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Explained : ईरान युद्ध के सबसे खतरनाक संकेत, डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला, नहीं रूका तो मध्य-पूर्व में पानी के लिए मचेगा 'हाहाकार'

अमेरिका ने ईरान में डिसेलिनेशन प्लांट पर किया हमला. मिडिल ईस्ट में बढ़ सकता है जल सकंट.

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ईरान पर हमले के बाद इज़राइल द्वारा हाइफा खाड़ी में राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी करने के दौरान, पानी के ऊपर एक आने वाला प्रक्षेपास्त्र फट गया (AP)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 8, 2026 at 1:32 PM IST

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Updated : March 8, 2026 at 2:13 PM IST

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नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से पूरी दुनिया में ऊर्जा की कीमतों पर प्रभाव पड़ना तय है. इसे पूरी दुनिया में महसूस किया जाने लगा है. खाड़ी क्षेत्र विश्व के कच्चे तेल निर्यात का लगभग एक तिहाई उत्पादन करता है और ऊर्जा राजस्व राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं का आधार है. लड़ाई के कारण प्रमुख समुद्री मार्गों पर टैंकरों का आवागमन पहले ही रुक चुका है और बंदरगाहों पर कामकाज बाधित हो गया है, जिससे कुछ उत्पादकों को भंडारण टैंकों के भर जाने के कारण निर्यात कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. लेकिन खाड़ी शहरों को पीने के पानी की आपूर्ति करने वाला बुनियादी ढांचा भी उतना ही खतरे में पड़ सकता है.

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने एक दिन पहले सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया कि अमेरिका ने बहरीन स्थित अपने अड्डे से दागी गई मिसाइलों से ईरान के केशम द्वीप पर स्थित मीठे पानी के डिसेलिनेशन संयंत्र पर हमला किया. उन्होंने कहा कि इससे 30 गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई. उनके सटीक शब्द थे, "यह मिसाल अमेरिका ने कायम की है, ईरान ने नहीं."

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ईरान पर हमले के बाद इज़राइल द्वारा हाइफा खाड़ी में राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी करने के दौरान, पानी के ऊपर एक आने वाला प्रक्षेपास्त्र फट गया (AP)

यह खबर बहुत मामूली-सी लगती है, लेकिन पश्चिम एशिया में इसका महत्व बहुत अधिक है. लोगों का कहना है कि मिसाइल अटैक को तो सहा जा सकता है, लेकिन पानी संकट हो जाए, तो जिंदगी रूक सी जाएगी. यह सीधे-सीधे लोगों के जीवन से जुड़ा है.

दो मार्च को दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पर ईरान के हमले हुए. यह दुनिया के सबसे बड़े डिसेलिनेशन संयंत्रों में से एक से लगभग 12 मील की दूरी पर है. संयंत्र शहर के अधिकांश पेयजल का उत्पादन करता है.संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह एफ1 बिजली और जल परिसर और कुवैत के दोहा वेस्ट विलवणीकरण संयंत्र में भी क्षति की सूचना मिली है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों संयंत्रों में क्षति पास के बंदरगाहों पर हुए हमलों या ड्रोन द्वारा रोके गए मलबे के कारण हुई प्रतीत होती है, और अभी तक ईरान द्वारा जानबूझकर जल शोधन स्थलों को निशाना बनाने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं.

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कैलिफोर्निया के कार्ल्सबैड में स्थित कार्ल्सबैड विलवणीकरण संयंत्र से पीने के पानी को ले जाने वाली एक पाइपलाइन (AP)

खाड़ी क्षेत्र के कई डिसेलिनेशन संयंत्र बिजली स्टेशनों के साथ सह-उत्पादन सुविधाओं के रूप में एकीकृत हैं, जिसका अर्थ है कि विद्युत बुनियादी ढांचे पर हमले जल उत्पादन को भी बाधित कर सकते हैं. एपी न्यूज एजेंसी से बात करते हुए सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में जल सुरक्षा के वरिष्ठ फेलो डेविड मिशेल ने कहा कि जहां संयंत्र बैकअप आपूर्ति मार्गों के साथ राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़े हैं, वहां भी व्यवधान परस्पर जुड़े सिस्टमों में फैल सकते हैं. खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्रों में कई चरण होते हैं — इनटेक सिस्टम, ट्रीटमेंट फैसिलिटी, एनर्जी सप्लाई — और इस श्रृंखला के किसी भी हिस्से में खराबी आने से उत्पादन बाधित हो सकता है.

पर्सियन खाड़ी के तट पर सैकड़ों डिसेलिनेशन संयंत्र स्थित हैं. इससे लाखों लोगों को पानी की आपूर्ति करने वाली व्यक्तिगत प्रणालियां ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमलों की चपेट में आ जाती हैं. इनके बिना, बड़े शहर अपनी वर्तमान आबादी का भरण-पोषण नहीं कर पाएंगे.

डिसेलिनेशन तकनीक के तहत समुद्री जल से नमक को हटाया जाता है. आमतौर पर इसे रिवर्स ऑस्मोसिस नामक प्रक्रिया में अति महीन झिल्लियों से गुजारकर - ताकि मीठे पानी का उत्पादन किया जा सके. इसकी मदद से दुनिया के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक में शहरों, होटलों, उद्योगों और कुछ कृषि को बनाए रखता है.

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प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा उपलब्ध कराई गई यह तस्वीर 1 मार्च, 2026 को संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में स्थित जेबेल अली बंदरगाह को दर्शाती है. (AP)

कुवैत को अपने पीने के पानी का 90 प्रतिशत हिस्सा खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया से मिलता है, इसी तरह से ओमान को 86 प्रतिशत, सऊदी अरब को 70 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात को 42 प्रतिशत हिस्सा इसी प्रक्रिया से पानी मिलता है.

इन सभी देशों के पास विकल्प नहीं हैं. उनके पास नदी नहीं है, जहां से वे पानी की सप्लाई जारी रख सकें. अरब प्रायद्वीप की संपूर्ण मानव बस्ती उन मशीनों पर निर्भर करती है जो खारे पानी को मीठे पानी में परिवर्तित करती हैं, निरंतर और बड़े पैमाने पर चलती हैं, और बिजली ग्रिड और इनटेक पाइपों से जुड़ी होती हैं, जो किसी भी सैन्य क्षेत्र में सबसे आसान लक्ष्यों में से हैं.

खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी के देश दुनिया के करीब 40 फीसदी डिसैनिनेटेड पानी का उत्पादन करते हैं. पूरे क्षेत्र में 400 से ज्यादा प्लांट काम कर रहे हैं.

पानी के संयंत्र पर किए गए हमले के जवाब में ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने बहरीन पर हमला किया. उन्होंने कहा कि हमने बहरीन के जुफैर में स्थित अमेरिकी अड्डे को सॉलिड और लिक्विड ईंधन वाली मिसाइलों से निशाना बनाया है. आईआरजीसी ने बताया कि यह हमला केशम में एक डिसेलिनेशन संयंत्र पर अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया था.

जब यही सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "मुझे डिसेलिनेशन संयंत्र के बारे में कुछ भी नहीं पता, सिवाय इसके कि अगर वे इस संयंत्र के बारे में शिकायत कर रहे हैं, तो हम इस बात की शिकायत करते हैं कि उन्हें बच्चों के सिर नहीं काटने चाहिए"

हालांकि, सीएनएन, बीबीसी और रॉयटर्स ने इसे ईरान का आरोप बताया है. यह दावा सही है या गलत, स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है. महत्वपूर्ण यह है कि ईरान ने सार्वजनिक रूप से एक डिसेलिनेशन हमले को अमेरिकी मिसाल के तौर पर पेश किया है. और अगर यह सिलसिला बढ़ा, तो पूरे मध्य पूर्व में पानी को लेकर हाहाकार मच जाएगा.

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ईरान द्वारा रोके गए एक ड्रोन का मलबा संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह में स्थित तेल संयंत्र से टकराने के बाद आग और धुएं का गुबार दिखाई दे रहा है (AP)

अगर इतिहास की बात करें, तो 1991 में इराक ने कुवैत के खारे पानी को मीठा करने वाले संयंत्रों में कच्चा तेल डाला था. इससे उबरने में कई साल लग गए. इस तबाही के कारण कुवैत में ताजे पानी की कमी हो गई और वह आपातकालीन जल आयात पर निर्भर हो गया.

हाल ही में, क्षेत्रीय तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की खारे पानी को मीठा करने वाली सुविधाओं को निशाना बनाया है. ये घटनाएं नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले के खिलाफ लंबे समय से चले आ रहे मानदंडों के व्यापक उल्लंघन को रेखांकित करती हैं.

जेनेवा कन्वेंशन के प्रावधानों सहित अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, आबादी के अस्तित्व के लिए अपरिहार्य नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने पर रोक लगाते हैं, जिनमें पेयजल सुविधाएं भी शामिल हैं. जल बुनियादी ढांचे पर हानिकारक साइबर हमलों की संभावना एक बढ़ती हुई चिंता का विषय है. 2023 और 2024 में, अमेरिकी अधिकारियों ने कई अमेरिकी जल उपयोगिताओं को हैक करने के लिए ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया.

अब 2026 में खाड़ी क्षेत्र पहले से कहीं अधिक इस पर निर्भर है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है. आपातकालीन टैंकर आयात भी उसी बीमा रद्द होने के खतरे का सामना कर रहे हैं, जिसने तेल टैंकरों को रोक दिया था. जल आपूर्ति की सुरक्षा के लिए बनाई गई अतिरिक्त व्यवस्था उन जहाजरानी मार्गों पर निर्भर करती है जो अब काम नहीं करते.

आरोपों के बाद खाड़ी देशों ने प्रमुख संयंत्रों के आसपास पैट्रियट बैटरी तैनात कर दीं. इनटेक पाइपों में पानी के नीचे सेंसर लगे हैं. साइबर सुरक्षा में खामियां मौजूद हैं. लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में वही गणितीय गणना लागू होती है: एक हजार ड्रोनों पर 93 प्रतिशत सफलता का मतलब भी 70 हमले होंगे. किसी सैन्य अड्डे पर एक हमला तो सहन किया जा सकता है, लेकिन विलवणीकरण संयंत्र के इनटेक पर एक हमला लाखों लोगों की जल आपूर्ति ठप कर देता है.

हालांकि, कई लोग मानते हैं कि ईरान की स्थिति थोड़ी अलग है. खाड़ी के कई देशों के विपरीत, जो खारे पानी को मीठा बनाने पर बहुत अधिक निर्भर हैं, ईरान को अभी भी अपना अधिकांश पानी नदियों, जलाशयों और सूख चुके भूमिगत जलभंडारों से मिलता है. यहां पर अपेक्षाकृत कम संख्या में खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र हैं, जो राष्ट्रीय मांग का केवल एक अंश ही पूरा करते हैं.

ईरान अपने दक्षिणी तट के साथ खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया का विस्तार करने और कुछ पानी को अंतर्देशीय क्षेत्रों में पंप करने के लिए तेजी से प्रयासरत है, लेकिन बुनियादी ढांचे की बाधाएं, ऊर्जा लागत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने इसकी व्यापकता को बुरी तरह सीमित कर दिया है.

एपी न्यूज एजेंसी के अनुसार ग्लोबल वाटर इंटेलिजेंस के कुलिनाने ने कहा, "वे पिछली गर्मियों में ही तेहरान खाली करने के बारे में सोच रहे थे. मैं यह कल्पना भी नहीं कर सकता कि निरंतर गोलीबारी, चल रहे आर्थिक संकट और गंभीर जल संकट के बीच इस गर्मी में स्थिति कैसी होगी."

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Last Updated : March 8, 2026 at 2:13 PM IST