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मल त्यागने की प्रक्रिया को कंट्रोल क्यों नहीं कर पाते हैं डायबिटीज के मरीज? जानिए क्या है Diabetic ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी?

सीनियर डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कोविल ETV भारत को डायबिटिक ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी के बारे में विस्तार से बता रहे हैं, जिसकी वजह से डायबिटीज के मरीजों...

Why are diabetic patients unable to control the process of passing stool? Find out what diabetic autonomic neuropathy is.
मल त्यागने की प्रक्रिया को कंट्रोल क्यों नहीं कर पाते हैं डायबिटीज के मरीज? (GETTY IMAGES)
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By ETV Bharat Health Team

Published : September 1, 2026 at 7:52 PM IST

6 Min Read
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ज्यादातर लोग डायबिटीज को एक ऐसी बीमारी मानते हैं जिससे दिल, किडनी, आंखों या पैरों पर बुरा असर पड़ सकता है. हालांकि, एक कम जानी-मानी समस्या है आंतों से जुड़ी गड़बड़ी, खासकर, एनल इनकंटीनेंस (मल त्यागने की प्रक्रिया पर कंट्रोल न रहना). जहां डायबिटीज के मरीज अक्सर अपने दिल, किडनी और आंखों की सुरक्षा पर बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन आंतों से जुड़ी समस्याएं और एनल इनकंटीनेंस (मल पर नियंत्रण खोना) एक ऐसी गंभीर समस्या है, जिस पर लोक-लाज या शर्म के कारण बात नहीं की जाती है.

जैंड्रा हेल्थकेयर में डायबिटीज और मोटापा विशेषज्ञ डॉ. राजीव कोविल बताते हैं कि डायबिटीज के कारण आंतों की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी और एनल इनकंटीनेंस हो सकता है. कई मरीज शर्म के कारण चुपचाप तकलीफ सहते रहते हैं और सोचते हैं कि ये समस्याएं उम्र बढ़ने का ही एक हिस्सा हैं. असल में, हाई ब्लड शुगर उन नसों को कमजोर कर देता है जो आंतों को कंट्रोल करती हैं, जिससे यह स्थिति पैदा होती है. इस रिपोर्ट में इस मुद्दे के बारे में विस्तार से जानें...

डायबिटिक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी
लंबे समय तक डायबिटीज (हाई ब्लड शुगर) रहने से पूरे शरीर में नसों को नुकसान पहुंच सकता है. ज्यादातर लोग पेरिफेरल न्यूरोपैथी के बारे में जानते हैं जो पैरों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन डायबिटीज ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जो आंतों की गति, ब्लैडर के काम, दिल की धड़कन और पाचन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है. इस स्थिति को डायबिटिक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी कहा जाता है.

डायबिटिक ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी के कारण
डॉ. कोविल बताते हैं कि सामान्य रूप से मल त्याग पर नियंत्रण के लिए मलाशय (रेक्टम), एनल स्फिंक्टर, पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों और मस्तिष्क के बीच सही तालमेल जरूरी है. जिन मरीजों की ऑटोनॉमिक नसें डैमेज हो जाती हैं, उनमें मलाशय के भरने का एहसास कम हो जाता है, मल होने का पता देर से चलता है, स्फिंक्टर की ताकत कम हो जाती है और मल त्याग के समय तालमेल बिगड़ जाता है. इसके कारण अचानक मल त्याग की तेज इच्छा हो सकती है, मल का रिसाव हो सकता है या मल त्याग पर से पूरी तरह नियंत्रण खत्म हो सकता है.

डायबिटिक ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी की एक और आम समस्या है. लगातार दस्त (क्रोनिक डायरिया), जो एनल इनकॉन्टिनेंस (मल पर नियंत्रण न रह पाना) की समस्या को और बढ़ा देती है. कुल मिलाकर, ये समस्याएं जीवन की गुणवत्ता पर गहरा असर डालती हैं, जिससे एंग्जायटी (बेचैनी), लोगों से कटकर रहना, डिप्रेशन और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं.

जरूरी बात यह है कि फीकल इनकॉन्टिनेंस को सिर्फ पेट से जुड़ी समस्या के बजाय ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम की बड़ी खराबी का संकेत मानना ​​चाहिए. पेट के लक्षण अक्सर ब्लैडर की खराबी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, असामान्य पसीना आना, खड़े होने पर चक्कर आना और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मोटिलिटी डिसऑर्डर के साथ होते हैं. इन जुड़े लक्षणों को पहचानने से डॉक्टरों को ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम की खराबी का शुरुआती स्टेज में पता लगाने में मदद मिलती है.

इसे मैनेज करने के टिप्स
इसके मैनेजमेंट के लिए एक व्यापक तरीका अपनाना जरूरी है. डॉ. कोविल का कहना है कि नसों को और ज्यादा नुकसान से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है कि ग्लूकोज को सही ढंग से कंट्रोल करके ब्लड शुगर को स्थिर रखा जाए. खान-पान में बदलाव, पेट साफ रखने और पर्याप्त फाइबर लेने, शरीर में पानी की सही मात्रा बनाए रखने और दस्त का इलाज करने जैसे शुरुआती कदम बहुत जरूरी हैं.

पेल्विक फ्लोर रिहैबिलिटेशन भी बहुत जरूरी है. पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने और स्फिंक्टर की ताकत व बाउल कंट्रोल को बेहतर बनाने के लिए कीगल एक्सरसाइज की जाती हैं. हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (HIFEM) थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से इलाज के तरीके और बेहतर हुए हैं. इस थेरेपी के एक ही सेशन में हजारों सुप्रा-मैक्सिमल पेल्विक फ्लोर कॉन्ट्रैक्शन (मांसपेशियों का सिकुड़ना) हो सकते हैं. ये कॉन्ट्रैक्शन (जिन्हें अपनी मर्जी से नहीं किया जा सकता) पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करते हैं, जिससे सर्जरी या दवा के बिना बाउल और ब्लैडर पर कंट्रोल बेहतर होता है.

डॉ. कोविल का कहना है कि मरीजों को यह समझना चाहिए कि मल-मूत्र का रिसाव बुढ़ापे का हिस्सा नहीं है. यह डायबिटीज की एक उपचार योग्य जटिलता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि चिकित्सकीय रूप से इसका इलाज किया जाना चाहिए.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक शोध, अध्ययनों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान कर रहे हैं. इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सर्वोत्तम होगा.)

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