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किडनी खराब होने से पहले शरीर देने लगता है यह शुरुआती चेतावनी संकेत, जानिए ज्यादा पानी पीना फायदेमंद है या नुकसानदायक?

किडनी हमारे शरीर का एक बेहद ही महत्वपूर्ण अंग है. अगर किसी कारणवस यह काम करना बंद कर दें , तो यह स्थिति जानलेवा है...

The body starts showing these early warning signs before kidney failure occurs.
किडनी खराब होने से पहले शरीर देने लगता है यह शुरुआती चेतावनी संकेत, (GETTY IMAGES)
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By ETV Bharat Health Team

Published : July 6, 2026 at 4:10 PM IST

6 Min Read
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किडनी शरीर में फिल्टर की तरह काम करती है और खून से बेकार चीज़ों, अतिरिक्त पानी और ज़हरीले पदार्थों को बाहर निकालती है। जब किडनी का काम ठीक से नहीं हो पाता, तो शरीर में बेकार चीजें जमा होने लगती हैं, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. एक अध्ययन से पता चलता है कि किडनी के धीमे काम करने से क्रोनिक किडनी की बीमारी हो सकती है, इसलिए, किडनी के ठीक से काम न करने के शुरुआती संकेतों का पता लगाना बहुत जरूरी है.

इस लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

पेशाब में बदलाव: किडनी की समस्याएं अक्सर पेशाब आने की बारंबारता और तरीके में बदलाव के साथ शुरू होती हैं. इसमें बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में (नोक्टुरिया), या सामान्य से कम पेशाब आना और पेशाब करने में कठिनाई होना शामिल है. एनआईएच (NIH) की एक स्टडी के अनुसार, झागदार या बुलबुले वाला पेशाब यह बताता है कि किडनी से प्रोटीन रिसकर पेशाब में मिल रहा है. अगर आपको गहरे रंग का पेशाब या पेशाब में खून दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. जब किडनी खराब हो जाती है, तो वे खून को ठीक से फिल्टर करने की क्षमता खो देती हैं, जिसके कारण पेशाब में प्रोटीन और खून आने लगता है.

शरीर के अंगों में सूजन: जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर नहीं निकाल पाता. इससे पैरों, टखनों, हाथों, चेहरे और खासकर आंखों के आसपास सूजन आ सकती है. शरीर में तरल पदार्थ जमा हो जाता है क्योंकि किडनी नमक और पानी के स्तर को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाती. यह सूजन लंबे समय तक खड़े रहने या रात के समय बढ़ सकती है.

बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी: किडनी एरिथ्रोपोइटिन (EPO) नाम का हार्मोन बनाती है, जो रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाओं) के बनने में मदद करता है. 'किडनी केयर यूके' (Kidney Care UK) की वेबसाइट पर छपी एक स्टडी के अनुसार, किडनी के काम करने की क्षमता कम होने से EPO का उत्पादन भी कम हो सकता है, जिससे एनीमिया (खून की कमी) हो सकती है. रेड ब्लड सेल्स की कमी से लगातार थकान, मांसपेशियों में कमज़ोरी और थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि के बाद भी ऊर्जा की कमी महसूस होती है. यह थकान इतनी ज्यादा हो सकती है कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाए. थकान, किडनी के ठीक से काम न करने के शुरुआती लक्षणों में से एक है.

त्वचा में खुजली और मांसपेशियों में ऐंठन: जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो खून में वेस्ट प्रोडक्ट्स और मिनरल्स (जैसे कैल्शियम और फास्फोरस) जमा होने लगते हैं. इससे त्वचा में खुजली (खासकर रात में) और पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है. माना जाता है कि टॉक्सिन्स और मिनरल्स के लेवल में उतार-चढ़ाव से त्वचा के टिशू और मांसपेशियों की कोशिकाओं में जलन होती है.

साफ-साफ सोचने में परेशानी: जब किडनी का काम कमजोर हो जाता है, तो टॉक्सिन्स लंबे समय तक खून में बने रह सकते हैं, जिससे दिमाग के काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है. इससे ध्यान लगाने में मुश्किल, भूलने की बीमारी या याददाश्त से जुड़ी समस्याएं, कन्फ्यूजन या फैसले लेने में परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं. अगर आपको लगातार इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

बहुत ज्यादा पानी पीना किडनी के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक?
बचपन से ही हमें बताया जाता रहा है कि खूब पानी पीने से सेहत अच्छी रहती है और शरीर से बेकार चीजें बाहर निकल जाती हैं. अपने पास में पानी की बोतल रखना और प्यास लगने या न लगने पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहना एक अच्छी आदत माना जाता हैं. लेकिन, कुछ लोग वॉटर चैलेंज के तहत कई लीटर पानी तक पी जाते हैं. वॉटर चैलेंज के नाम पर बहुत कम समय में कई लीटर पानी पीना बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे शरीर में सोडियम का स्तर तेज़ी से गिरता है, इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया या वॉटर इंटॉक्सिकेशन कहा जाता है.

हममें से कई लोग यह नहीं जानते कि प्यास बुझाने वाला यह तरल पदार्थ (अगर जरूरत से ज्यादा पिया जाए) तो हमारे शरीर के जरूरी फिल्टर, यानी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है. जैसे घर में इस्तेमाल होने वाला छोटा जग अपनी क्षमता से ज्यादा भरने पर छलकने लगता है, वैसी ही स्थिति हमारी किडनी के साथ भी होती है. पानी पीना सिर्फ प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, यह शरीर में नमक के स्तर और रक्त के प्रवाह का संतुलन बनाए रखने की एक नाज़ुक प्रक्रिया है. जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो सेहत को बेहतर बनाने की हमारी तमाम कोशिशें फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा सकती हैं.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी हेल्थ जानकारी और सुझाव सिर्फ आपकी समझ के लिए हैं. यह जानकारी साइंटिफिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह के आधार पर दी जा रही है. हालांकि, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.)

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