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ईरान : अली खामेनेई के बाद अलीरेजा अराफी को मिली अंतरिम कमान

अराफी ईरान के नए सर्वोच्च धार्मिक नेता बनेंगे. उन्हें अंतरिम रूप से कमान सौंपी गई है.

Arafi
अयातुल्ला अलीरेजा अराफी (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 1, 2026 at 5:04 PM IST

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तेहरान : अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अंतरिम कमान सौंपी है. अराफी को ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद के न्यायविद सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है. यह विशेषज्ञों की सभा द्वारा स्थायी उत्तराधिकारी चुने जाने तक सर्वोच्च नेता की भूमिका निभाने के लिए गठित निकाय है.

परिषद के प्रवक्ता मोहसेन देहनावी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट काउंसिल ने अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद के सदस्य के रूप में चुना है." खामेनेई की मौत के बाद अंतरिम लीडरशिप काउंसिल बनाई जा रही है. इस परिषद में राष्ट्रपति, न्यायपालिका के प्रमुख और गार्डियन काउंसिल से चुना गया एक जुरिस्ट सदस्य होंगे.

बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, "यदि सर्वोच्च नेता की मृत्यु हो जाए, इस्तीफा दे दें या उन्हें पद से हटा दिया जाए, तो देश के राष्ट्रपति, न्यायपालिका के प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक सदस्य सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियां संभालते हैं."

अयातुल्ला अलीरेजा अराफी अब राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और मुख्य न्यायाधीश गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई के साथ इस्लामी गणराज्य का सह-शासन कर रहे हैं. यह अधिकार पहले केवल अयातुल्ला खामेनेई के पास था.

अराफी तकनीकी रूप से तीन सदस्यों में से एक हैं. लेकिन, एक ऐसे शासन में जहां सर्वोच्च नेता के रूप में केवल धर्मगुरुओं का ही शासन रहा है, एक धर्मगुरु होने के नाते, वे वास्तव में सबसे वरिष्ठ सदस्य बन जाते हैं. ईरान के मध्य प्रांत यज्द के ऐतिहासिक शहर मेयबोद में 1959 में जन्मे अराफी धार्मिक परिवार से आते हैं.

उन्होंने 1969 से अपनी धार्मिक शिक्षा यात्रा की शुरुआत की थी. वे अपने पिता के मार्गदर्शन में आगे बढ़ते रहे. 1989 में खामेनेई के सर्वोच्च नेता बनने के बाद उनका नाम प्रमुखता से उभरने लगा और उन्हें पहली बार 1992 में उनके गृहनगर मेयबोद में शुक्रवार की नमाज में नियुक्त किया गया. उस समय उनकी आयु 33 वर्ष थी, जो इस तरह की नियुक्ति के लिए कम उम्र थी और खामेनेई के उन पर विश्वास का स्पष्ट संकेत था.

खामेनेई की अराफी को वरिष्ठ और रणनीतिक रूप से संवेदनशील पदों पर नियुक्त करने की तत्परता ने "उनकी प्रशासनिक क्षमताओं पर अटूट विश्वास" दिखाया.

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