रूस ने इबोला वायरस के नए स्ट्रेन 'बुंडीबुग्यो' के लिए वैक्सीन बनाने का किया दावा, क्या भारत में भी है Ebola का खतरा?
इबोला एक बहुत गंभीर और जानलेवा बीमारी है जो हेमरेजिक फीवर वायरस से होती है. भारत में इस बीमारी का खतरा कितना ज्यादा है?

Published : May 27, 2026 at 2:20 PM IST
बुंडिबुग्यो वायरस के कारण फैलने वाली इबोला बीमारी के प्रकोप ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो (DRC) और युगांडा को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां कन्फर्म और संदिग्ध मामलों की संख्या के साथ ही मौतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. 26 मई तक के डेटा के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला (बुंडीबुग्यो स्ट्रेन) से जुड़े कुल 906 संदिग्ध मामले और 223 मौतें दर्ज की गई हैं.
इबोला क्या है?
इबोला एक वायरस है जो पूरे शरीर में गंभीर सूजन और टिशू को नुकसान पहुंचाता है. इसे हेमोरेजिक फीवर वायरस के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह शरीर के क्लॉटिंग सिस्टम में दिक्कतें पैदा कर सकता है और अंदरूनी ब्लीडिंग का कारण बन सकता है, क्योंकि खून छोटी ब्लड वेसल से लीक होता है. इस वायरस की छह अलग-अलग तरह की किस्में पाई गई हैं, लेकिन सिर्फ चार ही इंसानों में बीमारी पैदा करने के लिए जानी जाती हैं.
इबोला, इन्फेक्टेड लोगों के शरीर के फ्लूइड (खून, लार, पसीना, आंसू, बलगम, उल्टी, मल, मां का दूध, यूरिन और सीमेन ) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. यह उन चीजों को छूने से भी फैलता है जो इन फ्लूइड से दूषित हो गई हों.
इबोला कितना सीरियस डिजीज है?
इबोला एक बहुत सीरियस और जानलेवा वायरल बीमारी है, जिसमें एवरेज डेथ रेट लगभग 50 फीसदी होता है. यह इन्फेक्टेड व्यक्ति के बॉडी फ्लूइड के सीधे कॉन्टैक्ट में आने से तेजी से फैलता है. इससे पीड़ित मरीजों को गंभीर इंटरनल ब्लीडिंग, ऑर्गन फेलियर और दूसरी जानलेवा कॉम्प्लीकेशंस का सामना करना पड़ता है.
दरअसल, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इस महीने की 17 तारीख को इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशंस के तहत डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला के फैलने को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था. हाल ही में, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने भी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन द्वारा इंटरनेशनल कंसर्न की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद एयरलाइंस के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी किया. DGCA ने कहा कि युगांडा और कांगो के साथ कनेक्टिविटी ऑपरेट करने वाली एयरलाइंस को यात्रियों के उतरने से पहले सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरना और जमा करना जरूरी है. अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी इस फैलने को कॉन्टिनेंटल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है.
WHO ने देशों को सलाह दी है कि वे प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग को मजबूत करें और उन जगहों पर जाने से बचें जहां बुंडीबुग्यो वायरस का पता चला है. साउथ सूडान समेत पड़ोसी देशों में इंफेक्शन फैलने का खतरा अधिक माना जाता है। इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है जिससे मौत की दर ज्यादा होती है. अभी, बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई ऑफिशियली अप्रूव्ड वैक्सीन या इलाज नहीं है.

रूस ने बनाई वैक्सीन
इस बीच, दक्षिण अफ्रीका में रूसी दूतावास ने हाल ही में पुष्टि की है कि रूसी वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस के सबसे नए और सबसे जानलेवा स्ट्रेन (बुंडीबुग्यो स्ट्रेन) के खिलाफ एक नई वैक्सीन बनाई ली है. रूस के हेल्थ मिनिस्टर मिखाइल मुराश्को ने इस डेवलपमेंट की घोषणा की. साइंटिस्ट्स ने कहा कि यह वैक्सीन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में हाल ही में फैले दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ भी काम कर सकती है.
क्या भारत में इबोला का खतरा है?
भारत में, युगांडा से बैंगलोर लौटी एक 28 साल की महिला को इबोला जैसे लक्षण दिखने के बाद हॉस्पिटल में आइसोलेशन में रखा गया था. हालांकि, महिला के मेडिकल टेस्ट के नतीजे नेगेटिव आए, और वह इबोला वायरस से इन्फेक्टेड नहीं है. हेल्थ डिपार्टमेंट ने कन्फर्म किया है कि भारत में अभी इस बीमारी का कोई कन्फर्म केस नहीं है.
इबोला के लक्षण
इबोला के लक्षण वायरस से इन्फेक्टेड होने के दो से 21 दिन बाद शुरू हो सकते हैं. ये अक्सर वायरस के संपर्क में आने के लगभग आठ से 10 दिन बाद शुरू होते हैं.
शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे ही होते हैं, और इनमें ये शामिल हो सकते हैं...
- बुखार
- ठंड लगना
- कमजोरी
- तेज सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
ये लक्षण कई दिनों बाद दिख सकते हैं
- कन्फ्यूजन
- सीने में दर्द
- सांस लेने में दिक्कत
- मतली और उल्टी
- डायरिया
- पेट में दर्द
- पेशाब कम आना या बिल्कुल नहीं आना
- अजीब तरह से ब्लीडिंग या चोट लगना
- एक लाल रैश जिसमें खुजली या दर्द न हो, और जो कुछ समय बाद छिल सकता है
- आंखों, नाक, मुंह और रेक्टम से लालिमा और ब्लीडिंग
बीमारी के बाद के स्टेज में ये हो सकता है...
- ऑर्गन फेलियर
- दिमाग में सूजन
- दौरे
- शरीर में खून का बहाव कम होना (शॉक)
- मौत
(डिस्क्लेमर: इस रिपोर्ट में दी गई सभी जानकारी रिसर्च और एक्सपर्ट की सलाह पर आधारित है. ETV भारत किसी भी तरह से इस जानकारी का समर्थन नहीं करता है. कृपया इस पर अमल करने से पहले किसी एक्सपर्ट से सलाह लें.)

