ईरान में विरोध प्रदर्शन, अमेरिका ने दी चेतावनी, खामेनेई भड़के
कभी ईरान, अमेरिका से खरीदता था हथियार. लेकिन 1979 की क्रांति ने बदल दिया सबकुछ.

Published : January 5, 2026 at 5:40 PM IST
नई दिल्ली : ईरान में सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारियों में छात्र भी शामिल हैं. वे बढ़ती महंगाई को लेकर सड़कों पर उतरे हैं. पिछले कुछ दिनों में ईरान में 40 फीसदी तक महंगाई दर बढ़ चुकी है. खाने पीने की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं. ईरानी मुद्रा रियाल लगातार गिर रहा है. एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14.2 लाख रियाल के भाव आ चुके हैं.
ईरान ने अपनी राष्ट्रीय सब्सिडी वाली गैसोलीन के लिए एक नया प्राइसिंग टियर पेश किया है. यानी उनके भी दाम बढ़ेंगे. इसको लेकर लोगों में भारी नाराजगी है. नई नीति के तहत सरकार प्रत्येक तीन महीने में कीमतों की समीक्षा करेगी. विरोध की शुरुआत छोटे व्यवसासियों से हुई थी. लेकिन धीरे-धीरे इसमें आम लोग और यूनिवर्सिटी के छात्र भी जुड़ते चले गए. प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं. उन्होंने "तानाशाह मुर्दाबाद" जैसे विरोधी नारे भी लगाए. सरकार ने विरोध प्रदर्शन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. इस दौरान 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन प्रदर्शन थमा नहीं है.

अमेरिका की ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि ईरान के 31 में से 26 प्रांतों में 220 से ज्यादा जगहों पर प्रदर्शन हुए हैं. उनके अनुसार सरकार की जवाबी कार्रवाई में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं, जबकि 990 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस एजेंसी का दावा है कि ईरान के एक्टिविस्ट ने उन्हें ये खबर दी है.
ईरान के हालात पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "हम इस पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं. अगर वे पहले की तरह लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो मुझे लगता है कि अमेरिका उन्हें बहुत जोरदार जवाब देगा."
ट्रंप के इस जवाब पर ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता खामेनेई ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि सारे आरोप झूठे हैं. ईरान की ओर से दी गई प्रतिक्रिया में बताया गया है कि अगर अमेरिका ने कोई भी कार्रवाई की तो मध्य पूर्व में तैनात उनके सैनिकों को भी खतरा हो सकता है. खुमैनी ने इजराइल और अमेरिका दोनों को इस विरोध प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि, जो भी दंगाई सड़कों पर मौजूद हैं, उन्हें उनकी सही जगह दिखाई जानी जरूरी है.
ईरान और अमेरिका के बीच क्यों बिगड़े संबंध, कभी अमेरिका से हथियार खरीदता था ईरान
दशकों पहले ईरान और अमेरिका के बीच काफी मधुर संबंध थे. ईरान में तब शाह मोहम्मद रजा पहलवी का शासन हुआ करता था. वे अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों में से एक माने जाते थे. ईरान अमेरिका से हथियार खरीदता था. वहां पर सीआईए की तकनीकी टीम मौजूद होती थी. वह पड़ोसी देश सोवियत संघ पर नजर बनाए रखने का काम किया करती थी. शाह की ताजपोशी में सीआईए की बड़ी भूमिका थी. उसने ही 1953 में तख्तापलट के दौरान शाह की मदद की थी.

लेकिन जनवरी 1979 में शाह बीमार पड़ गए. वो कैंसर से ग्रस्त थे. उनके खिलाफ ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुका था. शाह वहां से भाग गए. प्रदर्शन का नेतृत्व अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के पास था. शाह के भाग जाने के बाद खोमैनी ने ईरान में इस्लाम धर्म (शिया) के आधार पर चलने वाली (थियोक्रेटिक) सरकार बनाई. वह व्यवस्था अभी तक कायम है. विरोध प्रदर्शन के दौरान करीब बीस लाख लोग शाह के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए शाहयाद चौक में जमा हुए थे. लेकिन सेना ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था.
1979 में ही विश्वविद्यालयों के छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया. वे उनसे शाह के प्रत्यर्पण की मांग करने लगे. इसके लिए प्रदर्शनकारियों ने 444 दिनों तक अमेरिकी राजनयिकों को बंधक बनाकर रखा. इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच आपसी संबंधों की दूरी बढ़ा दी. दोनों देशों के बीच राजनियक संबंध टूट गए.
यही वजह थी कि अस्सी के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान अमेरिका ने इराक का साथ दिया. दोनों देशों के संघर्ष के दौरान टैंकर वॉर के हिस्से के तौर पर अमेरिका ने एक ही दिन में ईरान के समुद्री एरिया में उसे लगभग पंगु बना दिया था. ईरान के एक कॉमर्शियल एयरलाइन को गिरा दिया गया. बाद में अमेरिका ने कहा कि यह उसकी गलती थी.
उसके बाद से ईरान और अमेरिका के बीच कभी दुश्मनी तो कभी मजबूरी वाली डिप्लोमेसी चलती रही है. हालांकि, 2015 में ईरान और अमेरिका के बीच संबंध थोड़े ठीक हुए. दोनों के बीच न्यूक्लियर डील पर बातचीत होने लगी. बदले में अमेरिका, ईरान पर से प्रतिबंधों को कम करने के लिए तैयार था. लेकिन 2018 में ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनते ही संबंध फिर से खराब हो गए. ट्रंप ने ईरान के साथ एकतरफा संबंध तोड़ लिया.
इसके बाद सात अक्टूबर 2023 को इजराइल में जो घटना घटी, जिस तरीके से हमास ने हमला किया, उसने संबंधों को और भी अधिक खराब कर दिया. हमास की घटना के बाद 2025 में जो कुछ हुआ, वह तो दुनिया के सामने है. अमेरिकी बम वर्षक विमान ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला कर दिया.
हालांकि, परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि उसका इरादा परमाणु बम बनाने का नहीं है. वह शांतिपूर्वक कार्यक्रम को जारी रखना चाहता है. लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसी का दावा है कि ईरान लगातार यूरेनियम एनरिचिंग प्रोग्राम को बढ़ा रहा है, और यह बम बनाने के काफी करीब है. इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने भी अपनी रिपोर्ट में बता दिया कि ईरान 10 परमाणु बम बनाने की क्षमता रखता है.

ईरान के सहयोगी भी कम हो चुके हैं. इजराइल के साथ युद्ध के बाद हमास कमजोर हो चुका है. बशर अल असद को सीरिया से हटाया जा चुका है. ऐसे में ईरान पूरे इलाके में अलग-अलग पड़ गया है. चीन ईरान से कच्चा तेल खरीदता है और रूस ईरान से ड्रोन की खरीदारी करता है, फिर भी इन दोनों देशों ने भी ईरान को सैन्य मदद उपलब्ध नहीं करवाई.
ईरान में सत्ता के खिलाफ कब-कब उठी आवाजें, एक नजर
1999 छात्र विरोध प्रदर्शन
ईरान में एक के बाद एक होने वाली हत्याओं (जिनमें एक्टिविस्ट, बुद्धिजीवियों और अन्य लोग शामिल थे) से परेशान होकर तेहरान यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसे "चेन मर्डर" कहा गया. विरोध के स्वर को दबाने के लिए सरकार ने एक्शन लिया. छात्रों के प्रदर्शन को जबरन दबा दिया गया. 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि तीन छात्रों की मौत हो गई.
2009 ग्रीन मूवमेंट विरोध प्रदर्शन
2009 में अहमदीनेजाद दोबारा से ईरान के राष्ट्रपति चुने गए. सुधारवादी विपक्ष ने इस चुनाव में धांधली के आरोप लगाए. उन्होंने प्रेसिडेंट अहमदीनेजाद के खिलाफ आवाज बुलंद की. लेकिन सरकार एक बार फिर से उन पर टूट पड़ी. इस प्रदर्शन को ग्रीन मूवमेंट नाम दिया गया था. सरकार के एक्शन के चलते कई लोग मारे गए.
2017-2018 के प्रदर्शन
खाने की बढ़ती कीमतों और गरीब ईरानियों के लिए कैश मदद में कटौती करने की सरकारी योजनाओं को लेकर गुस्सा भड़का. प्रदर्शनकारी बेकाबू हो गए. पुलिस की कार्रवाई में 20 से ज्यादा लोग मारे गए और सैकड़ों गिरफ्तार हुए.
2019 गैसोलीन विरोध प्रदर्शन
ईरान की सरकार ने सब्सिडी वाली गैसोलीन की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए और गैस स्टेशन, बैंक और स्टोर जला दिए गए. रिपोर्ट के अनुसार 300 से अधिक लोग मारे गए और अधिकारियों ने देश में इंटरनेट बंद कर दिया.
2022 महसा अमिनी विरोध प्रदर्शन
सितंबर 2022 में 22 साल की अमिनी की मौत के तुरंत बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. उन्हें देश की मोरालिटी पुलिस ने कथित तौर पर अधिकारियों की पसंद के हिसाब से हिजाब या सिर पर स्कार्फ नहीं पहनने के आरोप में गिरफ्तार किया था. संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने आखिरकार ईरान को उनकी मौत की वजह बनी "शारीरिक हिंसा" के लिए ज़िम्मेदार ठहराया. महीनों तक चले सुरक्षा अभियान में 500 से ज़्यादा लोग मारे गए और 22,000 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया.
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