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साइनस में भी हो सकता है कैंसर? जानें क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण और कारण

साइनस कैंसर एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी है; बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं, लेकिन अगर यह हो जाए, तो इसका इलाज...

What are nasal cancer and sinus cancer? Learn about their early symptoms and causes.
क्या साइनस में हो सकता है कैंसर? जानें क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Health Team

Published : July 6, 2026 at 1:31 PM IST

6 Min Read
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आपने ब्रेस्ट, मुंह, फेफड़े, किडनी और लिवर के कैंसर के बारे में तो बहुत कुछ सुना और पढ़ा होगा, लेकिन क्या आपने कभी साइनस कैंसर के बारे में सुना है? साइनस कैंसर भी एक गंभीर बीमारी है, जिसके बारे में लोगों को आम तौर पर बहुत कम जानकारी होती है. यह कैंसर नाक के पीछे और आस-पास खोपड़ी की हड्डियों में मौजूद हवा से भरी खाली जगहों में होता है. साइनस कैंसर के कारणों, लक्षणों और इलाज के बारे में विस्तार से जानने के लिए यह रिपोर्ट पढ़ें...

नेजल कैंसर और साइनस कैंसर क्या हैं?
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, साइनस कैंसर नाक के पीछे मौजूद नेजल कैविटी (जहां से हवा गले तक जाती है) और पैरा-नेजल साइनस की जगहों में होता है. साइनस को प्रभावित करने वाले कैंसर को सिर और गर्दन के कैंसर की श्रेणी में रखा जाता है. यह तब होता है जब मैलिग्नेंट (कैंसर वाली) कोशिकाएं बनती हैं. स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा साइनस कैंसर का सबसे आम प्रकार है, शायद इसलिए क्योंकि सिर और गर्दन के हिस्से में स्क्वैमस कोशिकाएं सबसे अधिक पाई जाती हैं. दूसरे शब्दों में, नेजल और साइनस कैंसर ऐसी बीमारियां हैं जिनमें नेजल कैविटी या पैरा-नेजल साइनस के अंदर कैंसर वाली कोशिकाएं पाई जाती हैं.

भारत में इस बीमारी के मामले
भारत में नाक और पैरानेजल साइनस का कैंसर बहुत कम होता है, यह सिर और गर्दन के सभी तरह के कैंसर में से सिर्फ 1फीसदी से 2 फीसदी ही होता है. इसके कम होने के कारण, भारत में सरकारी आंकड़ों में साइनस कैंसर के मामलों की सटीक सालाना संख्या अलग से नहीं बताई जाती है. हालांकि, दुनिया भर में इसके होने की दर लगभग 4.2 मामले प्रति दस लाख लोग है, जिससे पता चलता है कि भारत में हर साल इसके कुछ हजार मामले ही सामने आते हैं.

नाक और साइनस के कैंसर के लक्षण
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा NHS की वेबसाइट के मुताबिक, शुरुआती स्टेज में, नाक और साइनस का कैंसर आमतौर पर सिर्फ आपकी नाक को प्रभावित करता है. इससे ये लक्षण हो सकते हैं:

  • नाक के एक तरफ का बंद होना जो ठीक नहीं होता
  • नाक से खून आना
  • सूंघने की क्षमता में कुछ कमी आना
  • नाक या गले में बलगम का बहना या बलगम में खून भी हो सकता है
  • जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, यह आपकी आंखों की रोशनी पर असर डाल सकता है और इससे ये दिक्कतें हो सकती हैं
  • चीजें दो-दो दिखाई देना (डबल विजन)
  • एक आंख से पानी आना
  • आंखों का बाहर की ओर उभरना
  • देखने की क्षमता में कुछ कमी आना

अगर कैंसर आपके सिर और गर्दन के दूसरे हिस्सों में फैल जाता है, तो इससे दूसरे लक्षण भी हो सकते हैं. इनमें शामिल हैं...

  • चेहरे पर दर्द और सुन्नपन जो ठीक न हो
  • मुंह खोलने में परेशानी
  • एक या ज्यादा दांतों का ढीला होना
  • कान में दर्द या दबाव महसूस होना
  • गर्दन की ग्रंथियों में सूजन
  • नाक में दर्द
  • चेहरे, नाक या मुंह के ऊपरी हिस्से (तालू) पर गांठ होना

नाक और साइनस के कैंसर का कारण क्या है?
नाक की कैविटी या साइनस का कैंसर जीन म्यूटेशन या पर्यावरण से जुड़े कारणों से हो सकता है. विशेषज्ञ नाक और साइनस के ट्यूमर में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) इन्फेक्शन की भूमिका और असर को समझने के लिए सक्रिय रूप से रिसर्च कर रहे हैं

HPV से जुड़े नाक और साइनस के कैंसर

  • स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा
  • HPV से जुड़ा मल्टीफीनोटाइपिक कार्सिनोमा
  • साइनोनासल अनडिफरेंशिएटेड कार्सिनोमा (SNUC)
  • नेसोफेरीन्जियल कार्सिनोमा
  • स्मॉल सेल कार्सिनोमा

नाक और साइनस के कैंसर का पता कैसे लगाया जाता है?
हॉपकिंस मेडिसिन के अनुसार, नाक और साइनस के कैंसर का पता लगाने के लिए इमेजिंग तकनीकों (जैसे X-रे, MRI, CT स्कैन) का इस्तेमाल किया जाता है और ट्यूमर की बायोप्सी की जाती है. कभी-कभी बायोप्सी क्लिनिक में ही मरीज की जांच (स्कोपिंग) के दौरान की जा सकती है, लेकिन कई मामलों में इसे ऑपरेशन रूम में करने की जरूरत पड़ सकती है.

नाक और साइनस के कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?
नाक और साइनस के कैंसर के इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का कॉम्बिनेशन शामिल हो सकता है. अगर ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी जरूरी है, तो आपके सर्जन 'मिनिमली इनवेसिव सर्जरी' कर सकते हैं. मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में कैंसर वाले ट्यूमर टिश्यू को हटाने के लिए नाक के छेद या सर्जिकल ओपनिंग के जरिए एंडोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है. अगर आप मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के लिए सही कैंडिडेट नहीं हैं, तो आपके सर्जन ओपन सर्जिकल प्रोसीजर कर सकते हैं.

आपके इलाज के प्लान में रेडिएशन थेरेपी भी शामिल की जा सकती है. कीमोथेरेपी का इस्तेमाल अक्सर उन साइनोनासल ट्यूमर के लिए किया जाता है जिन पर कीमोथेरेपी का अच्छा असर होता है. इन मरीजों के लिए इम्यूनोथेरेपी का इस्तेमाल रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल का एक एक्टिव एरिया है.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी हेल्थ जानकारी और सुझाव सिर्फ आपकी समझ के लिए हैं. यह जानकारी साइंटिफिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर दी जा रही है. हालांकि, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.)

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