ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार, संसद में गूंजे 'अमेरिका की मौत' के नारे
अमेरिकी विदेश विभाग- "राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खेल न खेलें. जब वे कहते हैं कि वे कुछ करेंगे, तो उनका मतलब वही होता है."


Published : January 11, 2026 at 4:25 PM IST
दुबई (संयुक्त अरब अमीरात): ईरान की शासन व्यवस्था को चुनौती देने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने रविवार को राजधानी तेहरान और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ बढ़ा दी. कार्यकर्ताओं के अनुसार, इन प्रदर्शनों को अब दो हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है और इस दौरान भड़की हिंसा में कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है.
ईरान में इंटरनेट बंद होने और फोन लाइनें कट जाने के कारण, विदेश से इन प्रदर्शनों की स्थिति का अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो गया है. अमेरिका स्थित 'ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी' (HRANA) के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अब तक 2,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.
इसी बीच, ईरान की संसद के अध्यक्ष कालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के अनुसार अमेरिका ने इस्लामिक रिपब्लिक (ईरान) पर हमला किया, तो अमेरिकी सेना और इजरायल "जायज निशाने" (Legitimate Targets) होंगे. उन्होंने यह धमकी तब दी जब सांसद संसद के मंच की ओर दौड़ पड़े और "अमेरिका की मौत!" के नारे लगाने लगे.
विदेशों में बैठे लोगों को डर है कि इंटरनेट और सूचनाओं पर पाबंदी से ईरान की सुरक्षा सेवाओं के कट्टरपंथियों को खूनी दमन करने का मौका मिल जाएगा. हालांकि ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की रक्षा के लिए ईरान पर हमला करने को तैयार हैं.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा कि "ईरान आजादी की ओर देख रहा है, जैसा शायद पहले कभी नहीं देखा. अमेरिका मदद के लिए तैयार है!!!" 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' और 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से शनिवार रात बताया कि ट्रंप को ईरान पर हमले के सैन्य विकल्प दिए गए हैं, लेकिन उन्होंने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है. वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने अलग से चेतावनी दी- "राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खेल न खेलें. जब वे कहते हैं कि वे कुछ करेंगे, तो उनका मतलब वही होता है."

संसद में प्रदर्शन
ईरानी सरकारी टेलीविजन ने संसद के सत्र का सीधा प्रसारण किया. कट्टरपंथी नेता और पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार कालिबाफ ने अपने भाषण में पुलिस और ईरान के अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' की जमकर सराहना की. उन्होंने विशेष रूप से स्वयंसेवक बल 'बासिज' (Basij) की तारीफ करते हुए कहा कि वे विरोध प्रदर्शनों के दौरान "मजबूती से खड़े" रहे.
कालिबाफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "ईरान के लोगों को पता होना चाहिए कि हम उनके (प्रदर्शनकारियों) साथ सबसे सख्त तरीके से निपटेंगे और गिरफ्तार किए गए लोगों को कड़ी सजा देंगे." उन्होंने आगे सीधे तौर पर इजरायल (जिसे उन्होंने 'कब्जे वाला क्षेत्र' कहा) और अमेरिकी सेना को धमकी दी, जिसमें संभावित रूप से 'प्री-एम्पटिव स्ट्राइक' (बचाव में पहले हमला करना) की चेतावनी भी शामिल थी.
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान हमला करने को लेकर कितना गंभीर है, खासकर जून 2025 में इजरायल के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध के दौरान अपनी हवाई रक्षा प्रणालियों के तबाह होने के बाद. युद्ध से जुड़ा कोई भी अंतिम फैसला ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के हाथों में होगा.
मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह "अपनी सेना, अपने साझेदारों, सहयोगियों और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए पूरी युद्धक क्षमता और सुरक्षा घेरे के साथ तैयार है." गौरतलब है कि ईरान ने पिछले साल जून में कतर स्थित अल उदेद एयर बेस पर अमेरिकी सेना को निशाना बनाया था, जबकि अमेरिकी नौसेना का मध्य पूर्व स्थित 5वां बेड़ा (5th Fleet) बहरीन के द्वीप साम्राज्य में तैनात है.
इस बीच, एक इजरायली अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच की स्थिति पर "करीबी नजर" रखे हुए है. अधिकारी ने आगे कहा कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रात में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ ईरान सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत की है.
तेहरान और मशहद में विरोध प्रदर्शन
ईरान से बाहर भेजे गए ऑनलाइन वीडियो, जिनमें संभवतः स्टारलिंक सैटेलाइट ट्रांसमीटर का उपयोग किया गया है, कथित तौर पर उत्तरी तेहरान के पूनक इलाके में प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होते हुए दिखा रहे हैं. वहां ऐसा प्रतीत हुआ कि अधिकारियों ने सड़कें बंद कर दी थीं, जबकि प्रदर्शनकारी अपने मोबाइल फोन की लाइट जलाकर लहरा रहे थे. कुछ लोग धातु (बर्तन या अन्य चीजें) पीट रहे थे और उसी दौरान पटाखे भी फोड़े गए. अन्य वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारी कथित तौर पर सड़क पर शांतिपूर्ण मार्च निकालते हुए और अपनी कारों के हॉर्न बजाते हुए दिखाई दे रहे हैं.
'ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी' (HRANA) ने कहा, "राजधानी में विरोध प्रदर्शनों का स्वरूप बड़े पैमाने पर बिखरा हुआ, कम समय के लिए और अस्थिर रहा है. सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी और बढ़ते जमीनी दबाव के जवाब में प्रदर्शनकारियों ने यह तरीका अपनाया है."
एजेंसी ने आगे बताया, "साथ ही, विरोध स्थलों के ऊपर निगरानी करने वाले ड्रोन उड़ने और सुरक्षा बलों की आवाजाही की खबरें मिली हैं, जो यह दर्शाती हैं कि प्रदर्शनों पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है."
तेहरान से लगभग 725 किलोमीटर पूर्वोत्तर में स्थित ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद से आए वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारी कथित तौर पर सुरक्षा बलों का सामना करते नजर आए. सड़कों पर जलता हुआ मलबा और कूड़ेदान देखे गए, जिनसे रास्ता रोका गया था. मशहद में इमाम रजा की दरगाह है, जो शिया इस्लाम में सबसे पवित्र मानी जाती है, इसलिए वहां हो रहे प्रदर्शन ईरान की धार्मिक शासन व्यवस्था के लिए बहुत गहरा महत्व रखते हैं.
प्रदर्शन तेहरान से 800 किलोमीटर दूर केरमान में भी होते दिखे. रविवार सुबह ईरानी सरकारी टेलीविजन ने प्रदर्शनकारियों जैसा ही तरीका अपनाते हुए अपने संवाददाताओं को कई शहरों की सड़कों पर भेजा, ताकि वहां शांति दिखाई जा सके और स्क्रीन पर तारीख भी दिखाई गई. हालांकि, इसमें तेहरान और मशहद को शामिल नहीं किया गया. उन्होंने कोम और कज़्विन में सरकार के समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों को भी दिखाया.
अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद खामेनेई ने आने वाले समय में सख्त दमन के संकेत दिए हैं. तेहरान ने शनिवार को अपनी धमकियां और तेज कर दीं, जिसमें ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति को "ईश्वर का शत्रु" (Enemy of God) माना जाएगा, जो कि मृत्युदंड के दायरे में आने वाला अपराध है. सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में कहा गया कि "उपद्रवियों की मदद" करने वालों पर भी यही आरोप लगाया जाएगा.
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी, जिन्होंने गुरुवार और शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था, ने अपने ताजा संदेश में प्रदर्शनकारियों से शनिवार और रविवार को भी सड़कों पर उतरने को कहा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से ईरान का पुराना 'शेर और सूरज' वाला झंडा और शाह के समय के अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों को साथ लाने का आग्रह किया ताकि वे "सार्वजनिक स्थानों पर अपना अधिकार जता सकें."
इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरानी मुद्रा 'रियाल' के मूल्य में भारी गिरावट के कारण हुई थी. वर्तमान में एक डॉलर की कीमत 14 लाख रियाल से भी ज्यादा हो गई है, क्योंकि परमाणु कार्यक्रम के कारण लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह तोड़ दिया है. अब ये विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए हैं और सीधे तौर पर ईरान की धार्मिक शासन व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं.
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