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दुश्मन प्लांट्स से डायबिटीज का पर्मानेंट इलाज, आयुर्वेद डॉक्टरों का दावा एलोपैथी नहीं स्थाई समाधान

आयुर्वेदिक पेड़ पौधों से कंट्रोल कर सकते हैं डायबिटीज, जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में मधुमेह से जुड़ी हर दवा का पेड़. विश्वजीत सिंह राजपूत की रिपोर्ट.

JABALPUR INSULIN PLANT
आयुर्वेद में मधुमेह की बीमारी का इलाज (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : April 30, 2026 at 7:15 PM IST

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जबलपुर: भारत में प्राचीनकाल से ही बीमारियों का इलाज पेड़-पौधे, उनकी पत्तियों और जड़ी बूटियों से होता आया है. वर्तमान दौर में ऐसे इलाज को आयुर्वेद की श्रेणी में रखा गया है. डायबिटीज या मधुमेह की बीमारी का इलाज आयुर्वेद में संभव है. आयुर्वेद के डॉक्टरों का दावा है कि जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV) में कुछ ऐसे पेड़ हैं जिन्हें 'इंसुलिन' के पेड़ के नाम से जाना जाता है. हालांकि, इनकी पत्तियां इंसुलिन नहीं बनातीं, लेकिन यह डायबिटीज को नियंत्रित करती हैं. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि हमने ऐसे सभी पेड़ों को संरक्षित किया है जो कहीं न कहीं मधुमेह की बीमारी के लिए दवा का काम करते हैं.

2020 की अंतरराष्ट्रीय मधुमेह संघ (आईडीएफ) की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में 463 मिलियन लोग डायबिटीज का शिकार हैं. भारत में मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या 7.5 करोड़ है. इसी रिपोर्ट के अनुसार भारत में टाइप वन डायबिटीज सबसे ज्यादा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में होने वाली मौतों में से 2 प्रतिशत मौतें डायबिटीज की वजह से होती हैं.

एलोपैथिक पद्धति में मधुमेह का पर्मानेंट इलाज नहीं (ETV Bharat)

एलोपैथिक पद्धति में मधुमेह का पर्मानेंट इलाज नहीं

आधुनिक जीवन शैली में डायबिटीज की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. एलोपैथिक पद्धति से होने वाले इलाज में डायबिटीज का कोई स्थाई समाधान नहीं है. लोगों को खून में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखने के लिए लगातार गोलियां खानी पड़ती है. क्योंकि पेनक्रियाज इंसुलिन बनाना बंद कर देती हैं और खून में शुगर की मात्रा का बढ़ना या घटना दोनों ही खतरनाक माना जाता है.

DIABETES AYURVEDIC CURE
आयुर्वेद डायबिटीज का स्थाई इलाज (ETV Bharat GFX)

भारत में एलोपैथिक इलाज के अलावा आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज भी किया जाता है और आयुर्वेद में कई ऐसे नुस्खे और दवा हैं जिनके इस्तेमाल से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है और आयुर्वेदिक डॉक्टर का दावा है कि डायबिटीज ठीक भी हो जाती है.

जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में भारत की सबसे बड़ी औषधीय पौधों की नर्सरी है. इस नर्सरी में लगभग 1100 किस्म की जड़ी बूटियां हैं. इसी नर्सरी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानेंद्र तिवारी का कहना है कि "हमारे पास मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए कई पेड़ पौधे हैं जिनके अलग-अलग इस्तेमाल से मधुमेह को ठीक किया जा सकता है."

JNKVV JABALPUR
जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में मधुमेह से जुड़ी हर दवा का पेड़ (ETV Bharat GFX)

एक नजर डालते हैं डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले पेड़-पौधों पर:

कॉस्टस इग्नियस

डॉ. ज्ञानेंद्र तिवारी ने बताया कि "इस प्रजाति के पौधे को इंसुलिन के पेड़ के नाम से जाना जाता है. यह एक छोटा पौधा होता है इसकी ऊंचाई लगभग 3 मीटर तक हो जाती है. इसकी पत्तियां अदरक की पत्तियों की तरह दिखती हैं, जो लगभग 6 इंच से 12 इंच तक लंबी हो सकती हैं. इसमें सफेद रंग के फूल आते हैं और यह पौधा मध्य प्रदेश के दक्षिणी इलाके के जंगलों में बहुतायत में पाया जाता है. इस पौधे की पत्तियों को खाने से खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहती है."

विजयसार (आम भाषा में बीजासार भी कहते)

बीजासार (विजयसार) एक बड़ा पेड़ होता है. आयुर्वेद के डॉ. अचल गुप्ता बताते हैं कि "बीजासार की लकड़ी के बने हुए कप में पानी पीने से खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहती है."

DIABETES CURING HERBAL PLANT
डायबिटीज को कंट्रोल करते हैं ये पौधे (ETV Bharat GFX)

डॉ. ज्ञानेंद्र तिवारी का कहना है कि "उनकी हर्बल नर्सरी में इसके पौधे भी मौजूद हैं. हमारे जंगलों से बीजासार की लकड़ी का भयंकर दोहन हो रहा है इसकी वजह से जंगलों में बीजासार के पौधे कट रहे हैं क्योंकि कप बनाने के लिए लकड़ी के तने का इस्तेमाल होता है और इसके लिए पेड़ को काटा जाता है. एक कप 20 से 25 दिनों तक दवा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. फिर नए कप की जरूरत पड़ती है. इसलिए इसके तने की जरूरत ज्यादा पड़ती है और लोग इसका इस्तेमाल डायबिटीज की दवा के रूप में करते हैं इसके अच्छे परिणाम हैं."

गुड़मार

आयुर्वेदिक डॉ. अचल गुप्ता का कहना है कि "मधुमेह में गुड़मार का प्रयोग बहुत अधिक और बहुत पहले से किया जा रहा है. गुड़मार का पाउडर खाकर बढ़ी हुई शुगर को कंट्रोल में किया जा सकता है. इससे बनी हुई कई दवाएं भी बाजार में आती हैं. जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय की नर्सरी में गुड़मार के पौधे भी मिलते हैं."

गिलोय

गिलोय आयुर्वेद की एक ऐसी दवा है जिसका इस्तेमाल किसी भी किस्म के बुखार को कम करने के लिए किया जाता है. यह रोग प्रतिरोधी क्षमता को भी बढ़ता है और इसका इस्तेमाल मधुमेह को रोकने में भी किया जाता है. गिकोय को काटकर इसकी लकड़ी का काढ़ा बनाया जाता है और इसी को पीकर लोग ठीक होते हैं. इसका पौधा भी जबलपुर की हर्बल नर्सरी में मौजूद है.

DIABETES CURING HERBAL PLANT
डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले पौधे (ETV Bharat GFX)

इंसुलिन प्लांट जिम्नेथियम

जिम्नेथियम को भी इंसुलिन के पेड़ के नाम से जाना जाता है. यह हमारे वातावरण का नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यह हमारे वातावरण में अच्छी तरह से फल फूल रहा है. इसकी पत्तियों को खाकर भी इंसुलिन को नियंत्रित किया जाता है. दरअसल, इसकी पत्तियां लीवर को मजबूत करती हैं और जब लीवर मजबूत हो जाता है तो शरीर में शुगर की मात्रा नियंत्रित हो जाती है.

आयुर्वेद में डायबिटीज का उपचार है

डॉ. अचल गुप्ता का कहना है कि "एलोपैथिक इलाज में ऐसा माना जाता है कि डायबिटीज को ठीक नहीं किया जा सकता क्योंकि डायबिटीज में एक बार पेनक्रियाज ने काम करना बंद किया तो फिर इंसुलिन नहीं बनती. वहीं, आयुर्वेद का सिद्धांत थोड़ा अलग है. आयुर्वेद की ज्यादातर दवाएं मरीज के पाचन तंत्र को ठीक करती हैं और ऐसा माना जाता है कि यदि पाचन तंत्र ठीक रहता है तो शरीर में ताकत आती है. शरीर की ताकत जब बढ़ती है तो खराब अंग भी ठीक ढंग से काम करने लगते हैं ऐसी स्थिति में अग्न्याशय (Pancreas) भी ठीक हो सकती हैं.

JABALPUR INSULIN PLANT
जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में हर्बल गार्डन (ETV Bharat)

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डायबिटीज मूल रूप से जीवन शैली से जुड़ी हुई बीमारी है. यदि जीवन शैली का पूरा ध्यान रखा जाए और खाना, तनाव, आराम और व्यायाम को सजग होकर नियंत्रित किया जाए तो डायबिटीज नहीं हो सकती. कुछ लोगों में यह बीमारी जन्मजात होती है उनके लिए चिकित्सकों की मदद से एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाओं का कंबीनेशन करके अपने लिए दवा खोजनी चाहिए. आयुर्वेदिक दवाओं का साइड इफेक्ट एलोपैथिक दवाओं की अपेक्षा कम होता है.