HIV एड्स और ब्रेस्ट कैंसर का डेडली कॉम्बिनेशन, डॉक्टर्स के हाईरिस्क सर्जरी मैजिक से बची जान
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में HIV पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर पेशेंट की हाईरिस्क सर्जरी से बची जान. प्लास्टिक गाउन, चश्मा से हुआ चमत्कार

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 11, 2025 at 1:30 PM IST
|Updated : December 11, 2025 at 2:22 PM IST
रिपोर्ट: कपिल तिवारी
सागर: एचआईवी पॉजिटिव मरीज अगर किसी बीमारी से पीड़ित हो जाए, तो उसको इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है. आमतौर पर बड़े-बड़े नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों को जैसे ही मरीज के एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चलता है, तो इलाज के लिए मना कर देते हैं. लेकिन बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एचआईवी पॉजिटिव महिला मरीज की स्तन कैंसर जैसी समस्या की सफल सर्जरी कर जान बचाने का काम किया है.
हालांकि महिला अभी भी डॉक्टरों की विशेष देखरेख में है. यूनिवर्सल प्रिकॉशंस के साथ की गयी हाई रिस्क सर्जरी ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के कौशल का लोहा बनवाया है. क्योंकि संक्रमण से बचाव के साथ इस तरह की सर्जरी करना काफी कठिन और जोखिम पूर्ण होता है. लेकिन डॉक्टरों ने यूनिवर्सल प्रिकॉशंस के साथ करीब ढाई घंटे की सर्जरी के बाद महिला का ट्यूमर निकालने का काम किया है.
बड़े-बड़े अस्पतालों में भटकती रही महिला
एचआईवी एड्स को लेकर समाज का दृष्टिकोण काफी चिंताजनक है. लोग किसी मरीज के संक्रमित होने की सूचना पर पारिवारिक रिश्ते तक खत्म कर देते हैं. अक्सर निजी अस्पताल भी संक्रमण के डर से ऐसे मरीज को रेफर करने में ज्यादा यकीन करते हैं. ऐसा ही कुछ बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंची स्तन कैंसर से पीड़ित महिला के साथ हुआ. जब देश की बड़ी-बड़ी निजी अस्पतालों ने उसके एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी मिलते ही इलाज से मना कर दिया.
लेकिन सागर संभाग के इकलौते मेडिकल कॉलेज बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज जब महिला पहुंची, तो यहां के विशेषज्ञ डाक्टरों ने इसे चुनौती मानते हुए सर्जरी का जोखिम उठाया. महिला तब स्तन कैंसर की फोर्थ स्टेज की मरीज थी. स्तन कैंसर की बात करें, तो दुनिया की एक लाख महिलाओं में 48 महिलाएं इस बीमारी से पीड़ित होती है और 13 को जान से हाथ धोना पड़ता है.

जनरल सर्जरी विभाग ने उठाया जोखिम
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुनील सक्सेना ने अपनी टीम के साथ महिला की सर्जरी की जिम्मेदारी ली. उनके नेतृत्व में डॉ. अखिलेश रत्नाकर और डॉ जितेंद्र सिंह ने सर्जरी में अहम भूमिका निभाई. चूंकि मरीज एचआईवी संक्रमित थी. इसलिए उसकी सर्जरी में यूनिवर्सल प्रिकॉशंस के तहत की जाना थी, जो अपने आप में चुनौतीपूर्ण था. क्योंकि एक तरफ हाई रिस्क सर्जरी और दूसरी तरफ यूनिवर्सल प्रिकॉशंस के साथ सर्जरी करना काफी मुश्किल काम था.''
प्रोफेसर सुनील सक्सेना बताते हैं कि, ''हमारे सामने बड़ी चुनौती जरूर थी. लेकिन चिकित्सीय पेशे और मानवीयता के नाते हमने इसे स्वीकार किया. ये मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (Modified Radical Mastectomy) सर्जरी हमारे प्रोफेशनल स्किल और यूनिवर्सल प्रीकाशन के साथ करना थी. हमारी पूरी टीम ने इसे एक चैलेंज के तौर पर लिया और मानसिक रूप से अपने आप को तैयार किया.''

यूनिवर्सल प्रिकॉशंस अपनाना काफी कठिन
प्रो. सुनील सक्सेना बताते हैं कि, ''यूनिवर्सल प्रिकॉशंस के साथ हमें अपनी कार्य क्षमता और योग्यता को भी बनाए रखना होता है. इसके तहत जब किसी एचआईवी संक्रमित मरीज की सर्जरी की जाती है, तो हमेशा सिर से पैर तक प्लास्टिक गाउन में बंद होना पड़ता है. आंखों पर चश्मा लगाना होता है. इसके साथ प्लास्टिक कैप और मास्क लगाना होता है. इतने तामझाम के साथ सर्जरी शुरू होने के कुछ देर बाद सांस लेने में दिक्कत के साथ काफी पसीना आने लगता है. जिसकी वजह से कार्यक्षमता भी प्रभावित होने लगती है. मरीज में कैंसर का टिश्यू सीने की मांसपेशियों से जमकर चिपका था. जिसे दो घंटे के डिसेक्शन के बाद निकाल कर अलग किया गया.''

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मरीज को थी ब्लड प्रेशर की शिकायत
इस सर्जरी में संबंधित विभाग के साथ एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट भी महत्वपूर्ण भूमिका में होता है. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया के हेड प्रोफेसर सर्वेश जैन ने बताया कि ये, ''ऑपरेशन काफी जटिल इसलिए भी था, क्योंकि महिला मरीज एचआईवी पॉजिटिव होने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर की भी मरीज थी और स्तन कैंसर की सर्जरी होना थी. ऐसी स्थिति में मरीज को सर्जरी के लिए एनेस्थीसिया देना काफी जटिल काम था.
सर्जरी के दौरान खून का बहाव तेज ना हो, इसलिए ब्लड प्रेशर को काफी को रखना था. क्योंकि अगर ब्लड प्रेशर बढ़ जाता, तो सर्जरी वाले अंग से तेज गति से खून बहने का खतरा था. इसलिए मैंने और डॉ अजय सिंह ने हाइपोटेंसिव एनेस्थीसिया पद्धति का इस्तेमाल किया.''
फिलहाल विशेषज्ञों की देखरेख में मरीज
प्रोफेसर सुनील सक्सेना ने बताया कि, ''सफल सर्जरी के बाद अभी महिला को विशेषज्ञों की देखरेख में रखा गया है. क्योंकि महिला एचआईवी पॉजिटिव होने के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी है. काफी जटिल सर्जरी से उसमें से गुजरना पड़ा है.'' बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन ने सफल सर्जरी के लिए जनरल सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर को शाबाशी दी और आम लोगों को संदेश दिया है कि इस तरह के संक्रमित मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए मना कर दिया जाता है. तो बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी योग्यता और कार्य क्षमता के साथ बेहतर से बेहतर इलाज करने के लिए तैयार है.

