड़ने के लिए राजी होने के बाद समय पर आम चुनाव होने की उम्मीद है.

Published : January 10, 2026 at 4:44 PM IST
काठमांडू: 'Gen Z' समूहों के कुछ नेताओं के दबाव के बावजूद नेपाल की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की अंतरिम सरकार मार्च में संसदीय चुनाव कराने की तैयारी में हैं. वह यह सुनिश्चित करने के लिए भी काम कर रही हैं कि बीते सितंबर में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के मुताबिक उनकी सरकार तटस्थ रहे.
सुशीला कार्की हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड, शेर बहादुर देउबा और केपी शर्मा ओली समेत बड़े राजनीतिक नेताओं से चर्चा करने में व्यस्त रही हैं, ताकि 5 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल बनाया जा सके.
चुनाव की तैयारियां जारी हैं. अंतरिक प्रधानमंत्री कार्की ने 6 जनवरी को कैबिनेट मीटिंग में यह साफ कर दिया है कि चुनाव लड़ने की योजना बना रहे विभिन्न दलों से जुड़े सभी मंत्रियों को सरकार से खुद को अलग कर लेना चाहिए और उनकी सरकार की छवि को एक तटस्थ और नागरिकों के नेतृत्व वाली सरकार के तौर पर बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए.
सितंबर में 'Gen Z' के विद्रोह के बाद ओली सरकार गिराने के कुछ दिनों बाद नेपाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी.

7 जनवरी को, कार्की की अपील मानते हुए, ऊर्जा मंत्री कुलमन घीसिंग, जो दो और मंत्रालयों को भी संभाल रहे थे, ने अंतरिम मंत्रिमंडल से इस्तीफे का ऐलान किया. नेपाल की बिजली कंपनी के पहले प्रमुख रहे घीसिंग को कुछ साल पहले देश में "लोड-शेडिंग" (बिजली की कटौती) खत्म करने में उनकी भूमिका के लिए नेपाल में बहुत पसंद किया जाता है.
घीसिंग ने अपनी राजनीतिक पार्टी, उज्यालो नेपाल पार्टी बनाई थी. हालांकि बाद में उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) में इसका विलय कर दिया. आरएसपी 2022 में बना राजनीतिक दल है जिसका नेतृत्व पूर्व टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता रबी लामिछाने (Rabi Lamichhane) कर रहे हैं. अब इसे काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह का भी समर्थन मिल गया है.
अभी तक, अंतरिम कैबिनेट के दो और मंत्रियों - सूचना और संचार मंत्री जगदीश खरेल और खेल और संस्कृति मंत्री बबलू गुप्ता - ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है. हालांकि माना जाता है कि दोनों नेता चुनाव लड़ने और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को खुला रखने के इच्छुक हैं, लेकिन उन्होंने खुद को तटस्थ और मंत्रालय का काम करने के लिए फिट बताया है.
आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां
प्रधानमंत्री कार्की के साथ हालिया बैठक में, कई नेताओं ने सितंबर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेपाल की जेलों से भागे हजारों कैदियों और सुरक्षाकर्मियों से सैकड़ों हथियार लूटने की घटनाओं से पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों पर अपनी चिंता जताई है. नेपाल के गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल ने ऐसे डर को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा है कि ज्यादातर फरार कैदियों को पकड़ लिया गया है और हथियार भी बरामद कर लिए गए हैं.
8 जनवरी को कार्की और पूर्व प्रधानमंत्री ओली के बीच आमने-सामने की बैठक के दौरान यह मुद्दा एजेंडा में सबसे ऊपर था. यह बैठक अपने आप में एक तरह से महत्वपूर्ण घटनाक्रम था, क्योंकि 9 सितंबर को ओली को हटाए जाने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली ऐसी बैठक थी. कार्की के सहयोगी राम रावल के अनुसार, चर्चा 5 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले पूरे माहौल को बेहतर बनाने पर केंद्रित थी.
चुनाव लड़ेंगे ओली
CPN-UML के नए चेयरमैन चुने गए केपी शर्मा ओली ने कुछ दिन पहले ही आधिकारिक रूप से चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है, जो कार्की की अंतरिम सरकार के लिए बड़ी राहत की बात है. क्योंकि कुछ हफ्ते पहले तक, ओली की पार्टी संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा को फिर से बहाल करने की मांग अड़ी थी, जिसे 'Gen Z' के विद्रोह के बाद भंग कर दिया गया था. CPN-UML की गठबंधन सरकार में सहयोगी पार्टी रही, नेपाली कांग्रेस ने भी इस मांग का समर्थन किया था.
ओली के रुख में बदलाव हाल ही में अंतरिम सरकार की तरफ से सितंबर में उनके हटाए जाने के बाद उन पर लगे यात्रा प्रतिबंध को हटाने के फैसले के बाद आया है. ओली, अपने पुराने कैबिनेट साथी रमेश लेखक की तरह, अब यात्रा करने के लिए स्वतंत्र हो गए हैं, क्योंकि दोनों ने Gen Z प्रदर्शन को दबाने में अपनी भूमिका की जांच के लिए बनाए गए एक उच्च स्तरीय कमीशन के सवालों का जवाब दिया है, जिसमें लगभग 80 नेपालियों की मौत हो गई थी. इसके बाद हुई आगजनी और Gen Z के हमलों में लगभग 84 बिलियन नेपाली रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई थी.
राजनीतिक विश्लेषक हरि रोका कहते हैं, "ओली के चुनाव लड़ने के लिए राजी होने से, चुनाव के लिए माहौल पूरी तरह तैयार लग रहा है. अब चीजें काफी अच्छी लग रही हैं. मेरा बस यही डर है: अगर अराजकता फैलाने वालों के एक या दो समूह सड़कों पर वापस आकर परेशानी खड़ी करने लगे, तो माहौल खराब हो सकता है और चुनाव टल सकता है."
वहीं, अंतरिम प्रधानमंत्री कार्की का कहना है कि सरकार समय पर चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है. सरकार ने एक से ज्यादा मौकों पर साबित किया है कि यह उन छोटे समूहों को संभाल सकती है जो शायद परेशानी खड़ी करने के लिए तैयार रहते हैं. सरकार बनने के बाद के हफ्तों में, इसने कई बिखरे हुए Gen Z समूहों को बातचीत की टेबल पर लाया और उन्हें नेपाल के 2015 के संविधान के दिखाए रास्ते पर चलने के लिए मनाया.
सिर्फ दो सप्ताह पहले ही, प्रधानमंत्री कार्की की टीम के मंत्रियों और सलाहकारों ने विवादित बिजनेसमैन दुर्गा प्रसैन के नेतृत्व वाले एक और अभियान समूह को संभाला था, जो कुछ हफ्ते पहले अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी दे रहा था. उनका समूह राजशाही और हिंदू राष्ट्र की किस्मत का फैसला करने के लिए जनमत संग्रह की जिद पर अड़ा हुआ है, जो मई 2008 में चुनी गई पहली संविधान सभा द्वारा पहले ही इतिहास में सिमट चुके हैं, जिसने नेपाल को एक धर्मनिरपेक्ष देश बना दिया था.
उन्हें बातचीत की टेबल पर बुलाते हुए, अधिकारियों ने प्रसैन से "चुनाव लड़ने, दो-तिहाई बहुमत हासिल करने और उसी के अनुसार फैसला करने" की अपील की. इसके बाद, समूह चुप रहा. अब जब सभी मुख्य राजनीतिक दल और नेता चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो रहे हैं, तो नेपाल 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव की राह पर मजबूती से आगे बढ़ता दिख रहा है.
(डिस्क्लेमर: इस लेख में साझा किए गए विचार लेखक के अपने हैं. इसमें व्यक्त किए गए तथ्य और राय ईटीवी भारत के विचारों को नहीं दर्शाते हैं)
यह भी पढ़ें- नेपाल चुनाव: काठमांडू मेयर बालेन शाह PM उम्मीदवार घोषित, RSP के साथ राजनीतिक गठबंधन

