विश्व विटिलिगो दिवस: पीजीआई में इलाज संभव, प्रो. डॉ. दविंदर प्रसाद बोले-: "सफेद दाग से डरें नहीं, समय पर इलाज कराएं"
विश्व विटिलिगो दिवस पर पीजीआई विशेषज्ञ से ईटीवी भारत ने बातचीत की. विशेषज्ञ ने जानकारी दी कि सफेद दाग का समय पर इलाज जरूरी है.

Published : June 25, 2026 at 12:08 PM IST
चंडीगढ़: आज विश्व विटिलिगो दिवस है. इस मौके पर ईटीवी भारत ने चंडीगढ़ पीजीआई के त्वचा रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. दविंदर प्रसाद से बातचीत की. बातचीत के दौरान प्रोफेसर ने सफेद दाग को लेकर भेदभाव और समय पर उपचार सहित कई जानकारियां दी. प्रोफेसर प्रसाद ने कहा कि, ""विटिलिगो यानी सफेद दाग को लेकर समाज में आज भी कई गलत धारणाएं हैं. लोग इसे छूत की बीमारी समझ लेते हैं, जबकि इसका संक्रमण से कोई संबंध नहीं है. लोगों को सही जानकारी देना और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना बेहद जरूरी है. जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पीजीआई में चार दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है."
"यह त्वचा नहीं, आत्मविश्वास से जुड़ा रोग": प्रो. डॉ. दविंदर प्रसाद ने आगे कहा कि, "विटिलिगो को केवल त्वचा की बीमारी मानना गलत है. इसका असर मरीज के आत्मविश्वास, सामाजिक जीवन और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है. कई मरीज सामाजिक भेदभाव और मानसिक दबाव का सामना करते हैं. इसलिए इलाज के साथ समाज की सकारात्मक सोच भी उतनी ही जरूरी है." उन्होंने कहा कि परिवार और समाज का सहयोग मरीजों के आत्मविश्वास को मजबूत करता है.
विटिलिगो के लक्षणों को नजरअंदाज न करें: डॉ. प्रसाद ने बताया कि, "त्वचा पर सफेद या हल्के रंग के धब्बे दिखाई देना, उनका धीरे-धीरे बढ़ना, बाल, दाढ़ी, भौंह या पलकों का समय से पहले सफेद होना, होंठों या मुंह के अंदर रंग हल्का पड़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं. कुछ मामलों में आंखों की रेटिना के रंग में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. ऐसे किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना चाहिए."
"हर मरीज का इलाज अलग तरीके से होता है तय": उपचार को लेकर प्रो. डॉ. दविंदर प्रसाद ने बताया कि, "विटिलिगो का इलाज मरीज की उम्र, बीमारी की अवस्था और प्रभावित हिस्से के आधार पर तय किया जाता है. शुरुआती चरण में दवाइयों और विशेष क्रीम से उपचार किया जाता है. जरूरत पड़ने पर फोटोथेरेपी, एक्साइमर लेजर थेरेपी और बीमारी स्थिर होने पर स्किन ग्राफ्टिंग जैसी सर्जिकल तकनीकों का भी सहारा लिया जाता है. समय पर इलाज शुरू होने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है."
मानसिक सहयोग भी इलाज का अहम हिस्सा: प्रो. डॉ. प्रसाद ने कहा कि, "कई मरीज सामाजिक भेदभाव और आत्मविश्वास की कमी से जूझते हैं. ऐसे में केवल दवा ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक परामर्श और परिवार का सहयोग भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है. सफेद दाग किसी व्यक्ति की पहचान नहीं, बल्कि एक मेडिकल स्थिति है, जिसे समझने और स्वीकार करने की जरूरत है."
दुनिया की दो प्रतिशत आबादी प्रभावित: प्रो. डॉ. दविंदर प्रसाद ने बताया कि, "दुनिया की लगभग दो प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में विटिलिगो से प्रभावित है. यह बीमारी जानलेवा नहीं है और न ही छूने से फैलती है, लेकिन गलत धारणाओं के कारण मरीजों को सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. जागरूकता बढ़ाकर इस भेदभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है."
पीजीआई में चार दिवसीय विशेष कार्यक्रम: वहीं, विश्व विटिलिगो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रो. डॉ. दविंदर प्रसाद ने कहा कि, "25 जून को मरीजों के लिए विशेष संवाद सत्र रखा गया है, जिसमें वे अपने अनुभव साझा करेंगे और विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछ सकेंगे. इसी दिन "Celebration of Confidence" नाम से फैशन शो भी आयोजित होगा, जिसमें विटिलिगो से प्रभावित लोग रैंप पर उतरेंगे. 25 और 26 जून को डॉक्टरों के लिए आधुनिक विटिलिगो सर्जरी पर कार्यशाला होगी, जबकि 27 और 28 जून को वैज्ञानिक सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञ नवीन शोध और उपचार पद्धतियों पर चर्चा करेंगे."
विटिलिगो के प्रमुख लक्षण:
- त्वचा पर सफेद या हल्के रंग के धब्बे दिखाई देना.
- धब्बों का धीरे-धीरे आकार बढ़ना.
- बाल, दाढ़ी, भौंह या पलकों का समय से पहले सफेद होना.
- होंठों, मुंह के अंदर या शरीर के अन्य हिस्सों का रंग हल्का पड़ना.
- कुछ मामलों में आंखों की रेटिना के रंग में भी बदलाव आ सकता है.
विटिलिगो का उपचार:
- विशेषज्ञों के अनुसार विटिलिगो का इलाज मरीज की उम्र, बीमारी की स्थिति और प्रभावित हिस्से के आधार पर तय किया जाता है.
- दवाइयां और क्रीम: शुरुआती चरण में डॉक्टर विशेष क्रीम और दवाइयों की सलाह देते हैं.
- फोटोथेरेपी (Light Therapy): अल्ट्रावायलेट किरणों की मदद से त्वचा में रंग वापस लाने का प्रयास किया जाता है.
- सर्जिकल उपचार: जिन मरीजों में बीमारी स्थिर हो चुकी हो, उनमें स्किन ग्राफ्टिंग या अन्य सर्जिकल तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है.
- एक्साइमर लेजर थेरेपी: छोटे प्रभावित क्षेत्रों में यह उपचार प्रभावी माना जाता है.
- काउंसलिंग और मानसिक सहयोग: सामाजिक भेदभाव और आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए मनोवैज्ञानिक सहयोग भी महत्वपूर्ण है.
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