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अब फेफड़ों के कैंसर को सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि कई बीमारियों का समूह माना जाता है, डॉक्टर से जानिए वजह

मॉडर्न मेडिकल साइंस में लंग कैंसर को एक बीमारी नहीं माना जाता है. फेफड़ों के कैंसर के अलग-अलग प्रकारों के लक्षण, उनके बढ़ने का तरीका...

Lung cancer is now considered not just a single disease, but a group of diseases
अब फेफड़ों के कैंसर को सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि कई बीमारियों का समूह माना जाता है (GETTY IMAGES)
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By ETV Bharat Health Team

Published : September 2, 2026 at 2:19 PM IST

4 Min Read
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अब फेफड़ों के कैंसर को सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि कई बीमारियों का समूह माना जाता है. जिनका इलाज अलग-अलग तरीकों से किया जाता है. भारत के कई अस्पातालों में एडवांस्ड इमेजिंग तकनीक, पैथोलॉजी, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग और टारगेटेड थेरेपी जैसे साधन मौजूद हैं, जिनसे फेफड़ों के कैंसर के इलाज के तरीके में सुधार हुआ है. फेफड़ों के कैंसर का इलाज ट्यूमर के प्रकार, उसकी स्टेज, जेनेटिक बनावट, जगह और मरीज की सामान्य सेहत पर निर्भर करता है. एक ही तरह के फेफड़ों के कैंसर वाले दो मरीजों का इलाज का तरीका बहुत अलग हो सकता है. हर मरीज का शरीर और बीमारी अलग तरीके से काम करती है.

सीके बिरला हॉस्पिटल्स जयपुर में कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. आनंद मोहन का कहना है कि शुरुआती स्टेज में, कुछ मरीजों के लिए सर्जरी न सिर्फ सबसे असरदार इलाज हो सकती है, बल्कि इससे बीमारी पूरी तरह ठीक भी हो सकती है. ऑपरेशन का तरीका ट्यूमर की जगह और साइज के हिसाब से अलग-अलग होता है. जल्दी ठीक होने और फेफड़ों की क्षमता बनाए रखने के लिए या तो लंग-स्पेयरिंग सर्जरी (फेफड़े को बचाने वाली सर्जरी) या मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी) की जाती है. हालांकि, सर्जरी सभी मरीजों के लिए समाधान नहीं है.

डॉ. आनंद मोहन के अनुसार, बीमारी के एडवांस स्टेज के इलाज में कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी शामिल हो सकती है. सबसे दिलचस्प डेवलपमेंट में से एक है जेनेटिक म्यूटेशन और दूसरी असामान्यताओं का पता लगाने के लिए मॉलिक्यूलर टेस्टिंग का इस्तेमाल. मेडिकल साइंस के क्षेत्र में, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग ने बीमारियों को समझने और उनके इलाज के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है. यह एक एडवांस्ड तकनीक है जो किसी व्यक्ति के DNA, RNA या प्रोटीन का एनालिसिस करती है, जिससे शरीर के अंदर बहुत छोटे जेनेटिक म्यूटेशन का पता लगाया जा सकता है.

डॉ. आनंद मोहन कहते हैं कि फेफड़ों के कैंसर के आधुनिक इलाज में स्पेशलिस्ट की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम शामिल होती है. जिसमें थोरेसिक सर्जन, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, पल्मोनोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट होते हैं. जो हर मरीज के लिए इलाज का सबसे अच्छा तरीका तय करने के लिए मिलकर काम करते हैं.

फेफड़ों के कैंसर के इलाज में सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अब यह नहीं पूछा जाता कि हम फेफड़ों के कैंसर का इलाज कैसे करें? बल्कि यह पूछा जाता है कि इस मरीज के इस ट्यूमर के लिए सबसे अच्छी थेरेपी कौन सी है? पर्सनलाइज्ड मेडिसिन (हर मरीज के हिसाब से इलाज) की ओर इस बदलाव से बेहतर नतीजे मिल रहे हैं, हेल्थकेयर का खर्च और गैर-जरूरी प्रक्रियाएं कम हो रही हैं, और साथ ही मरीज को ज्यादा सुरक्षित और सटीक इलाज मिल रहा है.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक शोध, अध्ययनों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान कर रहे हैं. इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सर्वोत्तम होगा.)

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