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डायबिटीज और राइस की क्या है सच्चाई , एक्सपर्ट से जानिए शुगर कंट्रोल के उपाय

डायबिटीज की बीमारी पूरे देश में चिंता का विषय बनी हुई है.शुगर पेशेंट बीमारी में क्या करें और क्या नहीं देखिए भूपेंद्र दुबे की रिपोर्ट.

rice not increase diabetes
चावल खाने से नहीं बढ़ता है शुगर (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : April 30, 2026 at 7:19 AM IST

16 Min Read
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रायपुर : डायबिटीज या शुगर वैश्विक महामारी के तौर पर फैल रहा है. इसका असर अब शहर और गांव में कोई अंतर नहीं रख रहा. बात छत्तीसगढ़ राज्य की करें तो यहां शुगर के मरीजों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है. प्रदेश में जिन चीजों पर ज्यादा चर्चा होती है उनमें मिथक है कि चावल खाने से शुगर बढ़ता है. छत्तीसगढ़ की जो भौगोलिक संरचना है जिस तरीके का यहां का पानी है और जिस तरीके का यहां का तापमान है उसमें चावल खाने से क्या सचमुच शुगर बढ़ता है ये सच्चाई है या मिथक इस पर हम चर्चा करेंगे. एमडी मेडिसिन डॉक्टर सलीम केसर ने हमें ये बताया कि चावल खाने से शुगर बढ़ता है या नहीं.

'चावल खाने से शुगर नहीं बढ़ता यदि'

एमडी मेडिसिन और डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉक्टर सलीम केसर ने बताया कि सिर्फ चावल खाने से शुगर बढ़ता है ऐसा नहीं है.चावल सहित शुगर के जितने भी कॉम्पोनेंट्स हैं सबका अलग-अलग ग्लाइसेमिक वैल्यू है. जिसमें जो आपका सादा चावल है जिसको स्टीम राइस कहते हैं उसका ग्लाइसेमिक वैल्यू उतना ज्यादा नहीं होता है जितना आपका फ्राइड राइस का या पुलाव या बिरयानी का होता है. क्योंकि इसमें तेल मिल जाता है, घी मिल जाता है. वैसे ही सादी रोटी या फुल्का उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स थोड़ा सा कम होता है. आप उसका जैसे ही प्रिपरेशन थोड़ा सा बदल देते हैं रोटी घी वाली या फिर पराठा बना देते हो तो उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स और उसकी जो कैलोरी वैल्यू है वो और ज्यादा बढ़ जाती है. तो कुल मिलाकर इन सब चीजों के अलावा इसके साथ में आपका सब्जी का कटोरा कितना बड़ा है वो इस बात को डिसाइड करता है जो कैलोरी की वैल्यू के हिसाब से आपकी शुगर बढ़ेगी या नहीं बढ़ेगी.

डायबिटीज पर डॉक्टर से चर्चा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)



सवाल- मैं फिर वहीं बात कहूंगा कि जो दिनचर्या है. छत्तीसगढ़ में चावल ज्यादा पैदा होता है. किसानों के पास जो ज्यादा होता है उसी से उनकी दिनचर्या चलती है. चावल ज्यादा है तो चावल खाएंगे. यह कितना इफेक्ट करता है. क्योंकि चावल के कई प्रारूप भी बदले जाते हैं. फ्राइड राइस हो गया है. दूसरी तरह की चीज हो गई तो यह कितना इंपैक्ट करता है.

जवाब- डायबिटीज स्पेशलिस्ट एमडी मेडिसिन डॉक्टर सलीम केसर ने बताया कि अगर आप ग्रामीण परिवेश में देखेंगे तो ग्रामीण मोस्ट ऑफ द टाइम सादा चावल ही खाते हैं तो उसमें मात्रा इंपॉर्टेंट है. आप कम मात्रा में खाओ या सीमित मात्रा में खाओ तो हो सकता है कि शुगर उनकी उतनी ना बढ़ें, लेकिन उनकी दिनचर्या में ऐसा है कि एक समय वह पूरा चावल खाते हैं जैसा मरीज बताते हैं. एक समय उनके यहां रोटी बनती है, एक समय सिर्फ चावल बनता है.इसीलिए अगर वह भरपेट खाना खाएगा तो निश्चित रूप से उसे डायबिटीज है तो उसके खाना खाने के 2 घंटे बाद शुगर तो बढ़ेगी. उसको यह बताना पड़ेगा कि उसे चावल के साथ में थोड़ा हरी सब्जी मिला ले या सब्जी का पोर्शन धीरे-धीरे बढ़ा दें तो पेट भरने के लिए तो चावल की मात्रा थोड़ी कम हो जाएगी.जिससे उसका डायबिटीज का कंट्रोल बेहतर हो जाएगा.

Sugar connection of rice and bread
चावल और रोटी का शुगर कनेक्शन (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

वहीं फलों को लेकर डॉक्टर सलीम केसर ने बताया कि जितने भी फल हैं उसमें सुक्रोज या ग्लूकोज नहीं होता, फलों में फ्रक्टोज होता है. फल भी उतने ही मीठे होते हैं और यह शुगर के लिए उतने ही हानिकारक होते हैं जितना एक नॉर्मल ग्लूकोज होता है. क्योंकि यह नेचुरल शुगर है तो नेचुरल तो फल को सीमित मात्रा में खाया जाए तो वह उतना ज्यादा नुकसानदेह नहीं होता. फल तो कोई भी मना नहीं है. हर फल का कुछ ना कुछ गुणकारी इफेक्ट आता है लेकिन इंपॉर्टेंट यही है कि फिर उसकी मात्रा कितनी है. जैसे अगर बहुत मीठा हो गया आपका अंगूर हो गए आपके आम हो गए तो ये जो फल हैं जो अत्यधिक मीठे हैं इनकी मात्रा सीमित होनी चाहिए. आपको एक सर्विंग के हिसाब से लेना चाहिए. तरबूज आप पूरा एक 100 की जगह 200 ,300 ग्राम भी अगर आप खा जाते हो तो उसमें उतना ज्यादा शुगर रहता नहीं है. खीरा है ककड़ी है पपीता है. पपीते में फिर वही है कि थोड़ा सा कच्चा हो थोड़ा सा पका हो तो उसमें थोड़ा सा शुगर की मात्रा पकाने के साथ-साथ थोड़ा सा वेरी करती है. तरबूज के मुकाबले खरबूज में ज्यादा कैलोरीज रहती है.

How to eat fruits for diabetic patients
शुगर पेशेंट फलों को कैसे खाएं (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

सवाल- छत्तीसगढ़ का जिस तरह का पर्यावरण है और जिस तरीके की भोजन शैली यहां के लोगों की है. शुगर को अगर हम मीठा से अलग जाकर के देखे तो क्या सचमुच ऐसी दिनचर्या से शुगर बढ़ जाएगा.

जवाब- डायबिटीज स्पेशलिस्ट एमडी मेडिसिन डॉक्टर सलीम केसर ने बताया कि एकदम यह बात साफ है कि अगर आप के डेली एक्सरसाइज या किसी भी प्रकार का परिश्रम आप कर रहे हो तो आपका शुगर कंट्रोल में रहेगा. जिस दिन आपने वह परिश्रम करना छोड़ दिया तो उस दिन आपको निश्चित रूप से शुगर की मात्रा बढ़ने लगेगी. परिश्रम बहुत जरूरी है. जिस भी तरीके में आप कर लें. चाहे मॉर्निंग वॉक कर लें, चाहे घर से खेतों की तरफ चले जाए या मंदिर चले जाएं या थोड़ा सा साइकिल चला लें. जिस हिसाब से शहरीकरण हो रहा है जो पैदल चल रहा था, वह साइकिल पर आ गया, साइकिल वाला स्कूटर पर आ गया, स्कूटर वाला कार में आ गया तो इनजनरल जो है पैदल चलना और परिश्रम थोड़ा सा कम हो गया है. लेकिन फिर भी जो किसान हैं उसे तो खेतों में पैदल ही चलना पड़ेगा तो उसको यह फायदेमंद चीज है. अगर वह दिन भर परिश्रम करता है तो उसकी शुगर कंट्रोल में रहती है जिस दिन वह परिश्रम करने अलावा सिर्फ काम करवाने लगता है काम नहीं करता सिर्फ काम करवाता है उस दिन उसकी शुगर फिर बढ़ने लगती है. क्योंकि भोजन तो वही कर रहा है जो सारे कर रहे हैं.

Make some changes in lifestyle
लाइफ स्टाइल में करें थोड़ा बदलाव (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

सवाल- छत्तीसगढ़ से जो मरीज आपके पास आते हैं प्राथमिक तौर पर अगर देखा जाए तो कौन-कौन से कारण बनते हैं जो शुगर बढ़ाता है. किन-किन कारणों को आप लोग जांच करते हैं कि यह कारण रहा होगा.

जवाब- डायबिटीज स्पेशलिस्ट एमडी मेडिसिन डॉक्टर सलीम केसर ने बताया कि देखिए सबसे पहले तो एक जेनेटिक फ्री डिशपोजीशन बोलते हैं. माता-पिता को भले ही उन लोग बहुत ज्यादा परिश्रम करते होंगे लेकिन शुगर की टेंडेंसी होगी तो वह अभी जिस हिसाब से प्रदूषण बढ़ रहा है और अलग चीज नई-नई पता चल रही है,जिसमें हर पांचवां आदमी जो है और डायबिटीज के लिए प्रो है. क्योंकि परिश्रम कम हो गया है. खान-पान बदल गया है. आपका जो चावल की किस्म है भोजन का प्रारूप है वो बदल गया है. इसलिए आप मान कर चलिए कि डायबिटीज तो ऑलमोस्ट महामारी जैसा रूप ले लिया है. इसमें लेकिन इसका मुख्य कारण यह है कि इंसान को अपना परिवेश बदलना पड़ेगा. बराबर टाइम पर उठेगा, It's all about discipline. अगर आप बराबर से अनुशासन में रहेंगे तो डायबिटीज की संभावना कम रहेगी या कंट्रोल में रहेगी और आप इससे बचे रहेंगे.

सवाल- एक बार जिसे शुगर हो गया तो क्या कोई उससे बाहर निकल सकता है. पूरा स्वस्थ हो सकता है.

जवाब- भारत में नहीं पूरे विश्व में अभी यही सबसे ज्यादा चर्चा चालू है कि क्या डायबिटीज जो है खत्म हो सकती है. तो बहुत सारे लोग आयुर्वेद और डाइट थेरेपी हर जगह जो है चर्चित विषय है इसमें एक बात एकदम क्लियर है कि डायबिटीज जो है वह रिमिशन में जा सकते हैं. रिमिशन का मतलब है कि आप जो है आपकी शुगर बिल्कुल कंट्रोल में रहेगी, लेकिन आप बोलोगे कि डायबिटीज की टेंडेंसी खत्म हो जाए और दोबारा आपके जो तीन बम हैं जैसे रसगुल्ला, गुलाब जामुन, जलेबी या जिसमें भी चाशनी बहती है, ये वाली चीज जब भी आप खाओगे तो फिर वो दोबारा ना बढ़े ऐसा संभव नहीं है. एक बार आपको जिन कारणों से डायबिटीज हुई थी, अगर आप उन कारणों या लाइफस्टाइल की ओर वापस चले गए तो वापस आप डायबिटिक हो सकते हैं. यदि आप बिल्कुल ही साधारण भोजन पर आ गए और आपने वह सारी चीजें हटा दी अपने जीवन शैली से जिसने आपको पहले डायबिटिक बनाया था तो आप जिंदगी भर ठीक रहेंगे.

sugar depends on what
शुगर होना या ना होना किन पर करता है निर्भर (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

सवाल- आपके पूरे व्यवस्था में कोई ऐसा व्यक्ति आया जिसे डायबिटीज को बिल्कुल ठीक कर दिया हो या इस स्थिति में लाकर रख दिया हो जिसकी आप चर्चा कर रहे हैं.

जवाब- डॉक्टर सलीम केसर ने बताया कि हां कुछ ऐसे लोग हैं जो बता रहे हैं कि हमने दवा टोटल बंद कर दिया है. खाने में बहुत सारी चीज बंद कर दी है. जैसा मैंने आपको पहले बताया कि फ्राइड राइस वाला चावल, मीठे वाली चीज टोटल बंद करके आप इसे कंट्रोल कर सकते हैं. देखिए एक बहुत अच्छी चीज हम लोग के परिवेश में यह है कि जितनी भी हरी चीज हैं, हरी सब्जियों से लेकर आप जितनी भी हरी वेजिटेबल्स आप ले लिजिए चाहे पत्तेदार सब बढ़िया हैं. लौकी हो, भिंडी हो, तोरई हो या फिर करेला हो यह सब एंटी डायबिटिक है. जितनी भी चीज हरी है ये सब एंटी डायबिटिक हैं. तो अगर आपका भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सीमित रहेगी तो निश्चित रूप से आप डायबिटीज रिमिशन में ले जा सकते हैं. अभी नार्मल परिवेश में आप मान कर चलिए कि आपने भोजन में 50% से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट रखते थे. किसी किसी की थाली में तो 70- 80% तक लोग कार्बोहाइड्रेट रखते हैं. जिसमें पोटैटो हैं बहुत सारी चीज है जिसमें कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में है. अब यह जो कार्बोहाइड्रेट है यह अल्टीमेटली तुरंत डाइजेस्ट होकर चर्बी में कन्वर्ट हो जाता है. जिसकी आपको जरूरत नहीं है. उतना कार्बोहाइड्रेट आप जितनी जरूरत है आप उसे पचा लेते हो. जितना कार्बोहाइड्रेट आपको जरूरत नहीं है. 2 घंटे 3 घंटे में फिर वह जो है आपका चर्बी में कन्वर्ट हो जाता है. क्योंकि बॉडी का तो काम है जो इमरजेंसी के लिए स्टोर करके रखना है तो कार्बोहाइड्रेट नेगेटिव कैलोरी बैलेंस में जाते जाओगे. धीरे-धीरे आपके डायबिटीज एडमिशन में चली जाएगी. अपने भारत के तो सारे धर्म में फास्टिंग यानी आप व्रत रखते हो या फास्टिंग करते हो तो आपकी इन्सुलिन सेंसटिविटी बढ़ जाती है. इसका मुख्य कारण जो टाइप टू डायबिटीज है उसका तो मुख्य कारण आपका इन्सुलिन रेजिस्टेंस है.अपना वजन कम कर लें वापस नॉर्मल आइडियल बॉडी वेट पर आ जाए रेगुलर अनुशासन में रहो और भोजन बराबर अनुशासन ढंग से करो तो इसे नियंत्रित रखा जा सकता है.

सवाल - जिस तरह की वनोपज यहां पर हैं वह भी हमारे दिनचर्या का हिस्सा होते हैं. कई फल भी ऐसे हैं जैसे महुआ की बात होती है. उसका भी बहुत सारा व्यंजन बनता है.छत्तीसगढ़ का जो पारंपरिक भोजन है वह चावल पर आधारित है, चावल हो या फिर पूए जो बनते हैं बहुत सारी चीज निर्भर करती है. सर यह कितना बड़ा कारण बनते हैं.


जवाब- चावल से आपने जब व्यंजन बनाएं तो व्यंजन बनाने के लिए अपने किन चीजों का प्रयोग किया है वह तय करता है. जब तक वह चावल है तब तक तो वह चावल जैसे ही बिहेव करेगा. जैसे उसमें किसी किस्म की मिठास आ गई या किसी किस्म का तेल आ गया, जब आप इसमें चीज ऐड करने लगते हो तो धीरे-धीरे उसकी कैलोरी वैल्यू बढ़ती चली जाती है. आप अगर व्यंजन बना रहे हैं उस व्यंजन में अगर आपने किसी भी प्रकार से फैट ऐड किया है या अपने मीठा अलग से ऐड किया है तो फिर वह चावल कहां रहा,फिर तो वह व्यंजन हो गया. अगर आप उसको प्रॉपर्ली स्टडी करके देखेंगे और बहुतायत में नहीं खाएंगे. हर चीज मॉडरेशन में रहेंगे. हर चीज में अनुशासन जरूरी है तो आप अपनी थाली सजा लीजिए. और थाली में कटोरिया भी रख लीजिए तो उसे कटोरी में आप कुछ पसंद की चीज रख लीजिए जिसका हो सकता है कि कैलोरिक वैल्यू है. डायबिटीज में सारा काम इसी बात पर निर्भर है कि आप अपना हाथ कहां पर रोकते हैं. जीभ को आप कितना कन्ट्रोल करते हैं क्योंकि सारा खेल तो जीभ का है. यहां तक ही स्वाद है इसके आगे जाने पर तो यही देखा जाएगा शरीर उसको कैसे रखेगा. शरीर ये देखेगा कि कितना फायदे की चीज है कितना नुकसान का.

diabetes in children
बच्चों में शुगर की बीमारी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

सवाल : सर यह एक चिंता का विषय कहा जा सकता है कि बच्चे डॉयबिटीज की बीमारी के शिकार हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ में बहुत सारे केसेस आ रहे हैं. नंबर कितना है ये तो नहीं कहा जा सकता. लेकिन अगर आंखों के डॉक्टर के पास जा रहे हैं चश्मा बच्चों को लग रहा है और उसमें यह कहा जा रहा है कि उनके डायबिटीज का भी ध्यान रखिएगा कारण क्या बनता है.

जवाब- डायबिटीज स्पेशलिस्ट एमडी मेडिसिन डॉक्टर सलीम केसर ने बताया कि जब हम स्कूल में थे उसके मुकाबले अब स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन या ट्रेनिंग या पीटी की क्लासेस और मेहनत करने की जो शिक्षा है वो कम हो गई है. अगर बच्चों में बचपन से फिजिकल एजुकेशन की आदत डाली जाए तो बेहतर होगा. हाई स्कूल तक आते-आते तो पढ़ाई का बोझ ज्यादा हो जाता है,उस पर आप ज्यादा फोकस नहीं रख पाते हैं.अगर बच्चे जब छोटे रहते हैं तो आप प्री प्राइमरी, प्राइमरी और मिडिल स्कूल लेवल पर भी अगर खेल को कंपलसरी कर दिया जाए या परिश्रम किसी भी रुप में अगर कंपलसरी कर दिया जाए और बच्चों को इसकी आदत डाली जाए और बैलेंस डाइट की मात्रा का महत्ता बताई जाए तो ही इस बीमारी पर और मोटापे को रोका जा सकता है. डायबिटीज अकेला तो आता नहीं है डायबिटीज बेसिकली उस मेटाबॉलिक सिंड्रोम का पार्ट है जो आठ अलग-अलग अंगों पर काम करता है. ये चीज जो है इसमें महिलाएं या बच्चियों और लड़के इक्वल रूप से इफेक्ट होते हैं. यह पहले तो नहीं हुआ करता था. क्योंकि हर बच्चा चाहे लड़की या लड़का दोनों खेलते थे. फिजिकल एक्टिविटी कम होती चली जा रही है. मेटाबॉलिक सिंड्रोम और ओबेसिटी बढ़ती जा रही हो डायबिटीज उसका एक हिस्सा है यह बड़ा कारण है.

सवाल- छत्तीसगढ़ का जो टेंपरेचर है, छत्तीसगढ़ की जो भौगोलिक स्थिति है क्या इस तरह की स्थितियां भी शुगर के बढ़ने का कारण हो सकती है.

जवाब- डायबिटीज स्पेशलिस्ट एमडी मेडिसिन डॉक्टर सलीम केसर ने बताया कि अभी तक क्लाइमेट से तो ऐसा कुछ नहीं देखा गया है. क्लाइमेट फैक्टर नहीं है. जो मेजर फैक्टर हैं वो यही है कि एक आपका लैक ऑफ एक्सरसाइज, भोजन की जो अनियमितता है, आपका जेनेटिक फैक्टर है ये तीन चीजें हैं. पहला कारण अगर आप बोलोगे शुगर का तो वह मोटापा ही है. मोटापा जो है जैसे ही बढ़ना शुरू होता है तो शरीर के सब अंगों पर भार पड़ना शुरू होता है. जब मोटापा बढ़ता है तो शरीर के अंगों पर भार पड़ता है. तो क्या होता है आपकी जो फैट कोशिकाएं खासकर पेट की जेंट्स में और फीमेल में हिप की, इन सब में अत्यधिक वसा की मात्रा बढ़ती चली जाती है तो इंसुलिन को काम करने में तकलीफ होती है. इंसुलिन बनता तो है लेकिन वह काम ठीक से नहीं कर पाता है. ऐसा होने के बाद शरीर और इंसुलिन बनता है लेकिन शरीर ठीक से नहीं काम करता है. फिर शरीर और एक्स्ट्रा इंसुलिन बनाती है वह भी काम नहीं कर पाता. क्योंकि इन्सुलिन रेजिस्टेंस हो गया है. इस इन्सुलिन रेजिस्टेंस के चक्कर में फिर धीरे-धीरे जो है आपकी शुगर बढ़ती चली जाती है. शुगर भी बढ़ रही है वो और मोटापा बढ़ाती है और इंसुलिन बढ़ता है, फिर और शुगर बढ़ती है. यह एक विशेष साइकिल है जो पता चल जाता है. इसलिए मोटापे को कंट्रोल करने के लिए सबसे पहले है डाइट और दूसरा है एक्सरसाइज. अगर आप धीरे-धीरे करके वजन कम कर लेते हैं तो ये भी एक डायबिटीज को ठीक रखने में एक बड़ा कारगर कदम होगा.

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