बच्चों की आंखों पर खतरे की घंटी! इन बातों को न करें नजरअंदाज, वरना धुंधली होगी रोशनी
आयुर्वेद का देसी फॉर्मूला देगा नेत्र ज्योति, डिजिटल वार से बच्चों की आंखों का बचाव संभव.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 19, 2026 at 2:42 PM IST
|Updated : February 19, 2026 at 3:02 PM IST
सिरमौर: नन्हीं आंखों पर खतरे की घंटी बज चुकी है. जिस उम्र में बच्चों की आंखों में सपनों की चमक होनी चाहिए, उसी उम्र में अब धीरे-धीरे चश्मों की संख्या बढ़ती जा रही है. मोबाइल की तेज रोशनी, घंटों का स्क्रीन टाइम, बिगड़ता खान-पान और बदलती दिनचर्या बच्चों की नेत्र ज्योति पर सीधा असर डाल रहे हैं. कम उम्र में आंखों में दर्द, जलन और धुंधलापन आम शिकायत बनती जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है. राहत की बात यह है कि आयुर्वेद के सरल, सुरक्षित और घर में अपनाए जा सकने वाले उपायों से डिजिटल वार के इस दौर में भी आंखों का बचाव संभव है.
क्यों खराब हो रही बच्चों की आंखें ?
जिला आयुष अधिकारी सिरमौर डॉ. इंदु शर्मा का कहना है, "आज की बदलती जीवनशैली बच्चों की आंखों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है. पहले जहां कम उम्र में नेत्र समस्याएं कम देखने को मिलती थीं. वहीं, अब स्कूल जाने वाले बच्चों में भी चश्मे की जरूरत तेजी से बढ़ रही है. लगातार मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों के उपयोग से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है. इसके साथ ही पौष्टिक आहार की कमी और बाहर खेलकूद में कमी भी स्थिति को और बिगाड़ रही है."
माता-पिता के लिए डॉक्टर की सलाह
डॉ. इंदु शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद में नेत्रों (आंखों) को शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील अंग माना गया है. अगर बचपन से ही उचित आहार-विहार अपनाया जाए तो अधिकांश समस्याओं से बचा जा सकता है. उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों की दिनचर्या में संतुलन लाएं. पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि सुनिश्चित करें. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल औषधि ही पर्याप्त नहीं है. अगर बच्चे दिनभर स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहेंगे तो किसी भी उपाय का पूरा लाभ नहीं मिलेगा. इसलिए उपचार के साथ अनुशासन और निगरानी भी उतनी ही जरूरी है.

आयुर्वेद से कैसे होगा आंखों का बचाव ?
डॉ. इंदु शर्मा ने कहा कि अगर माता-पिता अभी से सजग हो जाएं और आयुर्वेदिक सुझावों को नियमित रूप से अपनाएं तो बच्चों की नेत्र ज्योति को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
- आंवला : आंखों का प्राकृतिक रक्षक
डॉ. शर्मा बताती हैं कि आंवला आंखों के लिए सर्वोत्तम आहारों में से एक है. आंवले को हल्का तड़का लगाकर सब्जी की तरह तैयार कर सकते हैं. बिना प्याज-लहसुन के यह 5 से 10 मिनट में तैयार हो जाता है. सुबह नाश्ते में बच्चों को 2 से 3 आंवले देने से आंखों की कई समस्याओं में लाभ मिल सकता है. नियमित सेवन से नेत्र ज्योति को पोषण मिलता है.
- त्रिफला घृत : नेत्रों के लिए आयुर्वेदिक संजीवनी
आंखों की रोशनी के लिए त्रिफला घृत को भी बेहद लाभकारी बताया गया है. त्रिफला और गौ घृत से तैयार यह औषधीय घी बच्चों को सुबह-शाम दूध के साथ एक-एक चम्मच दिया जा सकता है. यह आंखों की सेहत के साथ-साथ शरीर को भी मजबूती प्रदान करता है.
- त्राटक : एकाग्रता से बढ़ेगी नेत्र ज्योति
डॉ. इंदु शर्मा ने त्राटक अभ्यास की भी सलाह दी है. किसी एक बिंदु, नाखून या दीपक की लौ को बिना पलक झपकाए ध्यानपूर्वक देखना त्राटक कहलाता है. इससे आंखों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और एकाग्रता भी बढ़ती है. नियमित अभ्यास बच्चों की दृष्टि शक्ति को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है.
- बादाम-सौंफ-मिश्री का पावर फॉर्मूला
बादाम गिरी, कुजा मिश्री और मीठी सौंफ को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें. सुबह और शाम दूध के साथ एक-एक चम्मच बच्चों को दें. यह मिश्रण आंखों के साथ-साथ मस्तिष्क के विकास के लिए भी लाभकारी माना गया है.
- ठंडे पानी के छींटे जरूरी
सुबह उठते ही आंखों पर ठंडे या सामान्य तापमान वाले पानी के छींटे मारने चाहिए. गर्म पानी का प्रयोग आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है.

स्क्रीन टाइम पर लगाम जरूरी
डॉ. इंदु शर्मा स्पष्ट कहती हैं कि अगर च्चे दिनभर मोबाइल में लगे रहेंगे तो सारे उपाय बेअसर हो सकते हैं. अभिभावक बच्चों का स्क्रीन टाइम एक से डेढ़ घंटे तक सीमित रखें और रोज कम से कम डेढ़ घंटा आउटडोर खेल अनिवार्य करें. मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों की आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है. इसलिए संतुलित दिनचर्या, पौष्टिक आहार और सीमित स्क्रीन टाइम ही आंखों की असली सुरक्षा है. कुल मिलाकर खतरे की घंटी बज चुकी है, लेकिन समाधान भी हमारे पास है. जरूरत है तो बस जागरूकता और नियमितता की. आज अपनाए गए छोटे-छोटे आयुर्वेदिक उपाय कल बच्चों की आंखों की बड़ी सुरक्षा बन सकते हैं.

