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क्या अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीजों तक पहुंच सकती है टेक्नोलॉजी? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मॉडर्न टेक्नोलॉजी कभी भी ट्रेडिशनल और एविडेंस-बेस्ड स्क्रीनिंग की जगह नहीं ले सकतीं, बल्कि, वे सिर्फ प्रोसेस में मदद करती हैं...

Etv BharatThe next healthcare challenge facing India: Can technology reach patients before they even arrive at the hospital?
क्या अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीजों तक पहुंच सकती है टेक्नोलॉजी? (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Health Team

Published : September 2, 2026 at 3:51 PM IST

5 Min Read
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मेडिकल जगत में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है. यह हेल्थकेयर सेवाओं का फोकस 'बीमारियों के इलाज' से हटाकर 'उन्हें रोकने' की ओर ले जा रहा है.

हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स में क्लिनिकल डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक कैंसर सर्जन डॉ. सचिन मारडा का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारी रोजमर्रा की डायग्नोस्टिक प्रक्रियाओं का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है. यह हेल्थकेयर को 'रिएक्टिव ट्रीटमेंट' (बीमारी होने के बाद इलाज करना) से बदलकर 'प्रोएक्टिव केयर' (बीमारी की रोकथाम और शुरुआती दौर में इलाज) की ओर ले जाने में मदद कर सकता है, जिससे बीमारी का जल्दी पता लगाने और उसे रोकने पर ज्यादा जोर दिया जा सके.

AI, रिमोट मॉनिटरिंग और टेलीमेडिसिन से सेहत से जुड़ी समस्याओं का जल्दी पता लगाने में मदद मिल सकती है. आम तौर पर, मरीज गंभीर लक्षण दिखने के बाद ही अस्पताल जाते हैं. आजकल, पहनने योग्य डिवाइस (वेयरेबल डिवाइस) लगातार हार्ट रेट, ऑक्सीजन लेवल, ब्लड प्रेशर, नींद के पैटर्न और शारीरिक गतिविधि जैसे पैरामीटर को ट्रैक कर सकते हैं. नए डिवाइस केमिकल लेवल, ट्यूमर मार्कर और इलाज से जुड़े साइड इफेक्ट की भी निगरानी कर सकते हैं. AI इन पैटर्न का विश्लेषण कर सकता है और ऐसे बदलावों की पहचान कर सकता है जिनके लिए मेडिकल मदद की जरूरत हो सकती है.

यह उन मरीजों के लिए खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है जो बड़े मेडिकल सेंटर से दूर रहते हैं. टेलीमेडिसिन मरीजों को बार-बार आने-जाने की जरूरत के बिना स्पेशलिस्ट से जोड़ता है. इसका मुख्य आइडिया आसान है: मरीज के गंभीर रूप से बीमार होने का इंतजार न करें. इसके बजाय, शुरुआती चेतावनी के संकेतों को पहचानें और तुरंत जरूरी एक्शन लें.

टेक्नोलॉजी और कैंसर का पता लगाना
डॉ. सचिन मारडा का कहना है कि ऑन्कोलॉजी (कैंसर के इलाज से जुड़ी मेडिकल शाखा) में AI मैमोग्राम, X-रे, CT स्कैन, लो-डोज CT स्कैन, MRI इमेज और पैथोलॉजी स्लाइड का विश्लेषण करने में मदद कर सकता है. यह उन संदिग्ध जगहों की पहचान करने में मदद कर सकता है जिन्हें शायद अनदेखा कर दिया गया हो, जिससे संबंधित स्पेशलिस्ट उनकी आगे जांच कर सकें.

कैंसर के मरीजों के फॉलो-अप के दौरान रिमोट मॉनिटरिंग भी मददगार हो सकती है. रेगुलर कंसल्टेशन, ब्लड टेस्ट, ट्यूमर मार्कर और इमेजिंग के लिए अक्सर काफी यात्रा करनी पड़ती है. टेक्नोलॉजी फॉलो-अप को ज्यादा सुविधाजनक बना सकती है और साथ ही डॉक्टरों को चिंताजनक बदलावों की पहचान करने में मदद कर सकती है.

हालांकि, टेक्नोलॉजी को कैंसर की जांच के उन तरीकों की जगह नहीं लेनी चाहिए जो पहले से ही कारगर साबित हो चुके हैं, बल्कि उन्हें बेहतर बनाना चाहिए. ब्रेस्ट, सर्वाइकल और कोलोरेक्टल कैंसर की जांच, और साथ ही ज्यादा जोखिम वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर की जांच, के लिए सबूतों पर आधारित स्क्रीनिंग बहुत जरूरी है. दूसरे शब्दों में, टेक्नोलॉजी (जैसे AI या डिजिटल हेल्थ टूल्स) का मकसद डॉक्टरों की मदद करना है, न कि उनके अनुभव और जांच के पारंपरिक तरीकों की जगह लेना.

एक्सेसिबिलिटी गैप को कम करना
भारत में एडवांस्ड हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी है, लेकिन कनेक्टिविटी, अफोर्डेबिलिटी, डिजिटल लिटरेसी और स्पेशलिस्ट तक पहुंच अभी भी चुनौतियां हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में. प्राइमरी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थकेयर सेंटर्स को बड़े अस्पतालों (टर्शियरी अस्पतालों) से जोड़ने वाला 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल इस गैप को कमरने में मदद कर सकता है.

डॉ. सचिन मारडा का कहना है कि AI-असिस्टेड डायग्नोस्टिक्स, टेलीमेडिसिन, अफोर्डेबल वियरेबल्स और रीजनल-लैंग्वेज प्लेटफॉर्म स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की विशेषज्ञता को मरीजों के करीब ला सकते हैं.टेक्नोलॉजी का मकसद मरीजों को सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने के लिए मजबूर करने के बजाय, स्पेशलिस्ट डॉक्टर को मरीज तक पहुंचाना होना चाहिए.

इलाज से बचाव की ओर
भारतीय हेल्थकेयर का भविष्य 'प्रतिक्रिया' से 'पूर्वानुमान', 'इलाज' से 'बचाव' और 'बीमारी के प्रबंधन' से 'वेलनेस' की ओर बढ़ना चाहिए. AI डॉक्टरों को ज्यादा प्रोएक्टिव, आसानी से उपलब्ध और पर्सनलाइज्ड देखभाल देने में मदद कर सकता है. हालांकि, टेक्नोलॉजी को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, रेगुलर चेक-अप, हेल्थ एजुकेशन और एक्टिव पेशेंट एंगेजमेंट के साथ मिलकर काम करना चाहिए.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक शोध, अध्ययनों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान कर रहे हैं. इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सर्वोत्तम होगा.)

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