EXPLAINER: प्रतीक यादव को थी फेफड़े की यह गंभीर बीमारी, जानिए क्यों और किसे होता है यह रोग?
किस गंभीर बीमारी के कारण स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में निधन हो गया. लेखक- स्नेहा भारती

Published : May 13, 2026 at 3:39 PM IST
समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में लखनऊ में निधन हो गया. उन्हें बुधवार को लखनऊ के सिविल अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था. प्रतीक यादव BJP नेता अपर्णा यादव के पति और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे. पुलिस सूत्रों के अनुसार, परिवार के सदस्य उन्हें सुबह 6:15 बजे अस्पताल लाए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. उस समय उनकी पत्नी मौजूद नहीं थीं.
रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि प्रतीक यादव काफी समय से फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी Pulmonary embolism (PE) से जूझ रहे थे. उनके फेफड़ों में खून का थक्का जम गया था, जिसका इलाज चल रहा था. सुबह अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया, जिसके बाद परिवार वाले उन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. उनकी मौत की खबर सुनकर कई लोग सदमे में हैं. इस खबर में विस्तार से जानिए कि आखिर Pulmonary embolism (PE) कितनी गंभीर बीमारी है और यह क्यों होती है...
पल्मोनरी एम्बोलिज्म क्या है?
DVT कैसे PE का कारण बनता है?
डॉ. रुचिता शर्मा के अनुसार, जब शरीर की एक या एक से ज्यादा गहरी नसों में ब्लड क्लॉट बन जाता है, तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) के नाम से जाना जाता है. यह एक गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा स्थिति है जो आमतौर पर पैरों की नसों को प्रभावित करती है. जब यह थक्का टूटकर रक्त प्रवाह के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) का कारण बनता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है.

PE के लक्षण
मेडलाइन प्लस के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लक्षण बहुत अलग-अलग हो सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके फेफड़े का कितना हिस्सा प्रभावित है, थक्कों का आकार क्या है, और क्या आपको पहले से कोई फेफड़े या दिल की बीमारी है.
आम लक्षणों में शामिल हैं...
- सांस लेने में दिक्कत- यह लक्षण आमतौर पर अचानक दिखाई देता है. सांस लेने में परेशानी तब भी होती है जब आप आराम कर रहे होते हैं, और शारीरिक गतिविधि करने पर यह और बढ़ जाती है.
- सीने में दर्द- आपको ऐसा महसूस हो सकता है जैसे आपको दिल का दौरा पड़ रहा है. दर्द अक्सर तेज होता है और जब आप गहरी सांस लेते हैं तो महसूस होता है. दर्द के कारण आप गहरी सांस नहीं ले पाते हैं. आपको खांसते समय, झुकते समय या आगे की ओर झुकते समय भी दर्द महसूस हो सकता है.
- बेहोशी- अगर आपकी हार्ट रेट या ब्लड प्रेशर अचानक कम हो जाए, तो आप बेहोश हो सकते हैं. इसे सिंकोप कहते हैं.
पल्मोनरी एम्बोलिज्म के साथ होने वाले अन्य लक्षणों में शामिल हैं...
- खांसी, जिसमें खून वाला या खून की लकीरों वाला बलगम आ सकता है
- तेज या अनियमित दिल की धड़कन
- हल्का सिरदर्द या चक्कर आना
- बहुत ज्यादा पसीना आना
- बुखार
- पैर में दर्द या सूजन, या दोनों, आमतौर पर पैर के निचले हिस्से के पिछले भाग में
- त्वचा का चिपचिपा या बेरंग होना, जिसे साइनोसिस कहा जाता है
डॉक्टर से कब मिलें
पल्मोनरी एम्बोलिज्म जानलेवा हो सकता है. यदि आपको बिना किसी वजह के सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या बेहोशी का अनुभव होता है, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें.

पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण
हैदराबाद के फेमस इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट, डॉ. किरण कुमार रेड्डी पोलाका का कहना है कि एम्बोलिज्म का मुख्य कारण पल्मोनरी आर्टरी में खून का थक्का बनना है. लगभग 90 फीसदी मामलों में, यह थक्का पैरों की गहरी नसों में शुरू होता है, जिसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहते हैं. यह थक्का टूट जाता है और खून के बहाव के साथ दिल से फेफड़ों तक जाता है और वहां खून की नली को ब्लॉक कर देता है.
पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) होने की संभावना किसे अधिक होती है?
किसी को भी पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) हो सकता है, लेकिन कुछ चीजें PE होने का जोखिम बढ़ा सकती हैं, जैसे कि...
- सर्जरी होना- खासकर जोड़ों को बदलने वाली सर्जरी
डॉ. किरण कुमार रेड्डी के मुताबिक, कुछ खास मेडिकल स्थितियां, जिनमें शामिल हैं,
- कैंसर
- दिल की बीमारियां
- फेफड़ों की बीमारियां
- कूल्हे या पैर की हड्डी टूटना या कोई अन्य चोट लगना
- हार्मोन-आधारित दवाएं- जैसे गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी
- गर्भावस्था और बच्चे का जन्म- बच्चे के जन्म के बाद लगभग छह हफ्ते तक यह जोखिम सबसे अधिक होता है.
- लंबे समय तक हिल-डुल न पाना- जैसे बेड रेस्ट पर रहना, प्लास्टर लगा होना, या हवाई जहाज से लंबी यात्रा करना.
- उम्र- जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपका जोखिम भी बढ़ता जाता है, खासकर 40 साल की उम्र के बाद.
- पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक्स- कुछ खास जेनेटिक बदलाव जो खून के थक्के जमने और PE होने का जोखिम बढ़ा सकते हैं.
- मोटापा
क्या पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) को रोका जा सकता है?

- नए खून के थक्के बनने से रोककर पीई को रोका जा सकता है. रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं, जैसे कि...
- खून पतला करने वाली दवाएं लेते रहना- नियमित रूप से अपने डॉक्टर से चेकअप करवाना भी जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपकी दवाओं की खुराक खून के थक्के बनने से रोक रही है और ब्लीडिंग का कारण नहीं बन रही है.
- हार्ट-हेल्दी लाइफस्टाइल में बदलाव करें, जैसे हार्ट-हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और अगर आप स्मोकिंग करते हैं, तो स्मोकिंग छोड़ दें.
- डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) को रोकने के लिए कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल करें.
- लंबे समय तक बैठे रहने पर (जैसे लंबी यात्राओं पर) अपने पैरों को हिलाते रहना
- सर्जरी के बाद या बिस्तर पर आराम करने के बाद जितनी जल्दी हो सके चलना-फिरना शुरू कर देना.
(डिस्क्लेमर: इस वेबसाइट पर आपको प्रदान की गई सभी स्वास्थ्य जानकारी, चिकित्सा सुझाव केवल आपकी जानकारी के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक अनुसंधान, अध्ययन, चिकित्सा और स्वास्थ्य पेशेवर सलाह के आधार पर प्रदान कर रहे हैं, लेकिन बेहतर होगा कि इन पर अमल करने से पहले आप अपने निजी डॉक्टर की सलाह ले लें.)

