EXPLAINER: अल नीनो आपकी सेहत पर डाल सकता है गंभीर असर, जानिए भारतीयों को ज्यादा सतर्क रहने की क्यों है जरूरत
अल नीनो का छिपा हुआ असर मुख्य रूप से तापमान में वृद्धि, कम बारिश और सूखे जैसे हालातों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के रूप में...

Published : June 26, 2026 at 3:17 PM IST
- लेखक-स्नेहा भारती
जब ज्यादातर लोग 'अल नीनो' शब्द सुनते हैं, तो उनके मन में हीटवेव, बढ़ता तापमान और गर्मी से भरे बेचैन करने वाले महीने याद आते हैं. हालांकि, सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन, एक्यूट मेडिसिन और क्लिनिकल ट्रांसफॉर्मेशन के डायरेक्टर डॉ. मुकेश ठाकुर का कहना है कि अल नीनो का असर मौसम के पूर्वानुमान से कहीं ज्यादा होता है. यह सिर्फ मौसम से जुड़ी घटना नहीं है, बल्कि एक बड़ी हेल्थ चुनौती है जो गर्मी के लेवल, पानी, हवा की क्वालिटी, फैलने वाली बीमारियों, न्यूट्रिशन और यहां तक कि मेंटल हेल्थ पर असर डालकर लाखों लोगों को प्रभावित करता है.
स्वास्थ्य पर अल नीनो का प्रभाव, भारतीयों को ज्यादा ध्यान देने की क्यों है जरूरत
डॉ. मुकेश ठाकुर के मुताबिक, भारत पर 'अल नीनो' का असर बहुत ज्यादा हो सकता है क्योंकि देश की आबादी बहुत ज्यादा है, शहरों में आबादी ज्यादा है और मौसम के बदलते पैटर्न पर बहुत ज्यादा निर्भरता है. हालांकि हीटवेव अक्सर चर्चा में रहती हैं, लेकिन अल नीनो से सेहत पर पड़ने वाले कई अहम असर तब तक छिपे रहते हैं जब तक कि वे हमारे क्लीनिक, इमरजेंसी विभागों और अस्पतालों में दिखाई देने न लगें.
कई तरह की हो सकती हैं बीमारियां
भारत में, हीटस्ट्रोक के अलावा अल नीनो से सेहत पर पड़ने वाले छिपे हुए असर में डिहाइड्रेशन की वजह से किडनी को नुकसान, सांस की बीमारियां और हार्ट अटैक शामिल हैं. गर्म हवाएं प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों (जैसे ओजोन) की मात्रा बढ़ा देती हैं, जिससे अस्थमा जैसी बीमारियां काफी बढ़ जाती हैं. सेहत पर सबसे तुरंत असर 'हीट स्ट्रेस' के रूप में दिखता है, जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, शरीर को अपना अंदरूनी तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. भारतीयों को इसलिए ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यह जलवायु चक्र भारत में गंभीर लू , जल-जनित बीमारियों, और घटते पोषण स्तर का कारण बन सकता है.

डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का बढ़ जाता है खतरा
डॉ. मुकेश ठाकुर का कहना है कि बहुत ज्यादा गर्मी से डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक हो सकता है, अगर समय पर इसका पता न चले और इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा भी हो सकता है. बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बाहर काम करने वाले लोग और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इससे सबसे ज्यादा खतरा होता है.
लेकिन असर यहीं तक सीमित नहीं रहता है. हर गर्मी में अस्पतालों में दिल की बीमारी, किडनी की समस्याओं और सांस की बीमारियों के बिगड़ने के कारण आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. डिहाइड्रेशन से दिल और ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर), हार्ट फेलियर और कोरोनरी आर्टरी डिजीज वाले लोगों में जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है. इसी तरह, शरीर में पर्याप्त पानी या तरल पदार्थ न जाने से किडनी का काम बिगड़ सकता है और 'एक्यूट किडनी इंजरी' (अचानक किडनी खराब होने) का खतरा बढ़ सकता है, खासकर उन मरीजो में जिन्हें पहले से ही किडनी की पुरानी बीमारी है.
सांस की बीमारियों का खतरा
डॉ. मुकेश ठाकुर का कहना है कि अल नीनो हमारे सांस लेने वाली हवा पर भी असर डाल सकता है. कम बारिश और लंबे समय तक सूखे के कारण अक्सर हवा में धूल, प्रदूषण और बारीक कणों (पार्टिकुलेट मैटर) का स्तर बढ़ जाता है. हवा की खराब क्वालिटी से अस्थमा का दौरा पड़ सकता है, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) की स्थिति बिगड़ सकती है और एलर्जी बढ़ सकती है. जिन लोगों को पहले से सांस की बीमारी है, उनके लिए इसका मतलब हो सकता है कि लक्षण बार-बार दिखें, दवा की जरूरत बढ़ जाए और कुछ मामलों में अस्पताल में भर्ती होना पड़े.

बारिश के पैटर्न में बदलाव एक और बड़ी चुनौती पैदा करता है. कुछ इलाकों में सूखा और पानी की कमी होती है, जबकि कुछ जगहों पर भारी बारिश और बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है. दोनों ही स्थितियों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. साफ पानी न मिलने से साफ-सफाई और स्वच्छता पर असर पड़ता है, जिससे गैस्ट्रोएंटेराइटिस, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी दस्त वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही, तापमान और बारिश के पैटर्न में बदलाव मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना सकते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैल सकती हैं.
अल नीनो का मेंटल हेल्थ पर असर
डॉ. मुकेश ठाकुर के अनुसार, अल नीनो का एक असर जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, वह है मेंटल हेल्थ पर इसका असर. लंबे समय तक गर्मी, पानी की कमी, आर्थिक अनिश्चितता और रोजगार में रुकावट से स्ट्रेस, एंग्जायटी, नींद की समस्या और डिप्रेशन हो सकता है. जब खराब मॉनसून से फसल की पैदावार और घर की इनकम पर असर पड़ता है, तो किसानों और गांव के लोगों को खास मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. हम यह भी जानते हैं कि बहुत ज्यादा गर्मी कॉन्संट्रेशन, प्रोडक्टिविटी और फैसले लेने की क्षमता पर बुरा असर डाल सकती है, जिसका असर स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और मजदूरों पर एक जैसा पड़ता है.

कुपोषण और भुखमरी का खतरा
अल नीनो की वजह से खाद्य सुरक्षा वाकई एक अहम और उभरती हुई चिंता का विषय है. जब अल नीनो के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव आता है, तो इसका सीधा असर खेती और आम लोगों की जेब पर पड़ता है. मौसम में असंतुलन और फसलों की पैदावार में कमी से खाने-पीने की चीजों की सप्लाई कम हो सकती है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. आमदनी घटने की वजह से समाज के कमजोर वर्ग ये पौष्टिक खाद्य पदार्थ नहीं खरीद पाते, जिसके परिणामस्वरूप लंबे समय में कुपोषण, भुखमरी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
इस खतरे से सेहत को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
- पहला कदम है जागरूकता- डॉ. मुकेश ठाकुर कहते हैं कि बहुत ज्यादा गर्मी के समय में सही हाइड्रेशन बनाए रखना बहुत जरूरी है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लोगों को रेगुलर पानी पीना चाहिए, दिन के सबसे गर्म समय में बाहर जाने से बचना चाहिए, और गर्मी से होने वाली बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को पहचानना चाहिए. परिवारों को बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर खास ध्यान देना चाहिए.
- खाने-पीने की साफ-सफाई बनाए रखना- घर के आस-पास जमा पानी को हटाना, मच्छरों से बचाव करना और पुरानी बीमारियों के लिए नियमित मेडिकल चेकअप करवाना जैसे आसान उपाय स्वास्थ्य संबंधी खतरों को काफी कम कर सकते हैं. अच्छी नींद, सामाजिक सहयोग और भावनात्मक परेशानी को जल्दी पहचानने के जरिए मानसिक सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है.
- डॉ. मुकेश ठाकुर कहते हैं कि मौसम के बदलते पैटर्न को देखते हुए, हमें क्लाइमेट से लड़ने की ताकत और हेल्थ से लड़ने की ताकत के बीच गहरे रिश्ते को समझने की जरूरत है. अल नीनो की तैयारी सिर्फ बहुत ज्यादा गर्मी से निपटने के बारे में नहीं है, बल्कि यह आपके समुदायों को कई रोके जा सकने वाले हेल्थ रिस्क से बचाने के बारे में है.
- उनका कहना है कि अच्छी खबर यह है कि इनमें से कई खतरों को जागरूकता, तैयारी और समय पर कार्रवाई करके कम किया जा सकता है. क्लाइमेट चेंज एक ग्लोबल चुनौती हो सकती है, लेकिन अपनी सेहत की रक्षा के लिए व्यक्ति, परिवार और समुदाय के लेवल पर छोटे-छोटे काम करने होंगे. सेहत पर अल नीनो के छिपे हुए असर को समझना, एक ज्यादा सेहतमंद और मजबूत भारत बनाने की दिशा में पहला कदम है.
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी हेल्थ जानकारी और सुझाव सिर्फ आपकी समझ के लिए हैं. यह जानकारी साइंटिफिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर दी जा रही है. हालांकि, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.)

